छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलकर सभी समाज के हित में कर रही है कार्य – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र

सतनाम भवन सेक्टर-6 भिलाई में आयोजित बाबा गुरु घासीदास जयंती एवं गुरु पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय

सतनाम भवन में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा बाबा गुरु घासीदास जयंती आयोजन हेतु प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये की घोषणा

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई सेक्टर-6 स्थित सतनाम भवन में आयोजित परमपूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती एवं गुरु पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सतनाम भवन में बाबा गुरु घासीदास जी की गुरु-गद्दी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस गरिमामय आयोजन में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, कौशल विकास तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा तथा विधायक श्री रिकेश सेन विशेष रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि 18वीं सदी में जब समाज में छुआछूत, भेदभाव और असमानता चरम पर थी, उस समय बाबा गुरु घासीदास जी ने “मनखे-मनखे एक समान” का महान संदेश देकर मानवता को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास जी के इन्हीं आदर्शों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए सभी समाज वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी जैसी योजनाओं का सीधा लाभ किसानों और आम नागरिकों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के समग्र विकास के उद्देश्य से अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसमें अहिवारा विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। समाज के विकास के लिए प्राधिकरण के माध्यम से 75 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही समाज के बेटा-बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा 15 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए जिला मुख्यालयों में नालंदा परिसर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों तक पहुँच सकें। उन्होंने समाज में फैल रही नशाखोरी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विरुद्ध कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस उद्योग नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने समाज से शिक्षा को बढ़ावा देने, समानता, सद्भाव और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरु घासीदास सेवा समिति की मांगों का उल्लेख करते हुए सतनाम भवन सेक्टर-06 भिलाई में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा प्रति वर्ष बाबा गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम के आयोजन हेतु 10 लाख रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की।

प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को पूर्ण भाव से जीवन में उतार लिया जाए, तो समाज की सभी बुराइयों का स्वतः अंत हो जाएगा। उन्होंने सतनाम मार्ग पर चलने वालों से खान-पान और आचरण को शुद्ध रखने का आह्वान किया।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग और संदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री सांवला राम डाहरे, गुरु घासीदास सेवा समिति के अध्यक्ष श्री भरत लाल कुर्रे, उपाध्यक्ष श्रीमती उर्मिला भास्कर एवं समिति के अन्य पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।

लाल किले में गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’

छत्तीसगढ़ के गेड़ी नृत्य का अद्भुत प्रदर्शन को यूनेस्को ने सराहा

180 देशों के प्रतिनिधियों ने किया छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अभिवादन

छत्तीसगढ राज्य के बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल द्वारा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई।  7 से 13 दिसम्बर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहीं। समारोह में बिलासपुर के गेड़ी नर्तक दल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को काफी सराहा गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गेडी नर्तक दल को बधाई और शुभकामनाएं दीं है l 

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया

         समारोह का ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। 

गेड़ी नृत्य दल ने अपने रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया

         मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने सशक्त, ऊर्जावान एवं रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित 180 देशों के डेलिगेट्स उपस्थित रहे।

यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित 180 देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिए

       मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों के मन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा उत्पन्न की। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे द्वारा एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले एवं बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तकों प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे एवं मनोज माण्डले ने साहसिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। विशेष रूप से तब, जब एक गेड़ी पर संतुलन बनाते हुए कलाकारों ने मानवीय संरचनाएं बनाईं, पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।

गेड़ी नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाई

         छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों व चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध एवं मयूर पंख धारण कर प्रस्तुत भाव नृत्य ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया व छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए शुभकामनाएं दी।

राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के नये उद्देश्य

सहकारिता मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के सहकारी समिति अधिनियमों में मौजूद किसी कानूनी या नियामक कमी की पहचान नहीं की है जिसके कारण राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।

जब कभी राज्‍य/संघ राज्‍यक्षेत्र राज्‍य-स्‍तरीय सहकारी डेटाबेस के राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के साथ एकीकरण के लिए तैयार होते हैं, तब उन्‍हें आवश्‍यक तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।

