भारत की जनगणना 2027 – केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से भारत की जनगणना 2027 कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है ।

योजना का विवरण:

  • भारतीय जनगणना विश्‍व की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कार्ययोजना है। भारत की जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी: ( i ) घरों की सूची बनाना (हाउसलिस्टिंग) और आवास (हाउसिंग) जनगणना – अप्रैल से सितंबर, 2026 और (ii) जनसंख्‍या की गणना (पीई) – फरवरी 2027 (केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बर्फ से प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड राज्यों के लिए, पीई सितंबर, 2026 में की जाएगी)।
  • लगभग 30 लाख प्रक्षेत्र कर्मचारी राष्ट्रीय महत्व के इस विशाल कार्य को पूरा करेंगे।
  • डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और मॉनिटरिंग के लिए सेंट्रल पोर्टल का उपयोग करने से बेहतर गुणवत्ता का डेटा सुनिश्चित होगी।
  • डाटा प्रसार बेहतर और अधिक यूज़र फ्रेंडली तरीके से होगा ताकि नीति निर्माण के लिए आवश्‍यक मानकों पर सभी प्रश्‍न एक बटन क्लिक करते ही प्राप्‍त हो जाए।
  • जनगणना एक सेवा के रूप में (सीएएएस) मंत्रालयों को डेटा स्‍पष्‍ट, मशीन से पढ़े जा सकने वाले और कार्रवाई करने योग्‍य प्रारूप में प्रदान करेंगे।

लाभ: 

भारत की जनगणना 2027 में देश की समस्‍त जनसंख्‍या को शामिल किया जाएगा।

कार्यान्‍वयन कार्यनीति और लक्ष्य:

  • जनगणना प्रक्रिया में हर घर में जाना और हाउसलिस्टिंग तथा हाउसिंग जनगणना और जनसंख्या गणना के लिए अलग-अलग प्रश्नावली तैयार करना शामिल है।
  • गणनाकार (एन्यूमेरेटर) जो आम तौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं और जिन्हें राज्य सरकार नियुक्‍त करती है, अपनी नियमित ड्यूटी के अतिरिक्‍त जनगणना का फील्ड वर्क भी करेंगे।
  • उप-जिला, जिला और राज्‍य स्‍तरों पर दूसरे जनगणना अधिकारियों को भी राज्‍य /जिला प्रशासन द्वारा नियुक्‍त किया जाएगा।
  • जनगणना 2027 के लिए उठाए गए नए कदम इस प्रकार हैं:

( i ) देश में डिजिटल माध्‍यम से पहली जनगणना। डेटा का संग्रह मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके किया जाएगा जो एन्‍डरॉएड और आईओएस दोनों वर्जनों के लिए उपलब्ध होंगे।

(ii)    पूरी जनगणना प्रक्रिया को वास्‍तविक समय आधार पर प्रबंधित और निगरानी करने के लिए एक समर्पित पोर्टल, जिसका नाम सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस) है, डेवलप किया गया है।

(iv)    हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) क्रिएटर वेब मैप एप्लीकेशन: जनगणना 2027 के लिए एक और इनोवेशन एचएलबी क्रिएटर वेब मैप एप्लीकेशन है, जिसका उपयोग प्रभारी अधिकारी करेंगे।

(v) जनता को स्‍वयं गिनती करने का विकल्‍प दिया जाएगा।

(vi)    इस विशाल डिजिटल अभियान के लिए सटीक सुरक्षा फ़ीचर प्रदान किया गया है।

(vii)    जनगणना 2027 के लिए पूरे देश में जागरूकता, सबको साथ लेकर चलने वाली भागीदारी, सभी का सहयोग और प्रक्षेत्र अभियानों में सहायता के लिए एक केंद्रि‍त और व्‍यापक प्रचारित अभियान संचालित किया जाएगा। इसमें सटीक, प्रमाणिक और समय पर जानकारी साझा करने पर बल दिया जाएगा और समावेशी तथा प्रभावी लोकसंपर्क प्रयास सुनिश्चित किया जाएगा।

(viii) राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को अपनी बैठक में आगामी जनगणना यानी जनगणना 2027 में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय किया। हमारे देश में भारी सामाजिक और जनसांख्यिकीय विविधता तथा संबंधित चुनौतियों के साथ, जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पीई) में जाति डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भी शामिल किया जाएगा।

