’मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बरगद के पेड़ के नीचे लगाई चौपाल, सुनी ग्रामीणों की समस्याएं’

कमरौद में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद, योजनाओं की जमीनी स्थिति का लिया फीडबैक

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा स्थित ग्राम कमरौद पहुंचकर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 
बरगद के पेड़ की छांव में आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर यह सुनिश्चित कर रही है कि लोगों को राशन, बिजली, प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाकर समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे अब तक प्रदेश के 16 जिलों का दौरा कर लोगों से सीधे संवाद कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं से महतारी वंदन योजना की जानकारी ली, जिस पर महिलाओं ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से राशि मिल रही है। ग्राम की श्रीमती देव कुमारी साहू ने बताया कि वह योजना से मिलने वाली राशि अपनी बेटी के भविष्य के लिए बचा रही हैं। 
चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने पांचवीं कक्षा के छात्र पूर्वांश साहू से मुस्कुराते हुए पूछाकृ“सेल्फी लेंगे क्या?” जिसके बाद छात्र ने उत्साहपूर्वक मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी ली।

यह आत्मीय क्षण चौपाल का विशेष आकर्षण बना।

मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा पंचायत स्तर पर संचालित अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और अतिरिक्त 10 लाख आवासों का निर्माण भी प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अब तक लगभग 6000 अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार शीघ्र ही ऑनलाइन शिकायत समाधान व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे मोबाइल फोन से अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए टोल फ्री नंबर भी प्रारंभ किया जाएगा।

किसानों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। 

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरपुर बैराज तथा सिकासेर से कोडार परियोजना महासमुंद जिले के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उल्लेखनीय है कि जिले में सिंचाई क्षमता विस्तार के लिए सिकासेर बांध (गरियाबंद) से शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय कोडार तक पानी पहुंचाने की लगभग 3200 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर जनता की बात सुन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पारदर्शी और जनहित में कार्य करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना और अन्य योजनाओं से प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।  बस्तर जैसे क्षेत्रों में जहां पहले हिंसा का माहौल था, वहां अब खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित हो रही हैं।
चौपाल के दौरान ग्राम की श्रीमती लता साहिस ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना तथा गैस सिलेंडर का लाभ मिला है। वहीं श्रीमती मधु साहू ने मछली पालन से जुड़ाव और गर्मी के दौरान पानी की समस्या बताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने सोलर आधारित बोर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बिहान योजना से जुड़ी परी साहू ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे आत्मनिर्भर बनी हैं और अब फैंसी एवं किराना दुकान संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद वे “लखपति दीदी” कहलाने लगी हैं। 

ग्रामीण श्री मोहन कुलदीप ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिसंबर 2025 में सोलर पैनल लगवाने पर उन्हें एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी मिली और पहले जहां उनका बिजली बिल लगभग 3500 रुपये आता था, अब शून्य हो गया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

’दिव्यांग हितग्राहियों के चेहरे पर खिली मुस्कान’

चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीन दिव्यांग हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए। भारती मारकण्डेय को व्हीलचेयर तथा रवि कुमार पटेल और यादराम साहू को ट्रायसिकल प्रदान की गई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनके दैनिक जीवन और आवागमन में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के जीवन को सहज, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा अधिकारियों को जरूरतमंद हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मातृशक्ति के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण की घोषणा की, जहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं स्व-सहायता समूहों की गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कमरौद से चरोदा तक लगभग चार किलोमीटर सड़क निर्माण तथा ग्राम में मुक्ति धाम निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया और ग्रामीणों ने उनका आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,  अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक यात्रा की। हवाई अड्डे पर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने उनकी अगवानी की और उनका समारोहपूर्वक स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों पर भारत की ओर से कड़ी निंदा और वहां के नेतृत्व एवं लोगों के प्रति भारत की एकजुटता दोहराई। प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित पारगमन और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने के पक्ष में भारत की स्पष्ट स्थिति सामने रखी, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ ही ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्‍यक है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय
संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, फिनटेक, अवसंरचना, शिक्षा, संस्कृति और आपसी जन-संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रणनीतिक साझेदारी सुदृढ़ होने का स्वागत किया। उन्होंने भारत- संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की सफलता की भी चर्चा की जिससे द्विपक्षीय व्यापार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।

