निर्माण कार्यों से शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास को मिलेगी गति

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज नगर पंचायत पिपरिया को विकास की नई दिशा देते हुए कुल साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की सौगात दी। पीएमश्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, पिपरिया परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। 

उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना हमारी प्राथमिकता है। शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामुदायिक विकास तीनों को गति देने के लिए ये कार्य मील का पत्थर साबित होंगे। इन परियोजनाओं के साथ पिपरिया में शिक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं और नगरीय विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। यह सौगात पिपरिया के आने वाले वर्षों को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पंचायत पिपरिया अध्यक्ष श्री घुरवाराम साहू जिला पंचायत सदस्य डॉक्टर वीरेंद्र साहू, श्री मुकेश अग्रवाल, श्री निर्मल द्विवेदी, पार्षद कमल कांत नाविक, श्री सोम पटेल सहित जनप्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने 1 करोड़ 60 लाख 92 हजार रूपए की लागत से पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, 14 लाख 83 हजार रुपए की लागत से सामुदायिक भवन, 10 लाख रुपए की लागत से जायसवाल सामुदायिक भवन, 3 करोड़ 31 लाख 90 हजार रुपए की लागत से विभिन्न स्थानों में चौरिया, घड़ी व अन्य चौक निर्माण – सौंदर्यीकरण, हाईमास्ट लाईट, आरसीसी नाली, सीसी रोड, बाउंड्री वाल, व्यायामशाला, सामुदायिक भवन एवं पाथवे निर्माण, 19 लाख रुपए की लागत से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में रासायनिक, प्री-विज्ञान व भौतिक प्रयोगशाला और 20 लाख रुपए की लागत से नवीन खाद्य गोदाम निर्माण का भूमिपूजन किया। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह सभी परियोजनाएँ पिपरिया को आधुनिक शिक्षा, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और सुदृढ़ नगरीय विकास की दिशा में नई गति देंगी।

सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कर रही निरंतर कार्य

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिपरिया में साढ़े 5 करोड़ रुपए की बड़ी राशि से एक साथ  विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिपरिया अस्पताल का उन्नयन हो चुका है, वहीं सीएचसी निर्माण के लिए स्वीकृति जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की गई है तथा अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन की शुरुआत भी की गई है। उन्होंने बताया कि आईटीआई के लिए पौने 3 करोड़ रुपए और अनुसूचित जाति छात्रावास निर्माण के लिए 1.5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जिससे युवाओं और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

पीएम श्री स्कूल उन्नयन के लिए 1.60 करोड़ रुपए का भूमिपूजन, प्रतिभा को मिलेगा आधुनिक शिक्षण मंच

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पिपरिया स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पीएम श्री स्कूलों के उन्नयन के लिए 1 करोड़ 60 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने स्कूल में संचालित स्मार्ट क्लास की व्यवस्था और विद्यार्थियों से इसकी उपयोगिता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कवर्धा विधानसभा के 50 स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने थ्री-डी तकनीक के माध्यम से विज्ञान विषय को पढ़ाने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चे अत्यंत प्रतिभावान होते हैं और आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद नगर विकास कार्यों को नई गति मिली है और पिपरिया में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आने वाले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

स्वास्थ सुविधा में हो रहा तेजी से विस्तार

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कवर्धा को मेडिकल कॉलेज की एक बड़ी सौगात मिली और निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। मेडिकल कॉलेज में 50 सीटों हेतु तैयारी की जा रही है और 60 पदों की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पिपरिया एवं तरेगांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हेतु 52–52 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। बच्चों के लिए 50-सीटर क्रिटिकल केयर अस्पताल, जिला अस्पताल की क्षमता 100 से बढ़ाकर 220 बिस्तर, तथा सीटी स्कैन सेवा प्रारंभ की गई है। बोडला में सोनोग्राफी सेवा आरंभ की गई है। पिपरिया सहित दो स्थानों पर एंबुलेंस की सुविधा भी प्रारंभ की गई है। नया बस स्टैंड एवं मेडिकल कॉलेज को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए घोटिया रोड सहित गौरव पथ के दोनों मार्गों का उन्नयन किया जा रहा है।

जनसहभागिता से स्वच्छ और समृद्ध जिला का होगा  निर्माण

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। भोरमदेव विद्यापीठ निःशुल्क कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। साढ़े 4 करोड़ रुपये की लागत से नालंदा परिसर का भूमिपूजन किया गया है। कवर्धा के प्राचीन बूढ़ा महादेव परिसर में कांवरिया श्रद्धालुओं हेतु सुविधाओं के निर्माण का कार्य किया जाएगा। भोरमदेव पर्यटन क्षेत्र के उन्नयन हेतु 146 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कवर्धा विधानसभा में विकास कार्यों की गति निरंतर तेज हो रही है। रायपुर–बिलासपुर–राजनांदगांव मार्ग को फोरलेन में विकसित करते हुए कवर्धा प्रवेश मार्ग को उच्च स्तरीय स्वरूप देने के लिए 54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के सभी हिस्सों में संतुलित एवं व्यापक विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। स्वच्छता के क्षेत्र में जनसहयोग आवश्यक है। प्रत्येक वार्ड और हर गली को स्वच्छ बनाने के लिए जनजागरण तथा सामुदायिक सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाएं।