(ix)    लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को, जिनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइज़र, मास्टर ट्रेनर, प्रभारी अधिकारी और प्रधान/जिला जनगणना अधिकारी शामिल हैं, डेटा कलेक्शन, मॉनिटरिंग और जनगणना अभियान के पर्यवेक्षण के लिए तैनात किया जाएगा। सभी जनगणना कर्मचारियों को जनगणना के काम के लिए उपयुक्‍त मानदेय प्रदान किया जाएगा क्योंकि वे अपने नियमित कार्य के अतिरिक्‍त यह काम भी करेंगे।

रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव:

  • वर्तमान में प्रयास यह है कि आगामी जनगणना डेटा पूरे देश में कम से कम समय में उपलब्ध कराया जाए। जनगणना परिणामों को अधिक कस्टमाइज़्ड विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स के साथ प्रसारित करने की भी कोशिश की जाएगी। डेटा सबसे निचली प्रशासनिक इकाई यानी गांव/वार्ड स्‍तर तक सभी के साथ साझा किया जाएगा।
  • जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए अलग-अलग दायित्‍वों को पूरा करने हेतु, स्‍थानीय स्‍तर पर लगभग 550 दिनों के लिए लगभग 18,600 तकनीकी श्रमबल का उपयोग किया जाएगा। दूसरे शब्दों में, लगभग 1.02 करोड़ मानव दिवसों का रोजगार सृजित होगा। इसके अतिरिक्‍त प्रभारी/जिला/राज्य स्‍तर पर तकनीकी श्रमबल देने के प्रावधान का परिणाम क्षमता निर्माण के रूप में भी आएगा क्योंकि कार्य की प्रकृति डिजिटल डेटा हैंडलिंग, मॉनिटरिंग और कोऑर्डिनेशन से जुड़ी होगी। इससे इन लोगों के भविष्य में रोज़गार की संभावनाओं में भी मदद मिलेगी।

पृष्ठभूमि:

जनगणना 2027 देश में 16वीं जनगणना और स्‍वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना  होगी। जनगणना गांव, शहर और वार्ड स्‍तर पर प्राथमिक डेटा उपलब्‍ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है, जो घर की स्थिति; सुविधाएं और परिसंपत्तियां, जनसांख्यिकीय, धर्म, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक कार्यकलाप, प्रवासन और उर्वरता जैसे अलग-अलग मानकों पर सूक्ष्‍म स्‍तर डेटा प्रदान करता है। जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 जनगणना के संचालन के लिए कानूनी संरचना प्रदान करते हैं।

विहिप केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक में देशभर से जुटे लगभग 300 संत

नई दिल्ली, दिसंबर 9, 2025। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की द्वि-दिवसीय बैठक मंगलवार सायंकाल 3 बजे इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार जी ने हिन्दू समाज के समक्ष चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन का आग्रह किया –

  • हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति।
  • देश भर में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर विराम हेतु प्रभावी उपाय।
  • धर्म स्वातंत्र्य कानून को संपूर्ण देश में एक समान रूप से लागू करना।
  • देश में बढ़ती जिहादी मानसिकता, कट्टरता और हिंसक घटनाएं।
  • सीमांत क्षेत्रों में बढ़ती सामाजिक समस्याओं और नशामुक्ति अभियान।
  • आगामी जनगणना में सभी हिन्दू अपना धर्म ‘हिन्दू’ ही लिखें।

बैठक में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि कुछ समूह आज जिहाद और आतंकी मानसिकता को उचित ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं। दिल्ली में हुए आतंकी हमले के आरोपी का समर्थन करने की प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि देश की संसद कठोर और प्रभावी कानून लाए। उन्होंने देवालयों की सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बंगाल से पधारे पूज्य संतों ने राज्य की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे जिहादी बयान, हिन्दुओं को धमकी व अत्याचार न सिर्फ बंगाल बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए चेतावनी है।