दोनों नेताओं ने जीवंत और बढ़ते द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी की सराहना की, जिसमें कच्चे तेल, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस-एलएनजी और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस – एलपीजी आपूर्ति सहित भारत की ऊर्जा सुरक्षा में संयुक्‍त अरब अमीरात की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। दोनों नेताओं ने व्यापक ऊर्जा साझेदारी के लिए नई पहल को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। इसी संदर्भ में, उन्होंने इंडियन स्‍ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्वस लिमिटेड (आईएसपीआरएल) और अबू धाबी के राष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनी के बीच रणनीतिक सहयोग समझौते का स्वागत किया, जिसके तहत भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में संयुक्‍त अरब अमीरात की हिस्सेदारी 30 मिलियन बैरल तक बढ़ाई जाएगी और भारत में रणनीतिक गैस भंडार स्थापित करने के लिए दोनों मिलकर काम करेंगे। उन्होंने दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और अबू धाबी राष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनी (एडीएएनओसी) के बीच हुए समझौते का भी स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने संयुक्‍त अरब अमीरात की कंपनियों द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा का स्वागत किया। इसमें अमीरात न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा RBL बैंक ऑफ इंडिया में 3 अरब डॉलर का निवेश, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी द्वारा राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के साथ भारत में प्राथमिकता वाली ढांचेगत परियोजनाओं में 1 अरब डॉलर का निवेश और इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी द्वारा भारत की सम्मान कैपिटल में 1 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। ये निवेश भारत के विकास के प्रति संयुक्‍त अरब अमीरात की निरंतर और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रेखांकित करते हैं और द्विपक्षीय रणनीतिक निवेश साझेदारी को भी सुदृढ़ बनाते हैं।

दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थिर और सुदृढ़  द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के महत्‍व को स्वीकार किया। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर हस्ताक्षर का भी उन्‍होंने स्वागत किया। इसके तहत, दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग और नवाचार में सहयोग बढ़ाने उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सुरक्षित संचार और सूचना आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग को और गहन बनाने पर सहमत हुए।

प्रधानमंत्री श्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों नेता निम्नलिखित दस्तावेजों पर अंतिम सहमति के साक्षी बने, जो द्विपक्षीय सहयोग और मजबूत बनाएंगे।

भारत सरकार द्वारा आरंभ की गई समुद्री विकास निधि योजना के तहत वाडीनार में अपतटीय निर्माण सहित पोत मरम्मत क्लस्टर स्थापित करने के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और ड्राईडॉक्स वर्ल्ड, दुबई के बीच समझौता ज्ञापन।

जहाज मरम्मत कार्य में कौशल विकास के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, ड्राईडॉक्स वर्ल्ड दुबई और समुद्री और जहाज निर्माण उत्कृष्टता केंद्र (सीईएमएस) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन। यह कुशल समुद्री कार्यबल जुटाने, प्रशिक्षित करने और रोजगार देने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है, भारतीय समुद्री कार्यबल की क्षमताओं को बढ़ाता है और भारत को कुशल पोत निर्माण और जहाज मरम्मत पेशेवर केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

भारत की ‘प्रगत संगणन विकास केंद्र – सी-डैक और संयुक्त अरब अमीरात की जी-42 के बीच साझेदारी में 8 एक्साफ़्लॉप सुपर कंप्यूट क्लस्टर स्थापित करने (एक्साफ़्लॉप सुपर कंप्यूट क्लस्टर आधुनिक कंप्यूटिंग की सबसे शक्तिशाली श्रेणी जिसकी  उच्‍च गणना क्षमता है) के लिए टर्म शीट (निवेश या व्यावसायिक सौदे के मुख्य नियमों और शर्तों का सारांश) पर चर्चा हुई।

दोनों नेताओं ने मास्टर एप्लीकेशन फॉर इंटरनेशनल ट्रेड एंड रेगुलेटरी इंटरफेस -एमआईटीआरआई का उपयोग करके वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के संचालन का भी स्वागत किया। यह दोनों पक्षों के सीमा शुल्क और बंदरगाह अधिकारियों को समेकित करने वाला यह डिजिटल ढांचा माल की आवाजाही सुव्यवस्थित करेगा और लागत एवं पारगमन समय दोनों में कमी लाएगा जिससे अधिक कुशल व्यापार प्रवाह संभव होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को उनके हार्दिक स्वागत और आतिथ्य सत्कार के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें शीघ्र भारत आने का निमंत्रण दिया।

मत्स्य क्षेत्र में “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को सशक्त बनाने हेतु हैदराबाद में मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

देशभर में सहकारी आधारित मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा देने हेतु क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है

सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने मत्स्य सहकारी संस्थाओं के लिए सुदृढ़ संस्थागत ढांचे, तकनीकी एकीकरण एवं बाजार संपर्क की आवश्यकता पर बल दिया

केंद्रीय मत्स्य सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने नवाचार, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना एवं मछुआरा समुदायों के समावेशी विकास पर जोर दिया

राष्ट्रीय कार्यशाला में नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन, मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, संस्थागत ऋण संपर्क एवं PMMSY आधारित विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई

जलाशय मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल खेती, खुले समुद्र में केज कल्चर, मत्स्य बीमा, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सहकारी गतिविधियों के विविधीकरण पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण से प्रेरित, जिसे माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देशभर में क्रियान्वित किया जा रहा है, मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का आयोजन 15 मई, 2026 को हैदराबाद में किया गया। यह कार्यशाला देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की जा रही क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय सहकारी परामर्श बैठकों की निरंतर श्रृंखला का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य मत्स्य सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना तथा मछुआरा समुदायों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के समावेशी एवं सतत विकास हेतु “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा देना है। इससे पूर्व इसी पहल के अंतर्गत मिजोरम और जयपुर में भी कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं।

राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, सहकारी संगठनों, वित्तीय संस्थानों तथा विकास एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत सरकार के मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से विचार-विमर्श में शामिल हुए। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने भी कार्यशाला की प्रक्रिया एवं तकनीकी चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई। विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना, मत्स्य क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति देना तथा नियमित निगरानी, समस्याओं के समाधान एवं नीतिगत फीडबैक हेतु संस्थागत तंत्र विकसित करना था।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने, आय के अवसर बढ़ाने तथा समुदाय आधारित सतत आर्थिक प्रणालियों के निर्माण में मत्स्य सहकारी संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएँ विशेष रूप से मछुआरों, महिलाओं तथा मत्स्य मूल्य श्रृंखला से जुड़े ग्रामीण परिवारों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी हैं। उन्होंने संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, सुलभ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने, सहकारी संरचनाओं के आधुनिकीकरण तथा बेहतर उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन परिणामों हेतु तकनीक आधारित प्रणालियों के एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. भूटानी ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से मत्स्य क्षेत्र के संतुलित एवं समावेशी विकास हेतु एक मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं, विकास एजेंसियों एवं वित्तीय प्रणालियों के समन्वित प्रयासों से एक सशक्त जमीनी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है, जो रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राज्यों के साथ नियमित त्रैमासिक कार्यशालाओं के आयोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, ताकि योजनाओं की सतत निगरानी, नीतिगत फीडबैक तथा प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने भारत के मत्स्य क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए नवाचार आधारित एवं सहकारी संचालित विकास मॉडल के महत्व पर बल दिया। उन्होंने तेजी से विकसित हो रहे मत्स्य स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए बेहतर बाजार संपर्क, डिजिटल एकीकरण, अवसंरचना विकास तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मत्स्य क्षेत्र को उभरते वैश्विक मानकों एवं भविष्य की बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला में मत्स्य सहकारी संस्थाओं के विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तृत तकनीकी एवं विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन, मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के अंतर्गत संस्थाओं के सशक्तिकरण की रणनीतियों पर चर्चा हुई। सदस्यता विस्तार, DCCB ऋण संपर्क को मजबूत करने, निष्क्रिय मत्स्य सहकारी संस्थाओं के पुनर्जीवन तथा बोर्ड सदस्यों एवं संस्थाओं के सदस्यों के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया गया।

NFDB, NCDC, NAFED, SFAC एवं NERAMAC सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने कार्यान्वयन रणनीतियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण मॉड्यूल, महिला सशक्तिकरण पहलों तथा सहकारी विकास मॉडलों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी अपने क्रियान्वयन अनुभव, सर्वोत्तम प्रथाएँ एवं भविष्य की कार्ययोजनाएँ साझा कीं।

सरकारी योजनाओं एवं कल्याणकारी पहलों पर आयोजित सत्र में PMMSY, PM-MKSSY, मत्स्य एवं एक्वाकल्चर अवसंरचना विकास निधि (FIDF), उद्यमिता मॉडल तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मत्स्य सहकारी संस्थाओं एवं उनके सदस्यों के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना, एक्वाकल्चर बीमा एवं नौका बीमा जैसी बीमा सुविधाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

विशेष तकनीकी सत्रों में जलाशय मत्स्य पालन, सजावटी मत्स्य पालन, क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास तथा Bio-floc एवं Recirculatory Aquaculture System (RAS) जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने पर चर्चा हुई। जलाशय लीज नीति में कानूनी एवं नीतिगत सुधारों तथा PMMSY Phase-II के अंतर्गत मत्स्य सहकारी संस्थाओं के लिए विशेष परियोजनाओं की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

कार्यशाला में संस्थागत ऋण सहायता के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने, सहकारी बैंकों की भूमिका का विस्तार करने, NABARD एवं NCDC के सहयोग तंत्र को मजबूत बनाने तथा DCCBs के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं तक ऋण पहुँच बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

