सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ श्री शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के श्री कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

 सहकारिता एक नारा नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है : मंत्री श्री केदार कश्यप

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिल रही है। इसी कड़ी में सहकारिता विभाग द्वारा राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में ‘सहकार संकल्प दौड़’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने हरी झंडी दिखाकर किया।

         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा रहा है।

          मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। केद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करने जो संकल्प लिया था, उसे पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सहकारिता विभाग ने विगत ढ़ाई वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

   सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता सप्ताह को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया गया है, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को अधिक सक्षम बनाया जा रहा है, किसानों को समय पर ऋण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। साथ ही सहकारिता के दायरे का विस्तार कर युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों को स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

‘सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर’

          इस वर्ष की दौड़ “सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर” थीम पर आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों में सहयोग, एकता, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक विकास का संदेश पहुंचाना था।

सुबह 6 बजे मरीन ड्राइव से हुई शुरुआत

          सहकार संकल्प दौड़ सुबह 6 बजे तेलीबांधा मरीन ड्राइव से शुरू हुई। इसमें प्रदेशभर से युवा, विद्यार्थी, किसान, सहकारी संस्थाओं के सदस्य, महिला समूहों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार

        दौड़ में पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान बेमेतरा के श्री ओंकार वर्मा, द्वितीय अमलेश्वर के श्री करण साहू और तृतीय स्थान पर श्री खेमराज सोनकर रहे। इसी तरह महिला वर्ग में प्रथम सुश्री मीरा साहू, द्वितीय सुश्री पूर्णिमा साहू और तृतीय स्थान पर सुश्री शिबू वर्मा रही। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः पांच हज़ार,  तीन हज़ार और दो हजार रूपए का नगद पुरस्कार प्रदान कियागया। इस पहल से युवाओं और आम नागरिकों में खेल तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी।

सहकारिता से समृद्धि और स्वस्थ समाज का संकल्प

        मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि यह दौड़ केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सहकारिता, स्वास्थ्य और सामाजिक सहभागिता का जन-जागरूकता अभियान है। इसका उद्देश्य “सहकारिता से समृद्धि”, “साथ चलें, साथ बढ़ें” और “स्वस्थ समाज, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

जनभागीदारी से मजबूत होगा सहकारिता आंदोलन

        सहकारिता विभाग ने प्रदेशवासियों का उत्साहपूर्ण सहभागिता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही सहकारिता आंदोलन और अधिक मजबूत होगा। सहकारिता की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाकर आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जाएगा।

         इस अवसर पर अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्केटिंग फेडरेशन के अध्यक्ष श्री शशिकांत द्विवेदी, राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, अंबिकापुर बैंक के अध्यक्ष श्री रामकृष्ण सिंह, मार्कफेड के एमडी श्री जितेंद्र शुक्ला, अपेक्स बैंक के एमडी श्री के एन कांडे सहित अपेक्स बैंक, नाबार्ड, बुनकर महासंघ और विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

मार्कफेड मुख्यालय में ‘सहकारी संगोष्ठी‘ का भव्य आयोजन

सहकारिता से ही आएगी किसानों के जीवन में समृद्धि

रायपुर, 02 जुलाई 2026

राज्य में मनाए जा रहे सहकारिता सप्ताह (29 जून से 06 जुलाई 2026) के गरिमामयी अनुक्रम में आज छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) के नवा रायपुर स्थित मुख्य कार्यालय में एक दिवसीय ‘सहकारी संगोष्ठी‘ का सफल आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय संगोष्ठी में राज्य के कृषि, खाद्य और सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेतृत्व और तकनीकी विशेषज्ञों ने शिरकत की।  

    मार्कफेड के प्रबंध संचालक ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी माननीय मंत्रियों, विशिष्ट अतिथियों और सहकारी संघ के प्रतिनिधियों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी श्गमछाश् पहनाकर और पुष्प गुच्छ से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने राज्य के किसानों की सेवा में मार्कफेड की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।  

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि सहकार से समृद्धि भारत सरकार का प्रमुख दृष्टिकोण और अभियान है जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों को मजबूत करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में सहकारिता केवल एक नारा नहीं है रह गया है बल्कि यह ग्रामीण भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आजीविका को बेहतर बनाने का एक माध्यम बन गई है। चाहे डेयरी हो, मत्स्य पालन हो या कृषि उत्पादों का विपणन ,सहकारिता इन सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता और आधुनिकीकरण ला रही है। 

श्री द्विवेदी ने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से जल, वायु, मिट्टी का प्रदूषण बढ़ रहा है। अतः इफको द्वारा लांच किए गए नैनो उर्वरक का ज्यादा ज्यादा किसानों को उपयोग करना चाहिए वरना आज स्वच्छ पीने के पानी के लिए जिस तरह से बिसलेरी की बोतल लेकर घूमना पड़ता है भविष्य में प्रदूषण इतना बढ़ जाएगा कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा। उन्होंने विपणन संघ के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को साझा किया और विभागीय अधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के लिए प्रेरित किया। 
 
संगोष्ठी के मुख्य विषय ‘सहकार से समृद्धि‘ पर विचार रखते हुए अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता प्राथमिक सरकारी समिति ने प्राथमिक सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना ब्याज या रियायती दरों पर ऋण वितरण की महत्ता को रेखांकित किया।  

श्री कनीराम जी ने सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूर्ण होने पर मनाये जा रहे सहकारी सप्ताह में अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि सहकारिता ही आमजन के मूल में है। सहकारिता से युवाओं, बेरोजगारों, महिलाओं को रोजगार सृजित होंगे। बिन सहकार, नहीं उद्धार के मूल मंत्र को स्वीकार करते हुए निश्चित रूप से सबको साथ लेकर सही दिशा में काम करने की जरूरत है। राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेललचंदन ने भी सम्बोधित किया। 

तकनीकी सत्र में नाबार्ड और एन.सी.डी.सी. के राज्य प्रतिनिधियों ने कृषक उत्पादक संगठन के गठन, उनके वित्तीय लाभों और भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सब्सिडी योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे और सीमांत किसान सामूहिक खेती के जरिए सीधे बड़े बाजारों से जुड़कर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।  

 कार्यक्रम में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रवीण दुबे, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष अनिमेष कश्यप, दुर्ग सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष नरेश यदु, सह संयोजक मुरलीधर सिन्हा सहित अन्य अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री

चिंतन शिविर से निकले विचार बन रहे सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – मुख्यमंत्री श्री साय

सुशासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति पर हुआ गहन मंथन

पिछले चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस, सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए लागू – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

दूसरे दिन आयोजित ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ श्री सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सदस्य श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘अमृत प्रयास’, ‘बनयान रिवोल्यूशन’ और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है।

‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया।

‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। 

चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।

दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।