सुधांशु जी महाराज ने राममंदिर निर्माण की 500 वर्षों की तपस्या और संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की असली ऊर्जा हमारे संतों और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है। आज समय की आवश्यकता है कि गुरुकुल, पुजारी परंपरा, आश्रम और संस्कार केंद्रों को सशक्त बनाया जाए तथा सनातन समाज अपनी सांस्कृतिक शक्ति के लिए संगठित हो।

बैठक में पूज्य जगद्गुरु स्वामी राम कमलचार्य जी, अटल पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद जी महाराज, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज, विहिप उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल, संरक्षक दिनेश चंद्र, सह संगठन मंत्री विनायक राव व केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी सहित देशभर से पधारे अनेक पूजनीय संत और विहिप पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं – दत्तात्रेय होसबाले जी

ऊधमपुर, 07 दिसम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को रिवायत हॉल में ”100 वर्ष की यात्रा और भविष्य की दिशा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा, राष्ट्र निर्माण में युवा सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया और बताया कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों ने विदेशी आक्रमणकारियों का डटकर सामना किया और हमारी सभ्यता एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा। उन्होंने बीते 100 वर्षों में समाज के लिए संघ स्वयंसेवकों द्वारा किए गए निःस्वार्थ सेवाकार्यों और योगदान पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि पिछले एक शताब्दी से संघ ने दैनिक शाखाओं, सेवा गतिविधियों, शैक्षणिक पहलों एवं सामाजिक सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से मूल स्तर पर राष्ट्र निर्माण का कार्य सतत् किया है। संघ का मूल उद्देश्य एक सशक्त, आत्मविश्वासी, सांस्कृतिक रूप से दृढ़ एवं एकजुट भारत का निर्माण रहा है। स्वयंसेवकों ने अनुशासन, चरित्र-निर्माण और निःस्वार्थ सेवा के आदर्श पर चलते हुए राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भविष्य की दिशा पर बात करते हुए उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा पर विशेष बल दिया, उन्होंने इसे भविष्य के सशक्त भारत का आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने, परिवार को राष्ट्र विकास की मूल इकाई के रूप में सुदृढ़ करने, पर्यावरण संरक्षण को जीवन-शैली का हिस्सा बनाने, स्वदेशी आधारित आत्मनिर्भरता के माध्यम से आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने पर केंद्रित है। उन्होंने आग्रह किया कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष को राष्ट्र सेवा की गौरवशाली यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र उन्नति के लिए अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।

उन्होंने युवा एकत्रीकरण में बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा नशीली दवाओं एवं अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यदि युवा सही दिशा का चयन करें तो राष्ट्र विकास के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है। युवा अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग और जागरूक रहें तथा समाज हित में आगे आएं।

उन्होंने पंच परिवर्तन के संदेश को स्थानीय बैठकों और चर्चाओं के माध्यम से हर घर तक पहुंचाने पर बल दिया। नशा, जबरन धर्मांतरण एवं अन्य सामाजिक विकृतियां आज बड़ी चुनौतियां हैं और इनसे निपटने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सकारात्मक परिवर्तन के अग्रदूत बनें, सामाजिक समरसता को मजबूत करें और भारत को उसके उज्ज्वल तथा गौरवमयी भविष्य की ओर अग्रसर करें।

रूस के राष्ट्रपति की भारत की राजकीय यात्रा के परिणाम

मझौता ज्ञापन और समझौते

प्रवासन और गतिशीलता:

एक देश के नागरिकों के दूसरे देश के क्षेत्र में अस्थायी श्रम गतिविधि पर भारत सरकार और रूस की सरकार के बीच समझौता।  

भारत सरकार और रूस की सरकार के बीच अनियमित प्रवासन से निपटने में सहयोग पर समझौता।

स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा:

स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच समझौता।

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और रूस की सरकार की उपभोक्ता अधिकार संरक्षण एवं मानव कल्याण पर निगरानी की संघीय सेवा के बीच समझौता।

समुद्री सहयोग और ध्रुवीय जलक्षेत्र:

ध्रुवीय जलक्षेत्र में संचालित जहाजों के लिए विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर भारत सरकार के पत्‍तन, पोत परिवाहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा रूस की सरकार के परिवहन मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन।

भारत सरकार के पत्‍तन, पोत परिवाहन और जलमार्ग मंत्रालय और रूस के समुद्री बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन।