समुद्री मत्स्य सहकारी गतिविधियों के विविधीकरण पर आयोजित सत्र में खुले समुद्र में केज कल्चर, महिला सशक्तिकरण हेतु समुद्री शैवाल खेती, मछली अपशिष्ट से मूल्य संवर्धन, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल, घरेलू उपभोग, निर्यात संभावनाएँ तथा डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। CMFRI, CIFT एवं MPEDA जैसी संस्थाओं ने बाजार संपर्कों को मजबूत करने तथा सहकारी आधारित मत्स्य गतिविधियों के विविधीकरण पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना पर भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें PACS की पहचान, भंडारण अवसंरचना, कार्यान्वयन ढांचा, AMI वित्तपोषण, WDRA ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया तथा सहकारी भंडारण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त दो लाख नई बहुउद्देश्यीय PACS, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, व्यवसाय विविधीकरण, कमजोर संस्थाओं के पुनर्जीवन, जमा संग्रहण एवं सदस्यता विस्तार की रणनीतियों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में परिवर्तन को गति दी जाएगी, नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन को बढ़ावा दिया जाएगा तथा मछुआरा समुदायों के दीर्घकालिक आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित किया जाएगा।

उच्च न्यायालय का निर्णय ऐतिहासिक सत्य एवं सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना है – आलोक कुमार जी

नई दिल्ली, 15 मई 2026। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार जी ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला संबंधी प्रकरण में दिए ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने निर्णय दिया है कि धार की भोजशाला हिन्दू मंदिर है। न्यायालय ने कहा कि सैदव ही भोजशाला के पूजा स्थान की प्रकृति हिन्दू मंदिर की रही है। न्यायालय के निर्णय से भोजशाला में अब निरंतर पूजा का हिन्दुओं को अधिकार मिल गया है। मुसलमानों के लिए भी यह कहा गया है कि वह सरकार से मस्जिद के लिए जगह मांग सकते हैं।

हम यह अपेक्षा करेंगे कि भोजशाला केवल माँ वाग्देवी की पूजा का स्थान न रहे, अपितु पुरातन काल की तरह संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बने। यह काम समाज और सरकार को मिलकर करना होगा। इस स्थान की ऊर्जा से पूरे जगत में आध्यात्मिक ज्योति फैलेगी।

आलोक कुमार जी ने कहा कि यह निर्णय पूरी न्यायायिक पद्धति का पालन करके हुआ है। न्यायालय ने एएसआई को जांच करने के लिए नियुक्त किया था जो इस बारे में भारत की सबसे विशेषज्ञ संस्था है। जांच की प्रतिलिपि दोनों पक्षों को दी गयी। दोनों पक्षों को अपना मत रखने के लिए पर्याप्त समय दिया। विद्वान न्यायाधीशों ने स्वयं मौके पर जाकर भवन का निरिक्षण भी किया।

इस प्रकार एक वैज्ञानिक विश्लेषण करवाने के बाद, सबको सुनकर और प्रत्यक्ष भवन को देखने के बाद यह निर्णय आया है। उच्च न्यायालय ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों एवं सतत हिन्दू उपासना की परंपरा के आधार पर यह स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी माँ सरस्वती का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। यह निर्णय केवल एक स्थल से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत अस्मिता से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय संतुलित है, अच्छा है। सब लोगों को यह निर्णय स्वीकार करना चाहिए।

न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विचार करने संबंधी टिप्पणी का भी स्वागत किया और कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जिसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।

यह विषय किसी के हार या जीत का नहीं है। हम सभी को न्यायालय के आदेशों एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से शांति, सौहार्द एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय की पराजय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य एवं सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण निर्णय के अनुरूप भोजशाला मंदिर के संरक्षण, व्यवस्थापन एवं संस्कृत अध्ययन की गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवन हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।

भोजशाला मामले पर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि…..

  1. भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है।
  2. भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है।
  3. हिन्दुओं को पूजा करने का अधिकार दिया गया है।
  4. मुस्लिम समुदाय की नमाज़ अदा करने की प्रार्थना को खारिज कर दिया गया है।
  5. ASI इसका प्रबंधन और नियंत्रण करेगा।
  6. भारत सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह UK के संग्रहालय से प्रतिमा वापस लाने के संबंध में दिए गए अभ्यावेदन पर विचार करे।
  7. मुस्लिम समुदाय किसी अन्य उपयुक्त भूमि के आवंटन का दावा करने के लिए सरकार के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है।

सुदूर वनांचल के सुशासन तिहार शिविर में पहुंचे उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, सुनी लोगों की समस्याएं

  कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जनपद अध्यक्ष श्रीमती बालका राम किंकर वर्मा, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्री कैलाश चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशी राम धुर्वे, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रूपा राजकुमार धुर्वे, श्री लोकचंद साहू, श्री मनीराम साहू, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि और विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