सहकारिता मंत्रालय ने राज्‍यों के लिए सहकारी समितियों का डाटा एनसीडी पोर्टल से प्राप्‍त करने हेतु एक मानक API विकसित किया और दिनांक 27.05.2025 को मानक API विनिर्देशन दस्‍तावेज एवं डेटाबेस schema को साझा किया है । तदुपरांत, आरसीएस अनुप्रयोगों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट-ड्रिवन डाटा पुशिंग के लिए पुश APIs को विकसित किया गया और सभी संबंधित दस्‍तावेजों और मानक प्रचालन प्रक्रियाओं को राज्‍यों के साथ दिनांक 22.09.2025 को साझा किया गया । RCS कंप्‍यूटरीकरण पूर्ण होने और API एकीकरण की परामर्शिका के साथ एक व्‍यापक चेकलिस्‍ट भी दिनांक 14.11.2025 को जारी की गई । राजस्‍थान, एनसीडी पोर्टल के साथ API एकीकरण का कार्य पूरा कर चुका है । एकीकरण योजना के अनुसार, सफल दो-तरफा एकीकरण और सहकारी डाटा के सिंक्रोनाइजेंशन के लिए राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को रिवर्स/पुल API का विकास और संपूर्ण RCS कंप्‍यूटरीकरण सुनिश्चित करना आवश्‍यक है ।

सहकारी क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और कमजोर वर्ग  की अधिक प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए निम्‍नलिखित कदम उठाए गए हैं –

  1. मौजूदा कानून के अनुसमर्थन और सतानवेवां संविधान संशोधन के उपबंधों की अंतर्विष्‍टी द्वारा बहुराज्‍य सहकारी समितियों में शासन सशक्‍त करने, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने तथा निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार, आदि के लिए बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम और नियम, 2023 को क्रमश: दिनांक 03.08.2023 और 04.08.2023 को अधिसूचित किया गया ।   

बहुराज्‍य सहकारी समितियों में महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों की प्रतिभागिता बढ़ाने के लिए बहुराज्‍य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीट और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए एक सीट पर आरक्षण का उपबंध किया गया है ।

  1. महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्‍त प्रतिनिधित्‍व देकर प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स) की सदस्‍यता को भी अधिक समावेशी और व्‍यापक बनाया गया है । अब तक, 32 राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों ने आदर्श उपविधियां अपना ली हैं या उनकी मौजूदा उपविधियां, आदर्श उपविधियों के अनुरूप हैं ।
  2. राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारी क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य कमजोर वर्गों की प्रतिभागिता बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठा रहा है जिनका ब्‍योरा निम्‍नानुसार है:

NCDC द्वारा नंदिनी सहकार, स्‍वयं शक्ति सहकार, आयुष्‍मान सहकार और युवा सहकार जैसी समर्पित योजनाएं चलाई जा रही हैं जो महिला-नेतृत्‍व वाली, युवा नेतृत्‍व वाली, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और नवोन्‍मेषी सहकारी समितियों को रियायती वित्तीयन, ब्‍याज अनुदान और स्‍टार्ट-अप सहयोग प्रदान करती हैं । इनका ब्‍योरा निम्‍नानुसार है-

वर्ष 2024-25 के दौरान, महिला सहकारी समितियों को ₹1,355.61 करोड़ की सहायता प्रदान की गई जिससे 41 लाख से अधिक महिला सदस्‍य लाभान्वित हुईं । दिनांक 31.03.2025 के अनुसार, एनसीडीसी ने महिलाओं द्वारा विशिष्‍ट रूप से प्रवर्तित सहकारी सम‍ितियों के विकास के लिए संचयी रूप से ₹7,781.97 करोड़ की वित्तीय सहायता का संवितरण किया है ।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों की योजनाएं उन्‍हें विपणन, कार्यशील पूंजी और अवसंरचना निर्माण में सहायता प्रदान करती हैं । वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अनुसूचित जाति सहकारी समितियों को ₹0.18 करोड़ की धनराशि और अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों को ₹29.63 करोड़ की धनराशि का संवितरण किया गया । दिनांक 31.03.2025 के अनुसार, अनुसूचित जाति सहकारी समितियों को ₹323.52 करोड़ और अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों को ₹5308.02 करोड़ का संचयी संवितरण किया गया।