रूस के राष्ट्रपति की भारत की राजकीय यात्रा के परिणाम

मझौता ज्ञापन और समझौते

प्रवासन और गतिशीलता:

एक देश के नागरिकों के दूसरे देश के क्षेत्र में अस्थायी श्रम गतिविधि पर भारत सरकार और रूस की सरकार के बीच समझौता।  

भारत सरकार और रूस की सरकार के बीच अनियमित प्रवासन से निपटने में सहयोग पर समझौता।

स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा:

स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच समझौता।

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और रूस की सरकार की उपभोक्ता अधिकार संरक्षण एवं मानव कल्याण पर निगरानी की संघीय सेवा के बीच समझौता।

समुद्री सहयोग और ध्रुवीय जलक्षेत्र:

ध्रुवीय जलक्षेत्र में संचालित जहाजों के लिए विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर भारत सरकार के पत्‍तन, पोत परिवाहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा रूस की सरकार के परिवहन मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन।

भारत सरकार के पत्‍तन, पोत परिवाहन और जलमार्ग मंत्रालय और रूस के समुद्री बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन।

उर्वरक:

मेसर्स जेएससी यूरालकेम और मेसर्स राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड तथा नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और इंडियन पोटाश लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन।

सीमा शुल्क एवं वाणिज्य:

भारत और रूस के बीच माल और वाहनों के संबंध में आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान में सहयोग के लिए भारत सरकार के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड तथा रूस की संघीय सीमा शुल्क सेवा के बीच प्रोटोकॉल।

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग और जेएससी “रूसी पोस्ट” के बीच द्विपक्षीय समझौता।

शैक्षणिक सहयोग:

पुणे स्थित रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान  और रूस के फेडल स्‍टेट ऑटोनोमस उच्च शिक्षा संस्थान “नेशनल टॉम्स्क स्‍टेट यूर्निवसिटी”, टॉम्स्क के बीच वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन।

मुंबई विश्वविद्यालय, लोमोनोसोव मॉस्को स्‍टेट विश्वविद्यालय और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष की संयुक्त-स्टॉक कंपनी प्रबंधन कंपनी के बीच सहयोग संबंधी समझौता।

मीडिया सहयोग:

प्रसार भारती, भारत और संयुक्त स्टॉक कंपनी गज़प्रोम-मीडिया होल्डिंग, रूस संघ के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता हेतु समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और रूस के नेशनल मीडिया ग्रुप के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता के लिए हेतु समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और द बिग एशिया मीडिया ग्रुप के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता के लिए समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और एएनओ “टीवी-नोवोस्ती” के बीच प्रसारण सहयोग और सहभागिता हेतु समझौता ज्ञापन का परिशिष्ट।

“टीवी ब्रिक्स” संयुक्त स्टॉक कंपनी और “प्रसार भारती” के बीच समझौता ज्ञापन।

घोषणाएँ

भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए 2030 तक का कार्यक्रम।

रूसी पक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) में शामिल होने के लिए फ्रेमवर्क समझौते को अपनाने का निर्णय लिया है।

नई दिल्‍ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी और मास्‍को स्थित ज़ारित्सिनो स्‍टेट ऐतिहासिक, वास्तुशिल्‍प, कला एवं भूदृश्य संग्रहालय-रिजर्व के बीच प्रदर्शनी “इंडिया: फैवरिक ऑफ टाइम” के लिए समझौता।

रूसी नागरिकों को पारस्परिक आधार पर 30 दिनों का निःशुल्क ई-पर्यटक वीज़ा प्रदान किया जाएगा।

रूसी नागरिकों को निःशुल्क समूह पर्यटक वीज़ा प्रदान किया जाएगा।

विश्व मनोरंजन: बदलती दुनिया का ग्लोबल एंटरटेनमेंट उद्योग

मनोरंजन (Entertainment) आज केवल समय बिताने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक उद्योग बन चुका है, जिसकी पहुँच तकनीक, संस्कृति और अर्थव्यवस्था—तीनों को प्रभावित करती है। फिल्में, संगीत, गेमिंग, स्पोर्ट्स, सोशल मीडिया, लाइव शो और डिजिटल कंटेंट—ये सब मिलकर आज World Entertainment Industry का आकार तय करते हैं।