100 करोड़ के कुसुमघटा – बैजलपुर – राजानवांगांव समूह जल प्रदाय योजना से 66 गांवों तक पहुंचेगा पानी

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों का समुचित विकास और मूलभूत सुविधाओं की सहज पहुंच सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 100 करोड़ रुपए की लागत वाली कुसुमघटा – बैजलपुर – राजानवांगांव समूह जल प्रदाय योजना से 66 गांवों तक पेयजल पहुंचाया जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे बड़ौदाखुर्द, बड़ौदाकला, भलपहारी, अचानकपुर, गंडईकला, गंडईखुर्द, कुसुमघटा, बोइरकछारा, खरहट्टा, भरेली, खड़ोदाकला, कारेसरा, सारंगपुर कला, राम्हेपुर, लोहझरी, सुकवापारा, जैताटोला, खैरबनाखुर्द, घोंघा, दियाबार, छपरी, खुर्सीपार, मंडलाटोला, मुड़ियापारा, मरियाटोला, बैहरसरी, सिल्हाटी, प्रभाटोला, बुधवारा, रहंगी, चंडालपुर, हरिनछपरा, मिनमिनिया मैदान, मोतिमपुर, रघुपारा, बद्दो, खिरसाली, लाटा, बाघुटोला, राजानवागांव, तिलाईभाट, बिसनपुरा, भलुचुवा, भीरा, खरिया, मुड़घुसरी मैदान, खड़ोदाखुर्द, कांदापारा, कामाडबरी, सिंघारी, बैजलपुर, अंधरीकछार, सिल्ली, बोदा 03, लबदा, अमेरा, सोंनतरा, मगरवाड़ा, बोरिया, कनपा, सिरमी, खंडसरा, छांटा, मड़मड़ा, कबराटोला, महली ग्राम शामिल है। 

50 करोड़ की नहर विस्तार परियोजना से 19 गांवों को सिंचाई सुविधा

          उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा क्षीरपानी मध्यम परियोजना के नहर विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है। इस परियोजना से 19 गांवों के हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

तरेगांव जंगल क्लस्टर में 5000 से अधिक आवास स्वीकृत

          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गठन के बाद सबसे पहले गरीब परिवारों के पक्के मकान के सपने को पूरा करने की दिशा में कार्य किया गया। लंबे समय से आवास की प्रतीक्षा कर रहे पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति दी गई है। तरेगांव जंगल क्लस्टर जहां यह शिविर आयोजित है इसके 26 गांवों में ही 5000 से अधिक आवास स्वीकृत एवं निर्माणाधीन हैं।

पीएम जनमन योजना से वनांचल में बनेंगी 19 नई सड़कें

          उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार विशेष रूप से पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों तक बारहमासी सड़कें पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि तरेगांव जंगल क्षेत्र में 35.80 करोड़ रुपए की लागत से 14 सड़कों को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 51.4 किलोमीटर होगी। वहीं फेस-04 अंतर्गत 11.53 करोड़ रुपए की लागत से 5 नई सड़कों को मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से वनांचल क्षेत्रों में आवागमन और संपर्क सुविधाएं बेहतर होंगी।

वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती, पीएचसी बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

           उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर देते हुए कहा कि यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड किया गया है। इसके लिए 2.5 करोड़ रुपए की लागत से भवन स्वीकृत किया गया है। इससे चिकित्सकीय सेवाओं और स्टाफ में वृद्धि होगी तथा आसपास के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

महतारी वंदन से मिले 27-27 हजार, हर पंचायत में खुलेंगे अटल डिजिटल सुविधा केंद्र

           महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 27 किश्तें जारी की जा चुकी हैं और हितग्राही महिलाओं को 27-27 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हर पंचायत में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोलने का कार्य किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को राशि निकालने दूर न जाना पड़े। तरेगांव जंगल में महिला समूहों के लिए महतारी सदन भी स्वीकृत किया गया है।

वनांचल में बढ़ाएं डीलर दीदी मॉडल

          उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने महिला स्व सहायता समूहों से स्व-रोजगार गतिविधियों को बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश व जिले के अन्य हिस्सों में समूह शटरिंग प्लेट किराए पर देकर और निर्माण सामग्री की सप्लाई कर आय अर्जित कर रहे हैं। इस मॉडल को वनांचल क्षेत्रों में भी बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे न केवल महिलाओं के आए वृद्धि होगी बल्कि आवासों का निर्माण भी जल्द पूरा होगा।

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में 19 मई को बस्तर में आयोजित होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक

बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
          
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

हिन्दू जीवन में मंदिर सिर्फ पूजास्थल नहीं, जीवन का आधार हैं…

मंदिर मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का माध्यम है। इसमें वैज्ञानिकता भी है, अध्‍यात्‍म भी, धर्म भी, विचार भी है, और श्रद्धा भी है तो भक्‍ति भी है। वस्‍तुत: वैज्ञानिक दृष्टि कहती है कि मंदिरों की संरचना इस प्रकार की जाती है कि वहाँ ऊर्जा सकारात्मक रहे।