इसके अलावा, एनसीडीसी मात्स्यिकी, पशुधन, हथकरघा, रेशम उत्‍पादन और श्रमिक क्षेत्रों में दुर्बल वर्ग की सहकारी समितियों को सहायता प्रदान करता है जिससे लाखों सदस्‍य लाभान्वित होते हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला सदस्‍य भी शामिल हैं । एनसीडीसी ने महिला सशक्‍तीकरण, सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण और ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल पर विशेष बल देते हुए सहकारी क्षेत्र की उभरती जरूरतों के साथ संरेखित क्षेत्र विशिष्‍ट योजनाओं और केंद्रीकृत उत्‍पादों की शुरूआत की है ।

मंत्रिपरिषद के निर्णय : दिनांक – 10 दिसम्बर 2025

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 

1. मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरणों के निराकरण/वापसी संबंधी प्रक्रिया को अनुमोदित किया है। 

         मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा एवं परीक्षण के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति परीक्षण उपरांत प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।

        आत्मसमर्पित नक्सलियों के प्रकरण वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। यह समिति आत्मसमर्पित नक्सली के अपराधिक प्रकरणों की वापसी के लिए रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करेगी। पुलिस मुख्यालय अभिमत सहित प्रस्ताव भेजेगा। शासन द्वारा विधि विभाग का अभिमत प्राप्त कर मामलों को मंत्रिपरिषद उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उपसमिति द्वारा अनुशंसित प्रकरणों को अंतिम अनुमोदन हेतु मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। केंद्रीय अधिनियम अथवा केंद्र सरकार से संबंधित प्रकरणों के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त की जाएगी। अन्य प्रकरणों को न्यायालय में लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से वापसी की प्रक्रिया हेतु जिला दण्डाधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।

2. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 14 अधिनियमों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 

       उल्लेखनीय है कि कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों अनावश्यक रूप से प्रभावित होते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक है। इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। अब 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को भी सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक लाया जाएगा। 

        इस विधेयक में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, न्यायालयों का बोझ कम होगा और नागरिकों को तेजी से राहत मिल सकेगी। साथ ही, कई अधिनियमों में दंड राशि लंबे समय से अपरिवर्तित होने के कारण प्रभावी कार्यवाही बाधित होती थी, इस विधेयक से वह कमी भी दूर होगी। इन संशोधनों से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।

         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाया जा रहा है। 

3. मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2025-2026 का विधानसभा में उपस्थापन बावत् छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 का अनुमोदन किया गया।

विहिप केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक में देशभर से जुटे लगभग 300 संत

नई दिल्ली, दिसंबर 9, 2025। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की द्वि-दिवसीय बैठक मंगलवार सायंकाल 3 बजे इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी ने हिन्दू समाज के समक्ष चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन का आग्रह किया –

  • हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति।
  • देश भर में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर विराम हेतु प्रभावी उपाय।
  • धर्म स्वातंत्र्य कानून को संपूर्ण देश में एक समान रूप से लागू करना।
  • देश में बढ़ती जिहादी मानसिकता, कट्टरता और हिंसक घटनाएं।
  • सीमांत क्षेत्रों में बढ़ती सामाजिक समस्याओं और नशामुक्ति अभियान।
  • आगामी जनगणना में सभी हिन्दू अपना धर्म ‘हिन्दू’ ही लिखें।

बैठक में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि कुछ समूह आज जिहाद और आतंकी मानसिकता को उचित ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं। दिल्ली में हुए आतंकी हमले के आरोपी का समर्थन करने की प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि देश की संसद कठोर और प्रभावी कानून लाए। उन्होंने देवालयों की सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बंगाल से पधारे पूज्य संतों ने राज्य की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे जिहादी बयान, हिन्दुओं को धमकी व अत्याचार न सिर्फ बंगाल बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए चेतावनी है।

सुधांशु जी महाराज ने राममंदिर निर्माण की 500 वर्षों की तपस्या और संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की असली ऊर्जा हमारे संतों और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है। आज समय की आवश्यकता है कि गुरुकुल, पुजारी परंपरा, आश्रम और संस्कार केंद्रों को सशक्त बनाया जाए तथा सनातन समाज अपनी सांस्कृतिक शक्ति के लिए संगठित हो।

बैठक में पूज्य जगद्गुरु स्वामी राम कमलचार्य जी, अटल पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद जी महाराज, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज, विहिप उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल, संरक्षक दिनेश चंद्र, सह संगठन मंत्री विनायक राव व केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी सहित देशभर से पधारे अनेक पूजनीय संत और विहिप पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं – दत्तात्रेय होसबाले जी

