डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में मुख्यमंत्री का आह्वान: क्रिएटर्स दिखाएं बदलते छत्तीसगढ़ की नई पहचान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में देशभर से आए कंटेंट क्रिएटर्स का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़  आस्था, संस्कृति और प्रकृति का संगम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह भूमि भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या के मायके के रूप में जानी जाती है। वनवास के 14 वर्षों में से अधिकांश समय भगवान श्रीराम ने यहीं व्यतीत किया, जिसके प्रमाण आज भी प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर मिलते हैं। उन्होंने माता शबरी की भक्ति, दंडकारण्य और अबूझमाड़ जैसे ऐतिहासिक-आध्यात्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत को रेखांकित किया।

उन्होंने संत गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को याद करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा की यह परंपरा आज भी प्रदेश की आत्मा में समाहित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहा छत्तीसगढ़ आज तेजी से बदल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के संकल्प और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के परिणामस्वरूप प्रदेश अब नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित था, वहीं अब विकास की मुख्यधारा गांव-गांव तक पहुंच रही है।

मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग को प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, घने वन, संस्कृति और जनजातीय जीवन देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूनेस्को द्वारा बस्तर के धुड़मारास गांव को विश्व के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाना प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए बस्तर और छत्तीसगढ़ की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुंचाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उदाहरण देते हुए बताया कि बस्तर के दिव्यांग बालक मड्डा राम का वीडियो वायरल होने पर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर द्वारा उन्हें क्रिकेट किट भेजी गई—यह सोशल मीडिया की ताकत का प्रमाण है।

प्रदेश में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले दो वर्षों में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही, “छत्तीसगढ़ विजन 2047” के माध्यम से राज्य को विकसित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, राशन, वनाधिकार पट्टा और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाएं सुदूर गांवों तक पहुंचाई गई हैं। बस्तर ओलंपिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

डिजिटल युग पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विजन का प्रभाव आज गांव-गांव में दिखाई दे रहा है, जहां आम नागरिक भी डिजिटल भुगतान कर रहा है। उन्होंने क्रिएटर्स से इस परिवर्तन को और आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष श्री विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर उभरता नया छत्तीसगढ़ आज देश के सामने एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र को कभी केवल संघर्ष और चुनौतियों के संदर्भ में देखा जाता था, वही आज विकास, शांति और संभावनाओं की नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से अपील करते हुए कहा कि वे पूर्वाग्रहों से परे जाकर छत्तीसगढ़ को समझें और यहां हो रहे वास्तविक परिवर्तन, जनजीवन में आए सकारात्मक बदलाव, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास की नई गति को अपने मंचों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल माध्यम केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि धारणा निर्माण की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन चुका है, ऐसे में क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे सच्चाई और सकारात्मकता पर आधारित कंटेंट प्रस्तुत कर समाज में नई सोच और विश्वास का संचार करें।

इस अवसर पर विधायक श्री किरण सिंह देव, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, डॉ. गुरु पासवान, श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव एवं जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

भारत की राष्ट्रीय एआई नियमन रणनीति का नेतृत्व करने के लिए सरकार ने एआई नियमन एवं आर्थिक समूह (एआईजीईजी) का गठन किया

नीति समन्वय, जिम्मेदार एआई नवाचार को प्रोत्साहन देने और श्रम बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को संबोधित करने के लिए यह एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय है

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने एआई नियमन एवं आर्थिक समूह (एआईजीईजीका गठन किया, जो एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय है और एआई नियमन नीति विकास और समन्वय के लिए भारत के केंद्रीय संस्थागत तंत्र के तौर पर कार्य करेगा।

एआईजीईजी के गठन से भारत के एआई नियामक दिशानिर्देशों और आर्थिक सर्वेक्षण में की गई संस्थागत सिफारिशों को औपचारिक रूप दिया गया है।

दिशानिर्देशों में एआई नियमन के लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण को निर्देशित करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी निकाय की स्थापना की सिफारिश की गई है, जिससे मंत्रालयों, विभागों, नियामकों और सलाहकार निकायों की कार्रवाइयों को एक सुसंगत राष्ट्रीय रणनीति के अनुरूप बनाया जा सके। वहीं, आर्थिक सर्वेक्षण में एआई के इस्तेमाल को श्रम संबंधी वास्तविकताओं और सामाजिक स्थिरता की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने में सक्षम एक समन्वय प्राधिकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव एआईजीईजी की अध्यक्षता करेंगे, जबकि इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी व वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद उपाध्यक्ष के तौर पर कार्यभार देखेंगे। एआईजीईजी की सदस्यता में नीति निर्माण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सुरक्षा एवं आर्थिक मामलों से जुड़े सरकार के वरिष्ठ हितधारक शामिल हैं।