सुबह का वह क्षण याद कीजिए, जब किसी मंदिर की घंटी की ध्वनि सीधे हृदय तक पहुँचती है। उस ध्वनि में पीढ़ियों की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का संचित स्पंदन होता है। एक हिन्दू जीवन की शुरुआत प्राय: मंदिर से होती है, जन्‍म लेने के पूर्व गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन यानी इस संपूर्ण तीन भाग के ‘गर्भ संस्कार’ के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ माता की प्रसन्नता के लिए देवताओं से प्रार्थना की जाती है और तभी एक जन्‍म लेने वाली जीवात्‍मा के जीवन में उसके अस्‍तित्‍व के साथ ही मंदिर प्रवेश कर जाता है।

उसके बाद मंदिर की यात्रा जैसे घर के छोटे से पूजा-स्थल से लेकर विशाल तीर्थों तक संपूर्ण जीवन भर जुड़ी हुई दिखाई देती है, इतना ही नहीं देह छोड़ देने के बाद भी मंदिर का अस्‍तित्‍व रहता है, स्‍मृतियों में पुरखों के रूप में, पितर बनकर जीवात्‍मा अपने अस्‍तित्‍व को सदियों तक बनाए रखती है।

यही मंदिर जीवन के संघर्षों में सहारा बनते हैं, तो उत्सवों में उल्लास का केंद्र भी। ऐसे ही आध्यात्मिक अनुभवों का चरम रूप है केरल के घने वनों में स्थित शबरीमला मंदिर, जो आज श्रद्धा केंद्र होने के साथ ही देश के बौद्धिक और संवैधानिक विमर्श का भी केंद्र बना हुआ है। सर्वोच्च न्‍यायालय में चल रही बहस ने इसे आस्था और अधिकार के संगम पर खड़ा कर दिया है।

एक प्रश्‍न बार-बार सहज रूप से मन में उमड़ता है, आखिर हिन्दू जीवन में मंदिर क्‍या सिर्फ पूजा का स्थान भर है? हर बार उत्तर सामने आता है, इससे भी कहीं अधिक गहरा है ये। मंदिर, जीवन का आधार है। यह वह स्थान है जहाँ व्यक्ति अपने भीतर के शोर को शांत कर, चेतना के स्‍तर पर आत्मा की आवाज सुनता है, इसीलिए सनातन परंपरा में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार मंदिर से जुड़ा है।

मंदिर मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का माध्यम है। इसमें वैज्ञानिकता भी है, अध्‍यात्‍म भी, धर्म भी, विचार भी है, और श्रद्धा भी है तो भक्‍ति भी है। वस्‍तुत: वैज्ञानिक दृष्टि कहती है कि मंदिरों की संरचना इस प्रकार की जाती है कि वहाँ ऊर्जा सकारात्मक रहे। घंटियों की ध्वनि, मंत्रोच्चार और धूप-दीप का वातावरण मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। यही कारण है कि मंदिर से लौटते समय व्यक्ति स्वयं को हल्का और संतुलित अनुभव करता है।

मंदिर के साथ जुड़ी श्रद्धा वह अदृश्य शक्ति है जो मनुष्य को असंभव को संभव करने की प्रेरणा देती है। भक्ति उस श्रद्धा का सजीव रूप है, जो कर्म और भावना में प्रकट होती है। जब एक भक्त मंदिर में माथा टेकता है, तब वह अपने अहंकार को त्यागकर एक उच्चतर शक्ति को स्वीकार कर रहा होता है। यह प्रक्रिया व्यक्ति के भीतर विनम्रता और संतुलन पैदा करती है। यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धालु व्यक्ति टूटता नहीं है, वह और अधिक मजबूत होकर उभरता है।

शबरीमला तपस्याअनुशासन और आस्था का संगम है

शबरीमला मंदिर की परंपरा अन्य मंदिरों से भिन्न है। यहाँ भगवान अय्यप्पा को एक तपस्वी ब्रह्मचारी के रूप में पूजा जाता है, इसीलिए यहाँ आने वाले भक्तों के लिए 41 दिनों का कठोर व्रत, संयम और ब्रह्मचर्य अनिवार्य माना गया है। यह यात्रा संपूर्ण हिन्‍दू भक्‍ति परंपरा में धार्मिक अनुष्ठान होने के साथ ही सबसे अधिक जरूरी आत्मानुशासन की परीक्षा है। जंगलों से होकर कठिन मार्ग तय करना, सादा जीवन जीना और सामूहिक भक्ति में शामिल होना, वस्‍तुत: यह सभी तत्व मिलकर एक ऐसा अनुभव रचते हैं, जिसमें व्यक्ति को संपूर्णता के साथ भीतर से बदल देने का सामर्थ्‍य होता है।

