गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने आज ही के दिन अर्जुन को गीता उपदेश देकर समस्त संसार को यह संदेश दिया कि बुराई चाहे कहीं से भी उपजे उसे खत्म करना ही हमारा धर्म और कर्तव्य है, फिर चाहे उस बुराई को करने वाले अपने ही क्यों ना हों।

आज गीता महोत्सव या गीता जयंती के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हम सबको स्मरण करवाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी हमें अपनों से भी लड़ना पड़ सकता है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण ने अर्जुन को धर्म-कर्म और मोक्ष का दिव्य ज्ञान दिया था। इसीलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कृष्ण एक ऐसा नाम है जो अखिल ब्रह्मांड में सभी देवी देवताओं को प्रिय है। कृष्ण अर्थात आकर्षण, जिसके नाम में ही आकर्षण हो, भला सारी सृष्टि उससे आकर्षित कैसे नहीं होगी?

वर्तमान परिवेश में भी भगवान कृष्ण की चर्चा सर्वदा सबसे ज्यादा होती है क्योंकि कृष्ण 16 कलाओं में निपुण हैं और कृष्ण ऐसी शक्ति हैं, जिन्हें गुरु भी माना जा सकता है और सखा भी। कृष्ण को जिसने जिस रूप में चाहा, वे उसे उसी रूप में दिखाई दिए। परंतु अटल सत्य तो यही है कि कृष्ण कण-कण में व्याप्त हैं और उनकी लीलाओं का वर्णन जिसने नहीं सुना, उसका जीवन अधूरा ही है। कृष्ण को बुद्धि के तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम के भाव से ही समझा व प्राप्त किया जा सकता है।

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं, इसलिए उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है।

कृष्ण ने धरती पर रहकर आम मनुष्य की तरह ही जीवन जिया। कृष्ण का बाल रूप जो तरह-तरह की लीलाओं से वर्णित रहा, उन्होंने लीलाधर बनकर लीलाएं रचीं, गोपाल बनकर ग्वाल बाल के संग माखन चुराया तो मनोहर बनकर गोपियों संग रास भी रचाया। कभी गुरु बनकर उपदेश दिया तो कभी सखा बनकर प्रेम का संदेश दिया, वंशीधर बनकर मुरली की धुन से सबका मन मोहा तो चक्रधारी के रूप में न्याय के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग भी किया। लोगों के हित के लिए रणछोड़ बने तो द्वारकाधीश बनकर राज्य भी संभाला।

देखा जाए तो अलग अलग समय पर उन्होंने अपने स्वरूप को भी समय अनुसार बदला। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसलिए समय के साथ-साथ परिवर्तन को भी हमें स्वीकार करना चाहिए।

राधा कृष्ण ने मिलकर विशुद्ध प्रेम की परिभाषा पूरे संसार को समझाई। उनके द्वारा दिए गए उपदेश भगवद्गीता में संकलित हैं, भगवद्गीता मनुष्य को अपने कर्तव्य और कर्म फल का बोध कराती है। गीता के पठन और श्रवण से प्रत्येक प्राणी जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

समस्त संसार को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करने वाला ग्रंथ भगवद्गीता प्रत्येक प्राणी के जीवन में हर प्रकार से सहायक है। दूसरों को दुख देना ही सबसे बड़ा पाप और सुख देना ही सबसे बड़ा सुख है, भूत भविष्य की चिंता छोड़कर हमें वर्तमान में जीना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।

यह दिन केवल पूजा अर्चना के लिए ही नहीं, अपितु श्री कृष्ण द्वारा दिए संदेश, शिक्षा को यदि हम अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लें और उस पर विचार करके चलें तो हमारा जीवन भी धन्य हो जाएगा। यही अपने आराध्य के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति होगी।

1967: यूएन मंच पर संगीत का महासंगम, पंडित रवि शंकर और येहूदी मेनुहिन की जुगलबन्दी

11 जून 2025 संस्कृति और शिक्षा

दिसम्बर 1967 में, संगीत की अलग-अलग परम्पराओं के दो महारथियों ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल में मंच को साझा किया. भारतीय सितार वादक पंडित रवि शंकर और ब्रिटिश-अमेरिकी वायलिन वादक येहूदी मेनुहिन ने जब विश्व नेताओं के समक्ष अपनी कला का प्रदर्शन किया, तो यूएन टीवी के कैम​रे ने उस ऐतिहासिक पल को रिकॉर्ड कर लिया. यह मात्र एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक विरासतों के बीच एक आत्मिक सम्वाद भी था, जहाँ सुरों के ज़रिए एकता, सम्मान और शान्ति का सन्देश दिया गया. (वीडियो)

ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान का कुबूलनामा, PM शहबाज ने माना भारत के हमले में नूरखान एयरबेस समेत कई ठिकाने हुए तबाह

नई दिल्‍ली. कश्‍मीर घाटी में धर्म पूछकर हिन्‍दू पर्यटकों का नरसंहार करने की घटना ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. आतंकियों की ओर से किए गए इस बर्बर हमले से पूरा देश उबल पड़ा. हर तरफ से बदला लेने की आवाज उठने लगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया था कि इस कायराना हरकत करने वाले और उनको बचाने वालों को मिट्टी में मिला दिया जाएगा. इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज को आतंकवादियों और दुश्‍मनों को जवाब देने की खुली छूट दे दी गई. इसके बाद भारतीय सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च किया. पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए उन्‍हें तबाह कर दिया. आतंकियों का आका पाकिस्‍तान इससे बौखला गया और भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करना शुरू कर दिया, जिन्‍हें बेअसर कर दिया गया. इसके बाद इंडिया ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्‍तान के 11 एयरबेस को तबाह कर दिया. इनमें नूर खान एयरबेस भी शामिल है, जिसके पास ही पाकिस्‍तान का न्‍यूक्लियर वेपन रखा गया है. इससे पाकिस्‍तान के पसीने छूट गया. भारत ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से स्‍ट्राइक करते हुए आतंकियों के आका को घुटनों पर ला दिया. अब ब्रह्मोस मिसाइल के इस्‍तेमाल पर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है.

क्‍या आपको पता है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्‍तानी सरजमीं पर कितनी ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें पटकीं? सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आई है. ब्रह्मोस मिसाइल की प्रचंडता को देखकर पाकिस्‍तान का मनोबल भरभरा कर गिर गया और वह सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा. भारत अपनी शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार हुआ. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत अभी तक पाकिस्‍तान पर 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी हैं. ब्रह्मोस मिसाइल की गिनती दुनिया के घातक मिसाइलों में होती है. पाकिस्‍तान ने इसके अचूक निशाने वाले प्रहार और प्रचंडता का अनुभव किया है. यही वजह है कि पड़ोसी देश दुनिया की शरण में चला गया और उनसे भारत को मनाने की गुहार लगाने लगा. इसके बाद भारत सीजफायर के लिए सहमत हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में स्‍पष्‍ट तौर पर कह दिया कि भारत में किसी भी तरह के आतंकी हमले अब एक्‍ट ऑफ वॉर (युद्ध की घोषणा) माना जाएगा.

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का दुनियाभर में डंका, पाकिस्‍तान पर प्रचंड प्रहार से बढ़ा रुतबा, 17 देश खरीदने को पागल

इसलिए खास है ब्रह्मोस मिसाइल

  1. सुपरसोनिक स्‍पीड: ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक 2.8 से मैक 3 (3430 किमी/घंटा तक) तक होती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज मिसाइलों में से एक बनाती है.
  2. मल्टी-प्लेटफॉर्म कैपेबिलिटी: ब्रह्मोस मिसाइल को थल (भूमि), जल (नौसेना) और वायु (वायुसेना) तीनों माध्यमों से दागा जा सकता है. इसे युद्धपोतों, पनडुब्बियों, ट्रकों और लड़ाकू विमानों (जैसे कि सुखोई-30MKI) से लॉन्च किया जा सकता है.
  3. हाई एक्‍यूरेसी: ब्रह्मोस की सटीकता बहुत अधिक है. इसकी CEP (Circular Error Probability) केवल 1 मीटर के आसपास है, यानी यह अपने लक्ष्य के लगभग बिल्कुल सटीक केंद्र पर वार करती है.
  4. वॉरहेड कैपेसिटी: ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 200 से 300 किलोग्राम तक का पारंपरिक (conventional) या सेमी आर्मर (semi-armor piercing) वॉरहेड ले जा सकती है.
  5. स्टील्थ तकनीक: इसमें लो-रेडार सिग्नेचर टेक्नोलॉजी है, जिससे यह दुश्मन की रडार निगरानी से बच निकलती है.
  6. आधुनिक गाइडेंस सिस्टम: ब्रह्मोस में अत्याधुनिक INS (Inertial Navigation System) और GPS/GLONASS गाइडिंग सिस्‍टम है, जो इसे चलते-फिरते लक्ष्यों पर भी हमला करने में सक्षम बनाती है.
  7. रेंज: पहले इसकी रेंज लगभग 290 किमी थी, लेकिन MTCR (Missile Technology Control Regime) में भारत की सदस्यता के बाद इसकी रेंज 450 किमी से बढ़ाकर अब 800 किमी तक की जा रही है.
  8. फायर एंड फॉरगेट सिस्‍टम: लॉन्च के बाद मिसाइल को नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती है. यह खुद ही लक्ष्य को खोजकर हमला करती है.

पाकिस्‍तान के 11 एयरबेस तबाह

बता दें कि भारत ने पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था, लेकिन पाकिस्‍तान ने इंडियन एयरबेस को टारगेट बनाना शुरू कर दिया. इसके बाद भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करनी शुरू कर दी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं गईं थीं. सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया गया था. IAF ने ब्रह्मोस और स्कैल्प मिसाइलें दागीं थीं. भारत ने पाकिस्तान पर 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी थीं. ऑपरेशन‍ सिंदूर के तहत इसे अंजाम दिया गया था.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

May 16, 2025, 12:59 IST

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भारत ने कितने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से पाकिस्तान में मचाई तबाही?

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