उर्वरक:

मेसर्स जेएससी यूरालकेम और मेसर्स राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड तथा नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और इंडियन पोटाश लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन।

सीमा शुल्क एवं वाणिज्य:

भारत और रूस के बीच माल और वाहनों के संबंध में आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान में सहयोग के लिए भारत सरकार के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड तथा रूस की संघीय सीमा शुल्क सेवा के बीच प्रोटोकॉल।

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग और जेएससी “रूसी पोस्ट” के बीच द्विपक्षीय समझौता।

शैक्षणिक सहयोग:

पुणे स्थित रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान  और रूस के फेडल स्‍टेट ऑटोनोमस उच्च शिक्षा संस्थान “नेशनल टॉम्स्क स्‍टेट यूर्निवसिटी”, टॉम्स्क के बीच वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन।

मुंबई विश्वविद्यालय, लोमोनोसोव मॉस्को स्‍टेट विश्वविद्यालय और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष की संयुक्त-स्टॉक कंपनी प्रबंधन कंपनी के बीच सहयोग संबंधी समझौता।

मीडिया सहयोग:

प्रसार भारती, भारत और संयुक्त स्टॉक कंपनी गज़प्रोम-मीडिया होल्डिंग, रूस संघ के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता हेतु समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और रूस के नेशनल मीडिया ग्रुप के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता के लिए हेतु समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और द बिग एशिया मीडिया ग्रुप के बीच प्रसारण पर सहयोग और सहभागिता के लिए समझौता ज्ञापन।

भारत के प्रसार भारती और एएनओ “टीवी-नोवोस्ती” के बीच प्रसारण सहयोग और सहभागिता हेतु समझौता ज्ञापन का परिशिष्ट।

“टीवी ब्रिक्स” संयुक्त स्टॉक कंपनी और “प्रसार भारती” के बीच समझौता ज्ञापन।

घोषणाएँ

भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए 2030 तक का कार्यक्रम।

रूसी पक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) में शामिल होने के लिए फ्रेमवर्क समझौते को अपनाने का निर्णय लिया है।

नई दिल्‍ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी और मास्‍को स्थित ज़ारित्सिनो स्‍टेट ऐतिहासिक, वास्तुशिल्‍प, कला एवं भूदृश्य संग्रहालय-रिजर्व के बीच प्रदर्शनी “इंडिया: फैवरिक ऑफ टाइम” के लिए समझौता।

रूसी नागरिकों को पारस्परिक आधार पर 30 दिनों का निःशुल्क ई-पर्यटक वीज़ा प्रदान किया जाएगा।

रूसी नागरिकों को निःशुल्क समूह पर्यटक वीज़ा प्रदान किया जाएगा।

विश्व मनोरंजन: बदलती दुनिया का ग्लोबल एंटरटेनमेंट उद्योग

मनोरंजन (Entertainment) आज केवल समय बिताने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक उद्योग बन चुका है, जिसकी पहुँच तकनीक, संस्कृति और अर्थव्यवस्था—तीनों को प्रभावित करती है। फिल्में, संगीत, गेमिंग, स्पोर्ट्स, सोशल मीडिया, लाइव शो और डिजिटल कंटेंट—ये सब मिलकर आज World Entertainment Industry का आकार तय करते हैं।


1. मनोरंजन का वैश्विक स्वरूप

दुनिया भर में एंटरटेनमेंट अब स्थानीय सीमाओं में बंधा नहीं है।

  • कोरिया के K-Pop की धुनें भारत-अमेरिका तक छा जाती हैं,
  • हॉलीवुड की फिल्में दुनिया के हर देश में रिलीज़ होती हैं,
  • भारतीय OTT और संगीत विदेशों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

यह पूरा उद्योग ग्लोबल कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया की बदौलत लगातार बढ़ रहा है।


2. डिजिटल एंटरटेनमेंट का उभार

पिछले 10 वर्षों में डिजिटल मनोरंजन ने सबसे तेज़ विकास किया है।

🔹 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म:

  • Netflix, Amazon Prime, Disney+
  • YouTube, TikTok, Instagram
  • Spotify, Apple Music
  • Online Gaming: PUBG, Free Fire, Fortnite
  • eSports: लाइव गेमिंग प्रतियोगिताएँ