ऐसे में जब सर्वोच्च न्‍यायालय ने 2018 में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को शबरीमला में प्रवेश की अनुमति दी, तब यह लगा कि निर्णय एक तरफा हो गया है, समानता के सिद्धांत पर इसे आरूढ़ तो किया गया, किंतु इसके मर्म को शायद गहराई से नहीं समझा गया! परंतु इसके बाद प्रश्न उठ खड़ा हुआ कि क्या हर धार्मिक परंपरा को एक ही संवैधानिक मानक से परखा जा सकता है?

अब एक बार फिर मंदिर की परंपरा को लेकर न्‍यायालय में बहस चल रही है, तुषार मेहता बता रहे हैं कि भारत में कई मंदिरों में विशिष्ट परंपराएँ हैं, जो उनकी आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। इस संदर्भ में ब्रह्मा मंदिर पुष्कर, कामाख्या देवी मंदिर और कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर जैसे उदाहरण सामने हैं, जहाँ अलग-अलग नियम प्रचलित हैं।

विविधता ही हिन्दुत्व की सबसे बड़ी शक्ति

हिन्दू धर्म किसी एकरूपता का आग्रह नहीं करता। यहाँ हर मंदिर, हर परंपरा और हर पूजा पद्धति का अपना विशिष्ट महत्व (वैशिष्‍ट्य) है। यही कारण है कि कहीं केवल महिलाएँ पूजा करती हैं, तो कहीं पुरुषों को विशेष वेशभूषा धारण करनी होती है। वस्‍तुत: विविधता यह दर्शाती है कि हिन्दू धर्म एक जीवंत परंपरा है, जो समय और परिस्थितियों के साथ विकसित होती रही है। यह किसी एक नियम में बंधा हुआ धर्म नहीं, य‍ह तो अनुभव और आस्था का विस्तृत महासागर है।

हिन्दू धर्म की महानता ही इसी में है कि यह विविधता को स्वीकार करता है, संवाद को महत्व देता है और हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार जीने की स्वतंत्रता देता है। मंदिर से जुड़ी श्रद्धा और भक्ति जीवन को दिशा देने वाले तत्व हैं।

एक भक्त के लिए मंदिर एक अनुभव है। जब वह कठिन यात्रा करके शबरीमला पहुँचता है, तब उसकी आँखों में सिर्फ अपने आराध्‍य के दर्शन की इच्छा होने के साथ ही संतुष्टि का भाव भी होता है। निश्‍चित ही यह अनुभव शब्दों से परे है; यह वह क्षण है जब मनुष्य स्वयं को ईश्वर के निकट महसूस करता है, उसकी चेतना बोल उठती है,  प्रज्ञानं ब्रह्म – “चेतना ही ब्रह्म है।” अहं ब्रह्मास्मि – “मैं ब्रह्म हूँ।” तत्‍वमसि – “तुम वही हो” (वह तुम हो) और अयमात्मा ब्रह्म – “यह आत्मा ही ब्रह्म है।” ‘शिवोह्म शिवोह्म’- “मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ।” वस्‍तुत: यही आस्था की वास्तविक शक्ति है…जो भारत में है, जो भारत में सर्वत्र व्‍याप्‍त है…।

डॉ. मयंक चतुर्वेदी

नासिक टीसीएस धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान गिरफ्तार

नासिक/छत्रपति संभाजी नगर।

नासिक स्थित टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) धर्मांतरण मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी निदा खान को गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रही निदा को छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव से पकड़ा गया है। निदा पर उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगे हैं। वह टीसीएस नासिक में प्रोसेस एसोसिएट के पद पर काम करती थी। आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, खान कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में पिछले कई दिनों से रह रही थी। वहां पर उसके साथ उसके चार और रिश्तेदार भी थे।

पुलिस निदा खान की तलाश में थी। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी से सुरक्षा की याचिका दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। 4 मई को नासिक कोर्ट ने निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पीड़िता को सुनियोजित तरीके से ब्रेनवॉश करके मलेशिया भेजने की योजना नजर आती है। कोर्ट के अनुसार, अपराध गंभीर है और मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

देवलाली पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, निदा खान, दानिश शेख और तौसीफ पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। इनमें झूठा विवाह का वादा करके यौन संबंध बनाना, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना शामिल है। तीनों पर SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत भी आरोप लगे हैं।

पुलिस के अनुसार, दानिश शेख ने पीड़िता से शादी का झूठा वादा करके यौन उत्पीड़न किया। तौसीफ ने बार-बार छेड़छाड़ की और संबंध उजागर करने की धमकी देकर दबाव डाला। निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने दोनों साथियों के साथ मिलकर पीड़िता को डराया-धमकाया और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर धर्म बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। जांच में पता चला कि निदा ने पीड़िता को बुर्का, पैगंबर मोहम्मद पर किताबें दी थीं और मोबाइल में इस्लामी ऐप्स इंस्टॉल करवाए।

सभी आरोपी पीड़िता के ही TCS नासिक यूनिट के सहकर्मी थे। पीड़िता को आरोपियों के धार्मिक रीति-रिवाज और दिनचर्या का पालन करने के लिए मजबूर किया गया था।

निदा खान ने दिसंबर 2021 में टीसीएस नासिक में काम शुरू किया था। आरोपों की जानकारी मिलने के बाद कंपनी ने 9 अप्रैल को निलंबित कर दिया था।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना लाखों उपभोक्ताओं को राहत देने वाली जनहितैषी पहल

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम जनता को राहत पहुंचाने और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026” लागू की गई है। यह योजना घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के भुगतान में राहत देने के साथ-साथ आसान समाधान उपलब्ध करा रही है।
योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल का भुगतान एकमुश्त अथवा आसान किस्तों में करने की सुविधा दी गई है। विशेष बात यह है कि 31 मार्च 2023 तक के बकाया बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है।
       राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी उपभोक्ता आर्थिक कारणों से बिजली सुविधा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ योजना को सरल और सुलभ बनाया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं का पंजीयन अनिवार्य रखा गया है।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पंजीयन की व्यवस्था विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप, CSPDCL की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी बिजली कार्यालय तथा विशेष पंजीयन शिविरों के माध्यम से आसानी से अपना पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 12 मार्च 2026 से लागू है तथा योजना का लाभ लेने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। अब तक लाखों उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण कर उपभोक्ताओं को करोड़ों रुपए की राहत प्रदान की जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक प्रदेश के 07 लाख 24 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया है। 1 लाख 63 हजार प्रकरणों का निराकरण कर कुल 06 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक की राहत प्रदान की जा चुकी है।
       मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 इसी जनहितकारी सोच का परिणाम है, जो लाखों उपभोक्ताओं के जीवन में राहत और विश्वास लेकर आई है।

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

 विशेष लेख : महतारी वंदन योजना : आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

रायपुर, 21 मार्च 2026

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जाती है जब उसकी महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने लगें। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पहल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में यह योजना आज लाखों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, आर्थिक संबल और नई उम्मीदों का संचार कर रही है।

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं
आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

महतारी वंदन योजना केवल हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सपनों को पंख देने, उनके आत्मसम्मान को मजबूत करने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बन गई है। प्रदेश के गांव-गांव से ऐसी प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि छोटे-छोटे आर्थिक सहयोग से भी बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं।

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर अपने जीवन में आए बदलाव साझा किए। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी की श्रीमती अनीता साहू ने बताया कि पहले आर्थिक कठिनाइयों के कारण परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन योजना से मिली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और “अनीता सिलाई सेंटर” शुरू किया। आज वे सिलाई, खेती और मजदूरी के माध्यम से अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं। उनका यह सफर संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक कहानी बन गया है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की श्रीमती मिथलेश चतुर्वेदी ने भी अपने जीवन का भावुक अनुभव साझा किया। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल दिया और उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया रास्ता चुना। आज वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में आत्मनिर्भर महिला की पहचान बना चुकी हैं।

कोरिया जिले की ग्राम डुमरिया निवासी श्रीमती बाबी राजवाड़े बताती हैं कि खेती-किसानी में मिलने वाली मासिक राशि उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। वहीं ग्राम आमापारा की श्रीमती सुंदरी पैकरा इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं, जिससे उनके बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

भरतपुर विकासखंड के ग्राम चांटी की श्रीमती सविता सिंह की कहानी इस योजना की सार्थकता को और मजबूत करती है। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। आज वे गांव में कपड़ों की सिलाई कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च स्वयं उठा रही हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।
महतारी वंदन योजना का व्यापक प्रभाव प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहा है। लगभग 69 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है और अब तक 25 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 237 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जा चुकी है। यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रहा है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को केवल सहायता नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। महिलाएं इस राशि से छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई में निवेश कर रही हैं, खेती-किसानी को मजबूत बना रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे परिवार, समाज और राज्य—तीनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

महिलाओं का कहना है कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने की ताकत दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में नई उम्मीद और नया आत्मविश्वास लेकर आई है।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है।

निश्चित रूप से महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए आत्मसम्मान, सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की नई सुबह साबित हो रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

    डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक जनसंपर्क, उप संचालक जनसंपर्क