1. मनोरंजन का वैश्विक स्वरूप

दुनिया भर में एंटरटेनमेंट अब स्थानीय सीमाओं में बंधा नहीं है।

  • कोरिया के K-Pop की धुनें भारत-अमेरिका तक छा जाती हैं,
  • हॉलीवुड की फिल्में दुनिया के हर देश में रिलीज़ होती हैं,
  • भारतीय OTT और संगीत विदेशों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

यह पूरा उद्योग ग्लोबल कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया की बदौलत लगातार बढ़ रहा है।


2. डिजिटल एंटरटेनमेंट का उभार

पिछले 10 वर्षों में डिजिटल मनोरंजन ने सबसे तेज़ विकास किया है।

🔹 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म:

  • Netflix, Amazon Prime, Disney+
  • YouTube, TikTok, Instagram
  • Spotify, Apple Music
  • Online Gaming: PUBG, Free Fire, Fortnite
  • eSports: लाइव गेमिंग प्रतियोगिताएँ

इनकी वजह से अब मनोरंजन “on demand” उपलब्ध है—यानी जब चाहें, जैसे चाहें।


3. फिल्म उद्योग का वैश्वीकरण

हॉलीवुड, बॉलीवुड, K-Cinema और एनीमेशन अब सर्वाधिक कमाई करने वाले क्षेत्र हैं।

  • Marvel, Avatar, Fast & Furious जैसी फिल्में वैश्विक ब्लॉकबस्टर बनती हैं।
  • भारतीय सिनेमा अब दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (KGF, RRR, Pushpa) की वजह से अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रहा है।
  • एनीमेशन फिल्में (Disney, Pixar, Anime) बच्चों और युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हैं।

4. संगीत उद्योग की क्रांति

संगीत का उपभोग अब रिकॉर्ड और CD से मोबाइल ऐप तक पहुँच चुका है।

  • Spotify, YouTube Music और JioSaavn ने दुनिया भर का संगीत सबके लिए उपलब्ध कर दिया है।
  • लोकल संगीत ग्लोबल हो रहा है—जैसे K-pop, African Beats, Punjabi Pop।

5. सोशल मीडिया: नया एंटरटेनमेंट पॉवरहाउस

Instagram Reels, YouTube Shorts और TikTok ने मनोरंजन का चरित्र पूरी तरह बदल दिया है।
अब हर व्यक्ति कंटेंट क्रिएटर बन सकता है।
इन्फ्लुएंसर्स, व्लॉगर्स और डिजिटल रचनाकार मनोरंजन का नया चेहरा बन चुके हैं।


6. गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स का उभार

गेमिंग अब एक इंडस्ट्री नहीं, बल्कि एक स्पोर्ट्स कैटेगरी बन चुकी है।

  • लाखों लोग लाइव गेम खेलते और देखते हैं।
  • ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में करोड़ों की प्राइज मनी होती है।
  • VR और Metaverse एंटरटेनमेंट का नया भविष्य हैं।

7. लाइव शो और इवेंट्स का महत्व

भले ही डिजिटल दुनिया बढ़ रही हो, लेकिन लाइव मनोरंजन का अपना अलग महत्व है—

  • कॉन्सर्ट
  • थिएटर
  • स्टैंड-अप कॉमेडी
  • स्पोर्ट्स टूर्नामेंट (FIFA, Olympics, IPL)

लाइव इवेंट्स लोगों को अनुभव और भावनाएँ प्रदान करते हैं, जो डिजिटल माध्यमों से संभव नहीं।


8. भविष्य: एंटरटेनमेंट कहाँ जा रहा है?

भविष्य का मनोरंजन तीन दिशाओं में आगे बढ़ रहा है:

🔮 1. AI आधारित मनोरंजन

फिल्में, संगीत, गेम—AI से और तेज़, और व्यक्तिगत होंगी।

🔮 2. Metaverse

एक ऐसी वर्चुअल दुनिया जहाँ लोग डिजिटल अवतार में फिल्में, गेम और इवेंट्स का अनुभव करेंगे।

🔮 3. इंटरएक्टिव कंटेंट

दर्शक कहानी में बदलाव कर सकेंगे, जैसे Netflix का “Black Mirror: Bandersnatch”।


🎬 निष्कर्ष

विश्व मनोरंजन आज एक तेज़ी से बदलते और तकनीक आधारित उद्योग में बदल चुका है। जहाँ पहले मनोरंजन केवल टीवी, रेडियो या थिएटर तक सीमित था, वहीं आज यह हर स्क्रीन—मोबाइल, लैपटॉप, VR हेडसेट—पर उपलब्ध है।
डिजिटल दुनिया की वजह से मनोरंजन अब स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक हो चुका है।