ऊधमपुर, 07 दिसम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को रिवायत हॉल में ”100 वर्ष की यात्रा और भविष्य की दिशा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा, राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया और बताया कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों ने विदेशी आक्रमणकारियों का डटकर सामना किया और हमारी सभ्यता एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा। उन्होंने बीते 100 वर्षों में समाज के लिए संघ स्वयंसेवकों द्वारा किए गए निःस्वार्थ सेवाकार्यों और योगदान पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि पिछले एक शताब्दी से संघ ने दैनिक शाखाओं, सेवा गतिविधियों, शैक्षणिक पहलों एवं सामाजिक सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से मूल स्तर पर राष्ट्र निर्माण का कार्य सतत् किया है। संघ का मूल उद्देश्य एक सशक्त, आत्मविश्वासी, सांस्कृतिक रूप से दृढ़ एवं एकजुट भारत का निर्माण रहा है। स्वयंसेवकों ने अनुशासन, चरित्र-निर्माण और निःस्वार्थ सेवा के आदर्श पर चलते हुए राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भविष्य की दिशा पर बात करते हुए उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा पर विशेष बल दिया, उन्होंने इसे भविष्य के सशक्त भारत का आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने, परिवार को राष्ट्र विकास की मूल इकाई के रूप में सुदृढ़ करने, पर्यावरण संरक्षण को जीवन-शैली का हिस्सा बनाने, स्वदेशी आधारित आत्मनिर्भरता के माध्यम से आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने पर केंद्रित है। उन्होंने आग्रह किया कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष को राष्ट्र सेवा की गौरवशाली यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र उन्नति के लिए अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।

उन्होंने युवा एकत्रीकरण में बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा नशीली दवाओं एवं अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यदि युवा सही दिशा का चयन करें तो राष्ट्र विकास के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है। युवा अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग और जागरूक रहें तथा समाज हित में आगे आएं।

उन्होंने पंच परिवर्तन के संदेश को स्थानीय बैठकों और चर्चाओं के माध्यम से हर घर तक पहुंचाने पर बल दिया। नशा, जबरन धर्मांतरण एवं अन्य सामाजिक विकृतियां आज बड़ी चुनौतियां हैं और इनसे निपटने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सकारात्मक परिवर्तन के अग्रदूत बनें, सामाजिक समरसता को मजबूत करें और भारत को उसके उज्ज्वल तथा गौरवमयी भविष्य की ओर अग्रसर करें।

निर्माण कार्यों से शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास को मिलेगी गति

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज नगर पंचायत पिपरिया को विकास की नई दिशा देते हुए कुल साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की सौगात दी। पीएमश्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, पिपरिया परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। 

उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना हमारी प्राथमिकता है। शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास तीनों को गति देने के लिए ये कार्य मील का पत्थर साबित होंगे। इन परियोजनाओं के साथ पिपरिया में शिक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं और नगरीय विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। यह सौगात पिपरिया के आने वाले वर्षों को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पंचायत पिपरिया अध्यक्ष श्री घुरवाराम साहू जिला पंचायत सदस्य डॉक्टर वीरेंद्र साहू, श्री मुकेश अग्रवाल, श्री निर्मल द्विवेदी, पार्षद कमल कांत नाविक, श्री सोम पटेल सहित जनप्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने 1 करोड़ 60 लाख 92 हजार रूपए की लागत से पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, 14 लाख 83 हजार रुपए की लागत से सामुदायिक भवन, 10 लाख रुपए की लागत से जायसवाल सामुदायिक भवन, 3 करोड़ 31 लाख 90 हजार रुपए की लागत से विभिन्न स्थानों में चौरिया, घड़ी व अन्य चौक निर्माण – सौंदर्यीकरण, हाईमास्ट लाईट, आरसीसी नाली, सीसी रोड, बाउंड्री वाल, व्यायामशाला, सामुदायिक भवन एवं पाथवे निर्माण, 19 लाख रुपए की लागत से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में रासायनिक, प्री-विज्ञान व भौतिक प्रयोगशाला और 20 लाख रुपए की लागत से नवीन खाद्य गोदाम निर्माण का भूमिपूजन किया। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह सभी परियोजनाएँ पिपरिया को आधुनिक शिक्षा, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और सुदृढ़ नगरीय विकास की दिशा में नई गति देंगी।

सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कर रही निरंतर कार्य

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए की बड़ी राशि से एक साथ  विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिपरिया अस्पताल का उन्नयन हो चुका है, वहीं सीएचसी निर्माण के लिए स्वीकृति जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की गई है तथा अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन की शुरुआत भी की गई है। उन्होंने बताया कि आईटीआई के लिए पौने 3 करोड़ रुपए और अनुसूचित जाति छात्रावास निर्माण के लिए 1.5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिससे युवाओं और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

पीएम श्री स्कूल उन्नयन के लिए 1.60 करोड़ रुपए का भूमिपूजन, प्रतिभा को मिलेगा आधुनिक शिक्षण मंच

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पिपरिया स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पीएम श्री स्कूलों के उन्नयन के लिए 1 करोड़ 60 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने स्कूल में संचालित स्मार्ट क्लास की व्यवस्था और विद्यार्थियों से इसकी उपयोगिता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कवर्धा विधानसभा के 50 स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने थ्री-डी तकनीक के माध्यम से विज्ञान विषय को पढ़ाने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चे अत्यंत प्रतिभावान होते हैं और आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद नगर विकास कार्यों को नई गति मिली है और पिपरिया में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आने वाले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

स्वास्थ सुविधा में हो रहा तेजी से विस्तार

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कवर्धा को मेडिकल कॉलेज की एक बड़ी सौगात मिली और निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। मेडिकल कॉलेज में 50 सीटों हेतु तैयारी की जा रही है और 60 पदों की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पिपरिया एवं तरेगांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हेतु 52–52 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। बच्चों के लिए 50-सीटर क्रिटिकल केयर अस्पताल, जिला अस्पताल की क्षमता 100 से बढ़ाकर 220 बिस्तर, तथा सीटी स्कैन सेवा प्रारंभ की गई है। बोडला में सोनोग्राफी सेवा आरंभ की गई है। पिपरिया सहित दो स्थानों पर एंबुलेंस की सुविधा भी प्रारंभ की गई है। नया बस स्टैंड एवं मेडिकल कॉलेज को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए घोटिया रोड सहित गौरव पथ के दोनों मार्गों का उन्नयन किया जा रहा है।

जनसहभागिता से स्वच्छ और समृद्ध जिला का होगा  निर्माण

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। भोरमदेव विद्यापीठ निःशुल्क कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। साढ़े 4 करोड़ रुपये की लागत से नालंदा परिसर का भूमिपूजन किया गया है। कवर्धा के प्राचीन बूढ़ा महादेव परिसर में कांवरिया श्रद्धालुओं हेतु सुविधाओं के निर्माण का कार्य किया जाएगा। भोरमदेव पर्यटन क्षेत्र के उन्नयन हेतु 146 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कवर्धा विधानसभा में विकास कार्यों की गति निरंतर तेज हो रही है। रायपुर–बिलासपुर–राजनांदगांव मार्ग को फोरलेन में विकसित करते हुए कवर्धा प्रवेश मार्ग को उच्च स्तरीय स्वरूप देने के लिए 54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के सभी हिस्सों में संतुलित एवं व्यापक विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। स्वच्छता के क्षेत्र में जनसहयोग आवश्यक है। प्रत्येक वार्ड और हर गली को स्वच्छ बनाने के लिए जनजागरण तथा सामुदायिक सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाएं।

कंठस्थ शुक्ल यजुर्वेद का दण्डक्रम पारायण

वाराणसी। एक ऐतिहासिक समारोह में 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिनी शाखा) के अत्यंत कठिन दण्डक्रम पारायण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सम्मानित किया गया। इस प्रकार की साधना पिछले तीन सौ वर्षों में केवल कुछ ही बार सम्पन्न हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी और जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विदुशेखर भारती महास्वामीजी के आशीर्वाद से भव्य शोभायात्रा और नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया गया। शोभायात्रा के दौरान काशी की सड़कों पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों की ताल और बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। मार्गभर पुष्पवृष्टि और पारंपरिक संगीत ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।

दक्षिणाम्नाय श्री शारदापीठ, शृंगेरी की ओर से देवव्रत को ₹5 लाख का बहुमूल्य स्वर्ण कंगन और ₹1,11,116 की सम्मान राशि दी गई।। यह सम्मान पीठ की ओर से डॉ. तंगीराल शिवकुमार शर्मा ने उभय जगद्गुरुओं के आशीर्वाद के साथ प्रदान किया।