इनकी वजह से अब मनोरंजन “on demand” उपलब्ध है—यानी जब चाहें, जैसे चाहें।


3. फिल्म उद्योग का वैश्वीकरण

हॉलीवुड, बॉलीवुड, K-Cinema और एनीमेशन अब सर्वाधिक कमाई करने वाले क्षेत्र हैं।

  • Marvel, Avatar, Fast & Furious जैसी फिल्में वैश्विक ब्लॉकबस्टर बनती हैं।
  • भारतीय सिनेमा अब दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (KGF, RRR, Pushpa) की वजह से अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रहा है।
  • एनीमेशन फिल्में (Disney, Pixar, Anime) बच्चों और युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हैं।

4. संगीत उद्योग की क्रांति

संगीत का उपभोग अब रिकॉर्ड और CD से मोबाइल ऐप तक पहुँच चुका है।

  • Spotify, YouTube Music और JioSaavn ने दुनिया भर का संगीत सबके लिए उपलब्ध कर दिया है।
  • लोकल संगीत ग्लोबल हो रहा है—जैसे K-pop, African Beats, Punjabi Pop।

5. सोशल मीडिया: नया एंटरटेनमेंट पॉवरहाउस

Instagram Reels, YouTube Shorts और TikTok ने मनोरंजन का चरित्र पूरी तरह बदल दिया है।
अब हर व्यक्ति कंटेंट क्रिएटर बन सकता है।
इन्फ्लुएंसर्स, व्लॉगर्स और डिजिटल रचनाकार मनोरंजन का नया चेहरा बन चुके हैं।


6. गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स का उभार

गेमिंग अब एक इंडस्ट्री नहीं, बल्कि एक स्पोर्ट्स कैटेगरी बन चुकी है।

  • लाखों लोग लाइव गेम खेलते और देखते हैं।
  • ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में करोड़ों की प्राइज मनी होती है।
  • VR और Metaverse एंटरटेनमेंट का नया भविष्य हैं।

7. लाइव शो और इवेंट्स का महत्व

भले ही डिजिटल दुनिया बढ़ रही हो, लेकिन लाइव मनोरंजन का अपना अलग महत्व है—

  • कॉन्सर्ट
  • थिएटर
  • स्टैंड-अप कॉमेडी
  • स्पोर्ट्स टूर्नामेंट (FIFA, Olympics, IPL)

लाइव इवेंट्स लोगों को अनुभव और भावनाएँ प्रदान करते हैं, जो डिजिटल माध्यमों से संभव नहीं।


8. भविष्य: एंटरटेनमेंट कहाँ जा रहा है?

भविष्य का मनोरंजन तीन दिशाओं में आगे बढ़ रहा है:

🔮 1. AI आधारित मनोरंजन

फिल्में, संगीत, गेम—AI से और तेज़, और व्यक्तिगत होंगी।

🔮 2. Metaverse

एक ऐसी वर्चुअल दुनिया जहाँ लोग डिजिटल अवतार में फिल्में, गेम और इवेंट्स का अनुभव करेंगे।

🔮 3. इंटरएक्टिव कंटेंट

दर्शक कहानी में बदलाव कर सकेंगे, जैसे Netflix का “Black Mirror: Bandersnatch”।


🎬 निष्कर्ष

विश्व मनोरंजन आज एक तेज़ी से बदलते और तकनीक आधारित उद्योग में बदल चुका है। जहाँ पहले मनोरंजन केवल टीवी, रेडियो या थिएटर तक सीमित था, वहीं आज यह हर स्क्रीन—मोबाइल, लैपटॉप, VR हेडसेट—पर उपलब्ध है।
डिजिटल दुनिया की वजह से मनोरंजन अब स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक हो चुका है।

राष्ट्रपति ने वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण हेतु पुरस्कार प्रदान किए

दिव्यांगजनों का समावेश हमारी राष्ट्रीय विकास यात्रा का अभिन्न अंग है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजन समानता के हकदार हैं। समाज और देश की विकास यात्रा में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना सभी हितधारकों का कर्तव्य है, न कि कोई दान-पुण्य। दिव्यांगजनों की समान भागीदारी से ही किसी समाज को वास्तविक अर्थों में विकसित माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस -2025 का विषय, ‘सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाजों को बढ़ावा’ भी इसी प्रगतिशील विचार पर आधारित है।

राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि हमारा देश कल्याणकारी मानसिकता से आगे बढ़ते हुए, दिव्यांगजनों के लिए अधिकार-आधारित, सम्मान-केंद्रित व्यवस्था अपना रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का समावेश हमारी राष्ट्रीय विकास यात्रा का एक अभिन्न अंग है। 2015 से “दिव्यांगजन” शब्द के प्रयोग का निर्णय दिव्यांगजनों के प्रति विशेष सम्मान प्रदर्शित करने के लिए लिया गया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के समावेशन और सशक्तिकरण के लिए इको-सिस्‍टम को मजबूत कर रही है। उनके लिए सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास और खेल प्रशिक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित किए गए हैं। लाखों दिव्यांगजनों को विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें विशेष सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजनों के हितों के लिए सरकार के साथ-साथ समाज को भी जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए। इससे सरकार के प्रगतिशील प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की गरिमा, स्वावलंबन और आत्म-सम्मान सुनिश्चित करना सभी नागरिकों का दायित्व है। प्रत्येक नागरिक को सामाजिक और राष्ट्रीय प्रगति के अपने प्रयासों में दिव्यांगजनों को भागीदार बनाने का संकल्प लेना चाहिए।

कंठस्थ शुक्ल यजुर्वेद का दण्डक्रम पारायण

वाराणसी। एक ऐतिहासिक समारोह में 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिनी शाखा) के अत्यंत कठिन दण्डक्रम पारायण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सम्मानित किया गया। इस प्रकार की साधना पिछले तीन सौ वर्षों में केवल कुछ ही बार सम्पन्न हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी और जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विदुशेखर भारती महास्वामीजी के आशीर्वाद से भव्य शोभायात्रा और नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया गया। शोभायात्रा के दौरान काशी की सड़कों पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों की ताल और बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। मार्गभर पुष्पवृष्टि और पारंपरिक संगीत ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।

दक्षिणाम्नाय श्री शारदापीठ, शृंगेरी की ओर से देवव्रत को ₹5 लाख का बहुमूल्य स्वर्ण कंगन और ₹1,11,116 की सम्मान राशि दी गई।। यह सम्मान पीठ की ओर से डॉ. तंगीराल शिवकुमार शर्मा ने उभय जगद्गुरुओं के आशीर्वाद के साथ प्रदान किया।

दण्डक्रम पारायण वैदिक अध्ययन की सबसे कठिन विधियों में से एक मानी जाती है, जिसमें स्वरों, संधि-विच्छेद और विरोध-संधि की अत्यंत सूक्ष्म गणनाएँ शामिल होती हैं। इसे परंपरागत रूप से वेद मुकुट के रूप में भी जाना जाता है।

वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा के कंठस्थ दण्डक्रम पारायण को 50 दिन में पूर्ण करने वाले 19 वर्षीय बटु देवव्रत रेखे को अंगवस्त्रम, प्रतीक चिह्न नारिकेल देकर सम्मानित किया।

काशी में पहली बार देवव्रत रेखे ने 12 अक्तूबर 2025 से 29 नवम्बर 2025 के मध्य 50 दिन की अवधि में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण कि​या। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा संहिता में कुल 40 अध्याय एवं 2000 मंत्र है। लेकिन दण्डक्रम पारायण में मंत्रों की संख्या 25 लाख हो जाती है। यह दण्डक्रम पारायण काशी के सांगवेद विद्यालय रामघाट में पद्मश्री पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

देवव्रत रेखे की वैदिक शिक्षा उनके पिता घनपाठी महेश रेखे के निर्देशन में हुई है। इस तरह का शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनी की शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण 200 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में हुआ था। काशी में यह कंठस्थ दण्डक्रम पारायण पहली बार होने से विशेष है। महेश रेखे महाराष्ट्र के पुणे के समीप अहिल्यानगर के निवासी हैं।

वेद के दण्डक्रम पारायण पाठ श्रवण से अधिकाधिक फल की प्राप्ति का विधान है। देवव्रत रेखे की इस महनीय उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर प्रशंसा की।