कंठस्थ शुक्ल यजुर्वेद का दण्डक्रम पारायण

वाराणसी। एक ऐतिहासिक समारोह में 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिनी शाखा) के अत्यंत कठिन दण्डक्रम पारायण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सम्मानित किया गया। इस प्रकार की साधना पिछले तीन सौ वर्षों में केवल कुछ ही बार सम्पन्न हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी और जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विदुशेखर भारती महास्वामीजी के आशीर्वाद से भव्य शोभायात्रा और नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया गया। शोभायात्रा के दौरान काशी की सड़कों पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों की ताल और बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। मार्गभर पुष्पवृष्टि और पारंपरिक संगीत ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।

दक्षिणाम्नाय श्री शारदापीठ, शृंगेरी की ओर से देवव्रत को ₹5 लाख का बहुमूल्य स्वर्ण कंगन और ₹1,11,116 की सम्मान राशि दी गई।। यह सम्मान पीठ की ओर से डॉ. तंगीराल शिवकुमार शर्मा ने उभय जगद्गुरुओं के आशीर्वाद के साथ प्रदान किया।

दण्डक्रम पारायण वैदिक अध्ययन की सबसे कठिन विधियों में से एक मानी जाती है, जिसमें स्वरों, संधि-विच्छेद और विरोध-संधि की अत्यंत सूक्ष्म गणनाएँ शामिल होती हैं। इसे परंपरागत रूप से वेद मुकुट के रूप में भी जाना जाता है।

वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा के कंठस्थ दण्डक्रम पारायण को 50 दिन में पूर्ण करने वाले 19 वर्षीय बटु देवव्रत रेखे को अंगवस्त्रम, प्रतीक चिह्न नारिकेल देकर सम्मानित किया।

काशी में पहली बार देवव्रत रेखे ने 12 अक्तूबर 2025 से 29 नवम्बर 2025 के मध्य 50 दिन की अवधि में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण कि​या। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा संहिता में कुल 40 अध्याय एवं 2000 मंत्र है। लेकिन दण्डक्रम पारायण में मंत्रों की संख्या 25 लाख हो जाती है। यह दण्डक्रम पारायण काशी के सांगवेद विद्यालय रामघाट में पद्मश्री पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

देवव्रत रेखे की वैदिक शिक्षा उनके पिता घनपाठी महेश रेखे के निर्देशन में हुई है। इस तरह का शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनी की शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण 200 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में हुआ था। काशी में यह कंठस्थ दण्डक्रम पारायण पहली बार होने से विशेष है। महेश रेखे महाराष्ट्र के पुणे के समीप अहिल्यानगर के निवासी हैं।

वेद के दण्डक्रम पारायण पाठ श्रवण से अधिकाधिक फल की प्राप्ति का विधान है। देवव्रत रेखे की इस महनीय उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर प्रशंसा की।

उन्होंने एक्स पर लिखा –

19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है।

काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया।

गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने आज ही के दिन अर्जुन को गीता उपदेश देकर समस्त संसार को यह संदेश दिया कि बुराई चाहे कहीं से भी उपजे उसे खत्म करना ही हमारा धर्म और कर्तव्य है, फिर चाहे उस बुराई को करने वाले अपने ही क्यों ना हों।

आज गीता महोत्सव या गीता जयंती के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हम सबको स्मरण करवाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी हमें अपनों से भी लड़ना पड़ सकता है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण ने अर्जुन को धर्म-कर्म और मोक्ष का दिव्य ज्ञान दिया था। इसीलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कृष्ण एक ऐसा नाम है जो अखिल ब्रह्मांड में सभी देवी देवताओं को प्रिय है। कृष्ण अर्थात आकर्षण, जिसके नाम में ही आकर्षण हो, भला सारी सृष्टि उससे आकर्षित कैसे नहीं होगी?

वर्तमान परिवेश में भी भगवान कृष्ण की चर्चा सर्वदा सबसे ज्यादा होती है क्योंकि कृष्ण 16 कलाओं में निपुण हैं और कृष्ण ऐसी शक्ति हैं, जिन्हें गुरु भी माना जा सकता है और सखा भी। कृष्ण को जिसने जिस रूप में चाहा, वे उसे उसी रूप में दिखाई दिए। परंतु अटल सत्य तो यही है कि कृष्ण कण-कण में व्याप्त हैं और उनकी लीलाओं का वर्णन जिसने नहीं सुना, उसका जीवन अधूरा ही है। कृष्ण को बुद्धि के तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम के भाव से ही समझा व प्राप्त किया जा सकता है।

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं, इसलिए उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है।