दण्डक्रम पारायण वैदिक अध्ययन की सबसे कठिन विधियों में से एक मानी जाती है, जिसमें स्वरों, संधि-विच्छेद और विरोध-संधि की अत्यंत सूक्ष्म गणनाएँ शामिल होती हैं। इसे परंपरागत रूप से वेद मुकुट के रूप में भी जाना जाता है।

वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा के कंठस्थ दण्डक्रम पारायण को 50 दिन में पूर्ण करने वाले 19 वर्षीय बटु देवव्रत रेखे को अंगवस्त्रम, प्रतीक चिह्न नारिकेल देकर सम्मानित किया।

काशी में पहली बार देवव्रत रेखे ने 12 अक्तूबर 2025 से 29 नवम्बर 2025 के मध्य 50 दिन की अवधि में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण कि​या। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा संहिता में कुल 40 अध्याय एवं 2000 मंत्र है। लेकिन दण्डक्रम पारायण में मंत्रों की संख्या 25 लाख हो जाती है। यह दण्डक्रम पारायण काशी के सांगवेद विद्यालय रामघाट में पद्मश्री पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

देवव्रत रेखे की वैदिक शिक्षा उनके पिता घनपाठी महेश रेखे के निर्देशन में हुई है। इस तरह का शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनी की शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण 200 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में हुआ था। काशी में यह कंठस्थ दण्डक्रम पारायण पहली बार होने से विशेष है। महेश रेखे महाराष्ट्र के पुणे के समीप अहिल्यानगर के निवासी हैं।

वेद के दण्डक्रम पारायण पाठ श्रवण से अधिकाधिक फल की प्राप्ति का विधान है। देवव्रत रेखे की इस महनीय उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर प्रशंसा की।

उन्होंने एक्स पर लिखा –

19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है।

काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

हमने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा के घेरे को मजबूत बनाया है, इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो 126 थी, वो घटकर 11 रह गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGsP/IGsP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है

अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा

पिछले 40 साल से देश के लिए नासूर बनें 3 हॉटस्पॉट नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे

हमने NIA, UAPA कानूनों को सुदृढ़ बनाने, तीन नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए हैं

तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक होगी

हमने PFI पर बैन लगाकर देशभर में उनके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण बनी

Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy इन तीन बिंदुओं पर काम करके हम कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं

हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है कि इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच भी जमीन न मिल पाए

अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस NCB के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट – नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर – की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक बन जाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद पर मोदी सरकार की कार्रवाई का जिक्र कहते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगाने के बाद देशभर में उसके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy के तीन बिंदुओं पर काम कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।

गृह मंत्री ने दोहराया कि हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है जिससे इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच जमीन भी न मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पूर्ण गौरव के साथ धर्म ध्वजारोहण

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अयोध्या धाम, 25 नवम्बर।

रामराज्य का प्रतीक धर्मध्वज आज पूर्ण श्रद्धा के साथ श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के उत्तुंग शिखर पर चढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वज को 191 फिट ऊंचाई पर चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की। हजारों की संख्या में उपस्थित हर जाति वर्ग के लोग भाव विभोर होकर पांच सौ वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद आए इस सार्थकता दिवस के साक्षी बने। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रामदरबार में आरती कर रामलला का दर्शन पूजन किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री, सरसंघचालक जी सहित सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भव्य मंदिर पर ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति ही नहीं, अपितु नए युग का शुभारंभ है। रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। अनगिनत पीढ़ियों की प्रतीक्षा भव्य मंदिर के रूप में है। यह ध्वज धर्म और मर्यादा के साथ ही राष्ट्रधर्म और विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। “नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना..” की रामराज्य की परिकल्पना में सभी को अन्न, स्वास्थ्य सुविधा, आवास आदि उपलब्ध कराना है। यही रामराज्य की उद्घोषणा का संकल्प है। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद इस ध्वजारोहण से अयोध्या अब उत्सवों की वैश्विक राजधानी बन गई है।