एआईजीईजी भारत के एआई नियामक संस्थागत ढांचे के भीतर सर्वोच्च अंतर-मंत्रालयी निकाय के तौर पर कार्य करेगा। इसे एक प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति (टीपीईसी) का सहयोग प्राप्त होगा, जो एआईजीईजी को वैश्विक घटनाक्रमों, उभरती प्रौद्योगिकियों, जोखिमों, विनियमन और एआई नीति एवं शासन से संबंधित अन्य विकसित प्राथमिकताओं पर विशेषज्ञ सलाह प्रदान करेगी।

एआईजीईजी की संरचना और कार्यक्षेत्र के विवरण के लिए, कृपया देखें:

https://d12aarmt01l54a.cloudfront.net/cms/files/constitution-of-aigeg/1776346498.pdf

नई कंप्यूटर तकनीक 2025: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल दुनिया के बड़े बदलाव

तकनीक की दुनिया लगातार बदल रही है, लेकिन 2025 में कंप्यूटर तकनीक ने एक नई रफ़्तार पकड़ ली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और अल्ट्रा-फास्ट चिप्स—ये सभी मिलकर हमारे काम करने, सीखने और जीने के तरीके को बदल रहे हैं।
आइए जानते हैं इस साल की सबसे नई और महत्वपूर्ण कंप्यूटर तकनीकों के बारे में:


1. एआई-चालित कंप्यूटर (AI-Powered Computing)

2025 में कंप्यूटर अब सिर्फ मशीन नहीं बल्कि “सोचने वाले साथी” बन रहे हैं।

  • ये डेटा को खुद समझते हैं।
  • निर्णय लेने में मदद करते हैं।
  • आवाज़ और टेक्स्ट दोनों को आसानी से पहचानते हैं।
    AI-सक्षम कंप्यूटर अब शिक्षा, हेल्थकेयर, सुरक्षा और बिज़नेस—हर जगह उपयोग किए जा रहे हैं।

2. क्वांटम कंप्यूटिंग का उभार (Quantum Computing Rise)

क्वांटम कंप्यूटर अब प्रयोगशालाओं से निकलकर उद्योगों में प्रवेश कर रहे हैं।
ये पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना तेज़ प्रोसेसिंग कर सकते हैं।
इनका उपयोग—

  • नई दवाओं की खोज
  • मौसम पूर्वानुमान
  • साइबर सुरक्षा
  • जटिल गणना
    में तेजी से बढ़ रहा है।

3. एज कंप्यूटिंग (Edge Computing)

अब डेटा दूर सर्वर पर नहीं, बल्कि डिवाइस के पास ही प्रोसेस होता है।
इसके फायदे:

  • तेज़ स्पीड
  • कम लेटेंसी
  • उच्च सुरक्षा
    स्मार्ट शहर, ट्रैफिक सिस्टम और IoT डिवाइस में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

4. न्यूरोमॉर्फिक चिप्स (Neuromorphic Chips)

मानव मस्तिष्क जैसी क्षमता वाले कंप्यूटर चिप्स 2025 में चर्चा में हैं।
ये चिप्स—

  • ऊर्जा बचाते हैं
  • तेज़ी से सीखते हैं
  • AI को और शक्तिशाली बनाते हैं
    रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग वाहन में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

5. हाइब्रिड क्लाउड और मल्टी-क्लाउड तकनीक

कंपनियाँ अब एक ही क्लाउड पर निर्भर नहीं रहतीं।
हाइब्रिड और मल्टी-क्लाउड मॉडल—

  • डेटा सुरक्षा बढ़ाते हैं
  • लागत कम करते हैं
  • सेवाओं को स्केल करना आसान बनाते हैं।

6. साइबर सुरक्षा में एआई की भूमिका

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए 2025 में एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।
ये सिस्टम—

  • तुरंत खतरे को पहचानते हैं
  • स्वतः कार्रवाई करते हैं
  • डेटा को सुरक्षित रखते हैं

7. एक्सआर तकनीक (XR – AR/VR/MR)

वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी का विस्तार हो रहा है।
शिक्षा, गेमिंग, ट्रेनिंग और पर्यटन में XR नई दुनिया बना रहा है।


निष्कर्ष

2025 कंप्यूटर तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो रहा है।
AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और नई पीढ़ी के चिप्स—ये तकनीकें आने वाले वर्षों में मानव जीवन को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और तेज़ बनाने वाली हैं।