कृष्ण ने धरती पर रहकर आम मनुष्य की तरह ही जीवन जिया। कृष्ण का बाल रूप जो तरह-तरह की लीलाओं से वर्णित रहा, उन्होंने लीलाधर बनकर लीलाएं रचीं, गोपाल बनकर ग्वाल बाल के संग माखन चुराया तो मनोहर बनकर गोपियों संग रास भी रचाया। कभी गुरु बनकर उपदेश दिया तो कभी सखा बनकर प्रेम का संदेश दिया, वंशीधर बनकर मुरली की धुन से सबका मन मोहा तो चक्रधारी के रूप में न्याय के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग भी किया। लोगों के हित के लिए रणछोड़ बने तो द्वारकाधीश बनकर राज्य भी संभाला।

देखा जाए तो अलग अलग समय पर उन्होंने अपने स्वरूप को भी समय अनुसार बदला। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसलिए समय के साथ-साथ परिवर्तन को भी हमें स्वीकार करना चाहिए।

राधा कृष्ण ने मिलकर विशुद्ध प्रेम की परिभाषा पूरे संसार को समझाई। उनके द्वारा दिए गए उपदेश भगवद्गीता में संकलित हैं, भगवद्गीता मनुष्य को अपने कर्तव्य और कर्म फल का बोध कराती है। गीता के पठन और श्रवण से प्रत्येक प्राणी जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

समस्त संसार को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करने वाला ग्रंथ भगवद्गीता प्रत्येक प्राणी के जीवन में हर प्रकार से सहायक है। दूसरों को दुख देना ही सबसे बड़ा पाप और सुख देना ही सबसे बड़ा सुख है, भूत भविष्य की चिंता छोड़कर हमें वर्तमान में जीना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।

यह दिन केवल पूजा अर्चना के लिए ही नहीं, अपितु श्री कृष्ण द्वारा दिए संदेश, शिक्षा को यदि हम अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लें और उस पर विचार करके चलें तो हमारा जीवन भी धन्य हो जाएगा। यही अपने आराध्य के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति होगी।

BSF Punjab Frontier 2025 की प्रमुख उपलब्धियाँ: ड्रोन से लेकर नशा तस्करी पर बड़ा प्रहार

जालंधर

1 दिसंबर 2025 | चंडीगढ़
बीएसएफ के 61वें स्थापना दिवस से पहले BSF Punjab Frontier 2025 की ऑपरेशनल रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट में ड्रोन गतिविधि, नशा तस्करी, हथियार बरामदगी और आंतरिक सुरक्षा में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों को सामने रखा गया।


ड्रोन चुनौती पर BSF की बड़ी कार्रवाई

इस वर्ष पाकिस्तान की ओर से बढ़ी ड्रोन गतिविधियाँ बीएसएफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती थीं। लेकिन BSF Punjab Frontier 2025 ने समय रहते कड़ी कार्रवाई की और 272 ड्रोन को मार गिराया या जब्त किया परिणामस्वरूप सीमा पार से होने वाली ड्रग और हथियार सप्लाई को रोका गया जिससे ड्रोन मूवमेंट पर विशेष निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई


नशा तस्करी पर निर्णायक प्रहार

बीएसएफ ने नशा तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई सफल अभियान चलाए। वर्ष 2025 में पकड़ी गई नशीली वस्तुओं की मात्रा:

  • हेरोइन – 367.788 किग्रा
  • आईस ड्रग – 19.033 किग्रा
  • अफीम – 14.437 किग्रा

इन बरामदगियों से पाकिस्तान आधारित नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ है।


हथियार तस्करी का भंडाफोड़

BSF Punjab Frontier 2025 ने सीमा पर हथियार भेजने की कोशिशों को विफल करते हुए:

  • 200 अवैध हथियार
  • 3625 लाइव राउंड
  • 265 मैगजीन

बरामद कीं। यह सीमा पार सक्रिय आतंकी व तस्करी गिरोहों के लिए बड़ा झटका है।


तस्करों और संदिग्धों पर बड़ी कार्रवाई

बीएसएफ ने विभिन्न ऑपरेशनों में अलग-अलग देशों के नागरिकों को गिरफ्तार किया:

  • 251 भारतीय तस्कर/संदिग्ध
  • 18 पाकिस्तानी नागरिक
  • 4 नेपाली नागरिक
  • 3 बांग्लादेशी नागरिक

इसके अतिरिक्त, सीमा पार घुसपैठ की कोशिश कर रहे 3 पाकिस्तानी नागरिकों को मार गिराया गया


आंतरिक सुरक्षा में BSF की महत्वपूर्ण भूमिका

सीमा सुरक्षा के साथ-साथ BSF Punjab Frontier 2025 ने देश की आंतरिक सुरक्षा में भी योगदान दिया:

अमरनाथ यात्रा सुरक्षा तैनाती

  • 22 कंपनियाँ कश्मीर घाटी में तैनात की गईं

कानून-व्यवस्था में तैनाती

  • हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न जिलों में तैनाती
  • प्रयागराज महाकुंभ 2025 की सुरक्षा में भी BSF की भूमिका

शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने में योगदान

BSF पंजाब फ्रंटियर की टुकड़ियाँ निम्न राज्यों में चुनाव ड्यूटी में तैनात रहीं:

  • बिहार
  • दिल्ली
  • गुजरात
  • पंजाब
  • जम्मू-कश्मीर
  • राजस्थान
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल

BSF सीमा संरचना और तैनाती आँकड़े

  • भारत–पाकिस्तान सीमा: 2289.66 किमी
  • एलओसी तैनाती: 772 किमी (237.2 किमी पर स्वतंत्र तैनाती)
  • भारत–बांग्लादेश सीमा: 4096.70 किमी
  • कुल सीमा सुरक्षा: 6386.36 किमी
  • पंजाब फ्रंटियर की सीमा: 533 किमी
  • कुल बटालियन: 19

2025 BSF पंजाब के लिए उपलब्धियों का वर्ष

ड्रोन रोधी कार्रवाई, नशा व हथियार तस्करी पर रोक, और आंतरिक सुरक्षा में योगदान—इन सभी उपलब्धियों से स्पष्ट है कि BSF Punjab Frontier 2025 भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।

नई कंप्यूटर तकनीक 2025: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल दुनिया के बड़े बदलाव

तकनीक की दुनिया लगातार बदल रही है, लेकिन 2025 में कंप्यूटर तकनीक ने एक नई रफ़्तार पकड़ ली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और अल्ट्रा-फास्ट चिप्स—ये सभी मिलकर हमारे काम करने, सीखने और जीने के तरीके को बदल रहे हैं।
आइए जानते हैं इस साल की सबसे नई और महत्वपूर्ण कंप्यूटर तकनीकों के बारे में:


1. एआई-चालित कंप्यूटर (AI-Powered Computing)

2025 में कंप्यूटर अब सिर्फ मशीन नहीं बल्कि “सोचने वाले साथी” बन रहे हैं।

  • ये डेटा को खुद समझते हैं।
  • निर्णय लेने में मदद करते हैं।
  • आवाज़ और टेक्स्ट दोनों को आसानी से पहचानते हैं।
    AI-सक्षम कंप्यूटर अब शिक्षा, हेल्थकेयर, सुरक्षा और बिज़नेस—हर जगह उपयोग किए जा रहे हैं।

2. क्वांटम कंप्यूटिंग का उभार (Quantum Computing Rise)

क्वांटम कंप्यूटर अब प्रयोगशालाओं से निकलकर उद्योगों में प्रवेश कर रहे हैं।
ये पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना तेज़ प्रोसेसिंग कर सकते हैं।
इनका उपयोग—

  • नई दवाओं की खोज
  • मौसम पूर्वानुमान
  • साइबर सुरक्षा
  • जटिल गणना
    में तेजी से बढ़ रहा है।

3. एज कंप्यूटिंग (Edge Computing)

अब डेटा दूर सर्वर पर नहीं, बल्कि डिवाइस के पास ही प्रोसेस होता है।
इसके फायदे:

  • तेज़ स्पीड
  • कम लेटेंसी
  • उच्च सुरक्षा
    स्मार्ट शहर, ट्रैफिक सिस्टम और IoT डिवाइस में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

4. न्यूरोमॉर्फिक चिप्स (Neuromorphic Chips)

मानव मस्तिष्क जैसी क्षमता वाले कंप्यूटर चिप्स 2025 में चर्चा में हैं।
ये चिप्स—

  • ऊर्जा बचाते हैं
  • तेज़ी से सीखते हैं
  • AI को और शक्तिशाली बनाते हैं
    रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग वाहन में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

5. हाइब्रिड क्लाउड और मल्टी-क्लाउड तकनीक

कंपनियाँ अब एक ही क्लाउड पर निर्भर नहीं रहतीं।
हाइब्रिड और मल्टी-क्लाउड मॉडल—

  • डेटा सुरक्षा बढ़ाते हैं
  • लागत कम करते हैं
  • सेवाओं को स्केल करना आसान बनाते हैं।

6. साइबर सुरक्षा में एआई की भूमिका

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए 2025 में एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।
ये सिस्टम—

  • तुरंत खतरे को पहचानते हैं
  • स्वतः कार्रवाई करते हैं
  • डेटा को सुरक्षित रखते हैं

7. एक्सआर तकनीक (XR – AR/VR/MR)

वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी का विस्तार हो रहा है।
शिक्षा, गेमिंग, ट्रेनिंग और पर्यटन में XR नई दुनिया बना रहा है।