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। इसके लिए कितने लोगों ने सपना देखा, कितनों ने प्रयास किया, कितनों ने अपने प्राण अर्पण किए। अशोक जी, महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी सहित कितने ही संत पुरुषों, गृहस्थ, विद्यार्थियों ने अपने प्रणार्पण किए, आज उनकी आत्माएं तृप्त हो रही होंगी। आज उस मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। यह उसी ध्वज का आरोहण व रामराज्य का ध्वज है जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख शांति प्रदान करता था। उसी ध्वज को आज फिर से हमने नीचे से ऊपर चढ़ता हुआ, अपने शिखर पर विराजमान होते अपनी आंखों से देखा है। मंदिर बनने में भी समय लगा, 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही हैं। मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को उच्चतम शिखर पर पहुंचाया, जिससे सारा विश्व ठीक चले। व्यक्तिगत, पारिवारिक जीवन से लेकर तो संपूर्ण सृष्टि का जीवन ठीक चले, यही धर्म है। उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग ही इस ध्वज का रंग है। इस धर्म ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष उस रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है, जिससे यह व्यक्त होता है कि स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों के लिए छाया प्रदान करें। ध्वजारोहण यह भी संदेश देता है कि इस जीवन का झंडा शिखर तक पहुंचना है, चाहे जितनी प्रतिकूलता, कठिनाई क्यों न हो। भले ही सारी दुनिया स्वार्थ में बैठी हो, लेकिन हमारा संकल्प सूर्य भगवान के तेज जैसा है। हिन्दू समाज ने लगातार 500 साल और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस तत्व को सिद्ध किया और रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यह ध्यान रहे कि संपूर्ण दुनिया में सुख बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रतीक को देखकर हिम्मत रखकर सतत प्रयास करते हुए, सब प्रकार की प्रतिकूलताओं में भी हम सबको मिलकर करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आज यह हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जो संकल्प हमारे पूर्वजों ने दिया है। यह देश जहां हम जन्मे हैं, सबसे प्राचीन है, इसलिए बड़े भाई हैं, ऐसा जीवन जिएं कि पृथ्वी के सर्वमानव चरित्र की शिक्षा, जीवन की विद्या भारतवासियों से सीखें। सबको विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष खड़ा करना है। यह विश्व की अपेक्षा है, यही हमारा कर्तव्य है। मंदिर में श्री रामलला विराजमान हैं, उनका नाम लें और इस कार्य की गति बढ़ाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश और दुनिया इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। राम भक्तों को संतोष, असीम कृतज्ञता, अपार अलौकिक आनंद है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहुति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। यह एक पल भी आस्था से डिगी नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटी नहीं। आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्म ध्वजा के रूप में दिव्यतम्, भव्यतम् मंदिर प्रतिस्थापित हुआ। यह पुनर्जागरण का ध्वज है, इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ‘ॐ’ शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प है, सफलता है, संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे सपनों का साकार स्वरूप है। यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। यह धर्म ध्वज आह्वान करेगा सत्यमेव जयते का। यह धर्म ध्वज प्रेरणा बनेगा प्राण जाई पर वचन न जाई। धर्म ध्वजा कामना करेगा परेशानी से मुक्ति, समाज में शांति और सुख हो, यह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा। युगों-युगों तक प्रभु श्री राम के आदेशों और प्रेरणा को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। संपूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों को इस अद्वितीय अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज उन सभी भक्तों को भी प्रणाम करता हूं, हर उस दानवीर का आभार व्यक्त करता हूं, जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। राम मंदिर के निर्माण से जुड़े हर श्रमवीर, हर कारीगर, हर योजनाकार, हर वास्तुकार सभी का अभिनंदन करता हूं।

अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। इसी अयोध्या में संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति से, उसके संस्कारों से, पुरुषोत्तम बनता है। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बन करके आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषाद राज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान का समर्पण, इन सब की शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक समर्थ्य का भी चेतना स्थल बन रहा है। यहां सप्त मंदिर बने हैं, माता शबरी का मंदिर बना है जो जनजातीय समाज के प्रेम भाव और आतिथ्य परंपरा की प्रतिमूर्ति है। यहां निषादराज का मंदिर बना है, यह उस मित्रता का साक्षी है जो साधन नहीं, साध्य को, उसकी भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या है, महर्षि वाल्मीकि है, महर्षि वशिष्ठ है, महर्षि विश्वामित्र है, महर्षि अगस्त्य है और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी भी हैं, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती है। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय है। शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि सहित अन्य न्यासीगण व आमंत्रित संत समाज व अनेक प्रतिष्ठित जन उपस्थित रहे।