उन्होंने एक्स पर लिखा –

19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है।

काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया।

गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने आज ही के दिन अर्जुन को गीता उपदेश देकर समस्त संसार को यह संदेश दिया कि बुराई चाहे कहीं से भी उपजे उसे खत्म करना ही हमारा धर्म और कर्तव्य है, फिर चाहे उस बुराई को करने वाले अपने ही क्यों ना हों।

आज गीता महोत्सव या गीता जयंती के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हम सबको स्मरण करवाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी हमें अपनों से भी लड़ना पड़ सकता है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण ने अर्जुन को धर्म-कर्म और मोक्ष का दिव्य ज्ञान दिया था। इसीलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कृष्ण एक ऐसा नाम है जो अखिल ब्रह्मांड में सभी देवी देवताओं को प्रिय है। कृष्ण अर्थात आकर्षण, जिसके नाम में ही आकर्षण हो, भला सारी सृष्टि उससे आकर्षित कैसे नहीं होगी?

वर्तमान परिवेश में भी भगवान कृष्ण की चर्चा सर्वदा सबसे ज्यादा होती है क्योंकि कृष्ण 16 कलाओं में निपुण हैं और कृष्ण ऐसी शक्ति हैं, जिन्हें गुरु भी माना जा सकता है और सखा भी। कृष्ण को जिसने जिस रूप में चाहा, वे उसे उसी रूप में दिखाई दिए। परंतु अटल सत्य तो यही है कि कृष्ण कण-कण में व्याप्त हैं और उनकी लीलाओं का वर्णन जिसने नहीं सुना, उसका जीवन अधूरा ही है। कृष्ण को बुद्धि के तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम के भाव से ही समझा व प्राप्त किया जा सकता है।

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं, इसलिए उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है।

कृष्ण ने धरती पर रहकर आम मनुष्य की तरह ही जीवन जिया। कृष्ण का बाल रूप जो तरह-तरह की लीलाओं से वर्णित रहा, उन्होंने लीलाधर बनकर लीलाएं रचीं, गोपाल बनकर ग्वाल बाल के संग माखन चुराया तो मनोहर बनकर गोपियों संग रास भी रचाया। कभी गुरु बनकर उपदेश दिया तो कभी सखा बनकर प्रेम का संदेश दिया, वंशीधर बनकर मुरली की धुन से सबका मन मोहा तो चक्रधारी के रूप में न्याय के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग भी किया। लोगों के हित के लिए रणछोड़ बने तो द्वारकाधीश बनकर राज्य भी संभाला।

देखा जाए तो अलग अलग समय पर उन्होंने अपने स्वरूप को भी समय अनुसार बदला। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसलिए समय के साथ-साथ परिवर्तन को भी हमें स्वीकार करना चाहिए।

राधा कृष्ण ने मिलकर विशुद्ध प्रेम की परिभाषा पूरे संसार को समझाई। उनके द्वारा दिए गए उपदेश भगवद्गीता में संकलित हैं, भगवद्गीता मनुष्य को अपने कर्तव्य और कर्म फल का बोध कराती है। गीता के पठन और श्रवण से प्रत्येक प्राणी जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

समस्त संसार को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करने वाला ग्रंथ भगवद्गीता प्रत्येक प्राणी के जीवन में हर प्रकार से सहायक है। दूसरों को दुख देना ही सबसे बड़ा पाप और सुख देना ही सबसे बड़ा सुख है, भूत भविष्य की चिंता छोड़कर हमें वर्तमान में जीना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।

यह दिन केवल पूजा अर्चना के लिए ही नहीं, अपितु श्री कृष्ण द्वारा दिए संदेश, शिक्षा को यदि हम अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लें और उस पर विचार करके चलें तो हमारा जीवन भी धन्य हो जाएगा। यही अपने आराध्य के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति होगी।

नई कंप्यूटर तकनीक 2025: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल दुनिया के बड़े बदलाव