निष्कर्ष

2025 कंप्यूटर तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो रहा है।
AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और नई पीढ़ी के चिप्स—ये तकनीकें आने वाले वर्षों में मानव जीवन को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और तेज़ बनाने वाली हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

हमने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा के घेरे को मजबूत बनाया है, इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो 126 थी, वो घटकर 11 रह गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGsP/IGsP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है

अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा

पिछले 40 साल से देश के लिए नासूर बनें 3 हॉटस्पॉट नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे

हमने NIA, UAPA कानूनों को सुदृढ़ बनाने, तीन नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए हैं

तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक होगी

हमने PFI पर बैन लगाकर देशभर में उनके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण बनी

Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy इन तीन बिंदुओं पर काम करके हम कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं

हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है कि इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच भी जमीन न मिल पाए

अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस NCB के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट – नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर – की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक बन जाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद पर मोदी सरकार की कार्रवाई का जिक्र कहते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगाने के बाद देशभर में उसके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy के तीन बिंदुओं पर काम कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।

गृह मंत्री ने दोहराया कि हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है जिससे इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच जमीन भी न मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पूर्ण गौरव के साथ धर्म ध्वजारोहण

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अयोध्या धाम, 25 नवम्बर।

रामराज्य का प्रतीक धर्मध्वज आज पूर्ण श्रद्धा के साथ श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के उत्तुंग शिखर पर चढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वज को 191 फिट ऊंचाई पर चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की। हजारों की संख्या में उपस्थित हर जाति वर्ग के लोग भाव विभोर होकर पांच सौ वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद आए इस सार्थकता दिवस के साक्षी बने। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रामदरबार में आरती कर रामलला का दर्शन पूजन किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री, सरसंघचालक जी सहित सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भव्य मंदिर पर ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति ही नहीं, अपितु नए युग का शुभारंभ है। रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। अनगिनत पीढ़ियों की प्रतीक्षा भव्य मंदिर के रूप में है। यह ध्वज धर्म और मर्यादा के साथ ही राष्ट्रधर्म और विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। “नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना..” की रामराज्य की परिकल्पना में सभी को अन्न, स्वास्थ्य सुविधा, आवास आदि उपलब्ध कराना है। यही रामराज्य की उद्घोषणा का संकल्प है। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद इस ध्वजारोहण से अयोध्या अब उत्सवों की वैश्विक राजधानी बन गई है।

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। इसके लिए कितने लोगों ने सपना देखा, कितनों ने प्रयास किया, कितनों ने अपने प्राण अर्पण किए। अशोक जी, महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी सहित कितने ही संत पुरुषों, गृहस्थ, विद्यार्थियों ने अपने प्रणार्पण किए, आज उनकी आत्माएं तृप्त हो रही होंगी। आज उस मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। यह उसी ध्वज का आरोहण व रामराज्य का ध्वज है जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख शांति प्रदान करता था। उसी ध्वज को आज फिर से हमने नीचे से ऊपर चढ़ता हुआ, अपने शिखर पर विराजमान होते अपनी आंखों से देखा है। मंदिर बनने में भी समय लगा, 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही हैं। मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को उच्चतम शिखर पर पहुंचाया, जिससे सारा विश्व ठीक चले। व्यक्तिगत, पारिवारिक जीवन से लेकर तो संपूर्ण सृष्टि का जीवन ठीक चले, यही धर्म है। उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग ही इस ध्वज का रंग है। इस धर्म ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष उस रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है, जिससे यह व्यक्त होता है कि स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों के लिए छाया प्रदान करें। ध्वजारोहण यह भी संदेश देता है कि इस जीवन का झंडा शिखर तक पहुंचना है, चाहे जितनी प्रतिकूलता, कठिनाई क्यों न हो। भले ही सारी दुनिया स्वार्थ में बैठी हो, लेकिन हमारा संकल्प सूर्य भगवान के तेज जैसा है। हिन्दू समाज ने लगातार 500 साल और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस तत्व को सिद्ध किया और रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यह ध्यान रहे कि संपूर्ण दुनिया में सुख बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रतीक को देखकर हिम्मत रखकर सतत प्रयास करते हुए, सब प्रकार की प्रतिकूलताओं में भी हम सबको मिलकर करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आज यह हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जो संकल्प हमारे पूर्वजों ने दिया है। यह देश जहां हम जन्मे हैं, सबसे प्राचीन है, इसलिए बड़े भाई हैं, ऐसा जीवन जिएं कि पृथ्वी के सर्वमानव चरित्र की शिक्षा, जीवन की विद्या भारतवासियों से सीखें। सबको विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष खड़ा करना है। यह विश्व की अपेक्षा है, यही हमारा कर्तव्य है। मंदिर में श्री रामलला विराजमान हैं, उनका नाम लें और इस कार्य की गति बढ़ाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश और दुनिया इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। राम भक्तों को संतोष, असीम कृतज्ञता, अपार अलौकिक आनंद है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहुति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। यह एक पल भी आस्था से डिगी नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटी नहीं। आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्म ध्वजा के रूप में दिव्यतम्, भव्यतम् मंदिर प्रतिस्थापित हुआ। यह पुनर्जागरण का ध्वज है, इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ‘ॐ’ शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प है, सफलता है, संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे सपनों का साकार स्वरूप है। यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। यह धर्म ध्वज आह्वान करेगा सत्यमेव जयते का। यह धर्म ध्वज प्रेरणा बनेगा प्राण जाई पर वचन न जाई। धर्म ध्वजा कामना करेगा परेशानी से मुक्ति, समाज में शांति और सुख हो, यह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा। युगों-युगों तक प्रभु श्री राम के आदेशों और प्रेरणा को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। संपूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों को इस अद्वितीय अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज उन सभी भक्तों को भी प्रणाम करता हूं, हर उस दानवीर का आभार व्यक्त करता हूं, जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। राम मंदिर के निर्माण से जुड़े हर श्रमवीर, हर कारीगर, हर योजनाकार, हर वास्तुकार सभी का अभिनंदन करता हूं।

अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। इसी अयोध्या में संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति से, उसके संस्कारों से, पुरुषोत्तम बनता है। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बन करके आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषाद राज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान का समर्पण, इन सब की शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक समर्थ्य का भी चेतना स्थल बन रहा है। यहां सप्त मंदिर बने हैं, माता शबरी का मंदिर बना है जो जनजातीय समाज के प्रेम भाव और आतिथ्य परंपरा की प्रतिमूर्ति है। यहां निषादराज का मंदिर बना है, यह उस मित्रता का साक्षी है जो साधन नहीं, साध्य को, उसकी भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या है, महर्षि वाल्मीकि है, महर्षि वशिष्ठ है, महर्षि विश्वामित्र है, महर्षि अगस्त्य है और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी भी हैं, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती है। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय है। शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि सहित अन्य न्यासीगण व आमंत्रित संत समाज व अनेक प्रतिष्ठित जन उपस्थित रहे।

प्रभु राम समस्त मानव जाति के लिए आदर्श हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

अयोध्या, 02 अक्तूबर 2025।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी १०० वर्षों की यात्रा पूरी करते हुए 101वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। इसी दिन समाज के संगठन व सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव पर ले जाने हेतु डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने 27 सितम्बर 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारंभ किया था। अयोध्या के राम कथा पार्क में श्री विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया गया। ध्वजारोहण के साथ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने शस्त्र पूजन कर भगवान राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजन किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष भगवान श्री ऋषभ देव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ अयोध्या के पीठाधीश पूज्यसंत रवींद्र कीर्ति स्वामी जी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संघ के वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। संघ वैदिक, सनातन संस्कृति के मूल मंत्र अहिंसा परमो धर्मः का पालन करने वाला संगठन है।

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि विजयादशमी धर्म स्थापना का मंगल उत्सव है। अधर्म पर धर्म की, अन्याय पर न्याय की, असत्य पर सत्य की जीत की कामना करते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने अद्भुत प्रेरणादाई यात्रा के सौ वर्ष पूर्ण करते हुए अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। संघ के स्वयंसेवक देश व विदेशों में भी रहकर मानवता की सेवा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। हिन्दुत्व समन्वय का विचार है। रामराज्य और हिन्दू राष्ट्र अलग अलग नहीं है। प्रभु राम केवल भारत भूमि के नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए आदर्श हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एक ध्येय मार्ग पर संगठित करने का संकल्प लेकर कार्य कर रहा है।

राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन के मार्ग पर चलते हुए, देश सेवा के लिए सामने आएं, कमजोर दुर्बल के जीवन को सार्थक बनाने के लिए संघ के स्वयंसेवक कार्यरत हैं। संघ के साथ मिलकर जिन्होंने इस कार्य में सहयोग किया, हम सब आज उन सबका स्मरण करते हुए आभार व्यक्त करते हैं। भारत के प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान, प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए। इसलिए संघ शताब्दी वर्ष से पंच परिवर्तन के विषय को ले कर आगे बढ़ेंगे। देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें। इस विचार को लेकर नौजवानों को खड़ा होना चाहिए। देश में एक अध्यात्म, चरित्र, धर्म की क्रांति होनी चाहिए। व्यक्ति निर्माण से चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण करना ही संघ का उद्देश्य है।

कार्यक्रम के पश्चात पथ संचलन निकला।