तकनीक की दुनिया लगातार बदल रही है, लेकिन 2025 में कंप्यूटर तकनीक ने एक नई रफ़्तार पकड़ ली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और अल्ट्रा-फास्ट चिप्स—ये सभी मिलकर हमारे काम करने, सीखने और जीने के तरीके को बदल रहे हैं।
आइए जानते हैं इस साल की सबसे नई और महत्वपूर्ण कंप्यूटर तकनीकों के बारे में:


1. एआई-चालित कंप्यूटर (AI-Powered Computing)

2025 में कंप्यूटर अब सिर्फ मशीन नहीं बल्कि “सोचने वाले साथी” बन रहे हैं।

  • ये डेटा को खुद समझते हैं।
  • निर्णय लेने में मदद करते हैं।
  • आवाज़ और टेक्स्ट दोनों को आसानी से पहचानते हैं।
    AI-सक्षम कंप्यूटर अब शिक्षा, हेल्थकेयर, सुरक्षा और बिज़नेस—हर जगह उपयोग किए जा रहे हैं।

2. क्वांटम कंप्यूटिंग का उभार (Quantum Computing Rise)

क्वांटम कंप्यूटर अब प्रयोगशालाओं से निकलकर उद्योगों में प्रवेश कर रहे हैं।
ये पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना तेज़ प्रोसेसिंग कर सकते हैं।
इनका उपयोग—

  • नई दवाओं की खोज
  • मौसम पूर्वानुमान
  • साइबर सुरक्षा
  • जटिल गणना
    में तेजी से बढ़ रहा है।

3. एज कंप्यूटिंग (Edge Computing)

अब डेटा दूर सर्वर पर नहीं, बल्कि डिवाइस के पास ही प्रोसेस होता है।
इसके फायदे:

  • तेज़ स्पीड
  • कम लेटेंसी
  • उच्च सुरक्षा
    स्मार्ट शहर, ट्रैफिक सिस्टम और IoT डिवाइस में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

4. न्यूरोमॉर्फिक चिप्स (Neuromorphic Chips)

मानव मस्तिष्क जैसी क्षमता वाले कंप्यूटर चिप्स 2025 में चर्चा में हैं।
ये चिप्स—

  • ऊर्जा बचाते हैं
  • तेज़ी से सीखते हैं
  • AI को और शक्तिशाली बनाते हैं
    रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग वाहन में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

5. हाइब्रिड क्लाउड और मल्टी-क्लाउड तकनीक

कंपनियाँ अब एक ही क्लाउड पर निर्भर नहीं रहतीं।
हाइब्रिड और मल्टी-क्लाउड मॉडल—

  • डेटा सुरक्षा बढ़ाते हैं
  • लागत कम करते हैं
  • सेवाओं को स्केल करना आसान बनाते हैं।

6. साइबर सुरक्षा में एआई की भूमिका

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए 2025 में एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।
ये सिस्टम—

  • तुरंत खतरे को पहचानते हैं
  • स्वतः कार्रवाई करते हैं
  • डेटा को सुरक्षित रखते हैं

7. एक्सआर तकनीक (XR – AR/VR/MR)

वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी का विस्तार हो रहा है।
शिक्षा, गेमिंग, ट्रेनिंग और पर्यटन में XR नई दुनिया बना रहा है।


निष्कर्ष

2025 कंप्यूटर तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो रहा है।
AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और नई पीढ़ी के चिप्स—ये तकनीकें आने वाले वर्षों में मानव जीवन को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और तेज़ बनाने वाली हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

हमने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा के घेरे को मजबूत बनाया है, इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो 126 थी, वो घटकर 11 रह गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGsP/IGsP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है

अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा

पिछले 40 साल से देश के लिए नासूर बनें 3 हॉटस्पॉट नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे

हमने NIA, UAPA कानूनों को सुदृढ़ बनाने, तीन नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए हैं

तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक होगी

हमने PFI पर बैन लगाकर देशभर में उनके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण बनी

Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy इन तीन बिंदुओं पर काम करके हम कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं

हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है कि इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच भी जमीन न मिल पाए

अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस NCB के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट – नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर – की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक बन जाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद पर मोदी सरकार की कार्रवाई का जिक्र कहते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगाने के बाद देशभर में उसके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy के तीन बिंदुओं पर काम कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।

गृह मंत्री ने दोहराया कि हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है जिससे इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच जमीन भी न मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले।