इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एससी/एसटी सर्टिफिकेट के गलत उपयोग की जांच के आदेश दिए

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को उन मामलों की जांच करने का निर्देश दिया है, जहां हिन्दू धर्म से दूसरे धर्म में धर्म बदलने वाले लोग गलत तरीके से अनुसूचित जाति या इसी तरह के कैटेगरी के सर्टिफिकेट का उपयोग कर रहे हैं।

जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने निर्देश दिया कि वे चार महीने के अंदर राज्य सरकार को कमियों के बारे में बताएं “ताकि संविधान के साथ ऐसा धोखा न हो”। न्यायालय ने केंद्रीय कैबिनेट सेक्रेटरी और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के “मामले को देखने” का आदेश दिया।

न्यायालय ने आदेश में कहा – “प्रिंसिपल सेक्रेटरी/एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, माइनॉरिटीज वेलफेयर डिपार्टमेंट, गवर्नमेंट ऑफ यूपी को भी मामले को देखने और सही कार्रवाई करने या अधिकारियों को निर्देश देने के लिए उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया जाता है ताकि कानून को सही मायने में लागू किया जा सके। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट को भी कानून के अनुसार काम करने का निर्देश दिया जाता है”।

न्यायाधीश ने कहा कि हिन्दू, सिक्ख या बौद्ध के अलावा किसी और कम्युनिटी से जुड़ा कोई भी व्यक्ति कॉन्स्टिट्यूशन (शेड्यूल्ड कास्ट) ऑर्डर, 1950 के तहत शेड्यूल्ड कास्ट का मेंबर नहीं माना जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसले में कहा था कि धर्म बदलने के बाद सिर्फ रिज़र्वेशन पाने के मकसद से जाति के आधार पर फायदे लेना “संविधान के साथ फ्रॉड” है।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक फैसले पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता है और इसलिए, धर्म बदलने पर शेड्यूल्ड कास्ट क्लासिफिकेशन का आधार खत्म हो जाता है।

इसके बाद न्यायालय ने पिटीशनर जितेंद्र साहनी के धर्म की जांच करने का निर्देश दिया। “इस बात को देखते हुए, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, महाराजगंज को निर्देश दिया जाता है कि वे आवेदक के धर्म से जुड़े मामले की तीन महीने के अंदर जांच करें और अगर वह जालसाजी का दोषी पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें ताकि भविष्य में इस न्यायालय में ऐसे एफिडेविट फाइल न किए जा सकें।”

यह केस इस आरोप पर दर्ज किया गया था कि उसने दूसरों को ईसाई धर्म में बदलने की कोशिश की और हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ गाली-गलौज वाले शब्दों का इस्तेमाल किया।

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसने अपनी जमीन पर जनता को जीसस क्राइस्ट के वचन सुनाने के लिए एक एप्लीकेशन देकर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, महाराजगंज से पहले से परमिशन ली थी। बाद में परमिशन वापस ले ली गई।

कंठस्थ शुक्ल यजुर्वेद का दण्डक्रम पारायण

वाराणसी। एक ऐतिहासिक समारोह में 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिनी शाखा) के अत्यंत कठिन दण्डक्रम पारायण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सम्मानित किया गया। इस प्रकार की साधना पिछले तीन सौ वर्षों में केवल कुछ ही बार सम्पन्न हुई है। जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी और जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विदुशेखर भारती महास्वामीजी के आशीर्वाद से भव्य शोभायात्रा और नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया गया। शोभायात्रा के दौरान काशी की सड़कों पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों की ताल और बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। मार्गभर पुष्पवृष्टि और पारंपरिक संगीत ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।

दक्षिणाम्नाय श्री शारदापीठ, शृंगेरी की ओर से देवव्रत को ₹5 लाख का बहुमूल्य स्वर्ण कंगन और ₹1,11,116 की सम्मान राशि दी गई।। यह सम्मान पीठ की ओर से डॉ. तंगीराल शिवकुमार शर्मा ने उभय जगद्गुरुओं के आशीर्वाद के साथ प्रदान किया।

दण्डक्रम पारायण वैदिक अध्ययन की सबसे कठिन विधियों में से एक मानी जाती है, जिसमें स्वरों, संधि-विच्छेद और विरोध-संधि की अत्यंत सूक्ष्म गणनाएँ शामिल होती हैं। इसे परंपरागत रूप से वेद मुकुट के रूप में भी जाना जाता है।

वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा के कंठस्थ दण्डक्रम पारायण को 50 दिन में पूर्ण करने वाले 19 वर्षीय बटु देवव्रत रेखे को अंगवस्त्रम, प्रतीक चिह्न नारिकेल देकर सम्मानित किया।

काशी में पहली बार देवव्रत रेखे ने 12 अक्तूबर 2025 से 29 नवम्बर 2025 के मध्य 50 दिन की अवधि में शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण कि​या। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनी शाखा संहिता में कुल 40 अध्याय एवं 2000 मंत्र है। लेकिन दण्डक्रम पारायण में मंत्रों की संख्या 25 लाख हो जाती है। यह दण्डक्रम पारायण काशी के सांगवेद विद्यालय रामघाट में पद्मश्री पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

देवव्रत रेखे की वैदिक शिक्षा उनके पिता घनपाठी महेश रेखे के निर्देशन में हुई है। इस तरह का शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनी की शाखा का कंठस्थ दण्डक्रम पारायण 200 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में हुआ था। काशी में यह कंठस्थ दण्डक्रम पारायण पहली बार होने से विशेष है। महेश रेखे महाराष्ट्र के पुणे के समीप अहिल्यानगर के निवासी हैं।

वेद के दण्डक्रम पारायण पाठ श्रवण से अधिकाधिक फल की प्राप्ति का विधान है। देवव्रत रेखे की इस महनीय उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर प्रशंसा की।

उन्होंने एक्स पर लिखा –

19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है।

काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया।

गीता जयंती / मोक्षदा एकादशी

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने आज ही के दिन अर्जुन को गीता उपदेश देकर समस्त संसार को यह संदेश दिया कि बुराई चाहे कहीं से भी उपजे उसे खत्म करना ही हमारा धर्म और कर्तव्य है, फिर चाहे उस बुराई को करने वाले अपने ही क्यों ना हों।

आज गीता महोत्सव या गीता जयंती के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हम सबको स्मरण करवाता है कि धर्म की स्थापना के लिए कभी-कभी हमें अपनों से भी लड़ना पड़ सकता है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण ने अर्जुन को धर्म-कर्म और मोक्ष का दिव्य ज्ञान दिया था। इसीलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कृष्ण एक ऐसा नाम है जो अखिल ब्रह्मांड में सभी देवी देवताओं को प्रिय है। कृष्ण अर्थात आकर्षण, जिसके नाम में ही आकर्षण हो, भला सारी सृष्टि उससे आकर्षित कैसे नहीं होगी?

वर्तमान परिवेश में भी भगवान कृष्ण की चर्चा सर्वदा सबसे ज्यादा होती है क्योंकि कृष्ण 16 कलाओं में निपुण हैं और कृष्ण ऐसी शक्ति हैं, जिन्हें गुरु भी माना जा सकता है और सखा भी। कृष्ण को जिसने जिस रूप में चाहा, वे उसे उसी रूप में दिखाई दिए। परंतु अटल सत्य तो यही है कि कृष्ण कण-कण में व्याप्त हैं और उनकी लीलाओं का वर्णन जिसने नहीं सुना, उसका जीवन अधूरा ही है। कृष्ण को बुद्धि के तर्क से नहीं, बल्कि प्रेम के भाव से ही समझा व प्राप्त किया जा सकता है।

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं, इसलिए उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है।

कृष्ण ने धरती पर रहकर आम मनुष्य की तरह ही जीवन जिया। कृष्ण का बाल रूप जो तरह-तरह की लीलाओं से वर्णित रहा, उन्होंने लीलाधर बनकर लीलाएं रचीं, गोपाल बनकर ग्वाल बाल के संग माखन चुराया तो मनोहर बनकर गोपियों संग रास भी रचाया। कभी गुरु बनकर उपदेश दिया तो कभी सखा बनकर प्रेम का संदेश दिया, वंशीधर बनकर मुरली की धुन से सबका मन मोहा तो चक्रधारी के रूप में न्याय के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग भी किया। लोगों के हित के लिए रणछोड़ बने तो द्वारकाधीश बनकर राज्य भी संभाला।

देखा जाए तो अलग अलग समय पर उन्होंने अपने स्वरूप को भी समय अनुसार बदला। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसलिए समय के साथ-साथ परिवर्तन को भी हमें स्वीकार करना चाहिए।

राधा कृष्ण ने मिलकर विशुद्ध प्रेम की परिभाषा पूरे संसार को समझाई। उनके द्वारा दिए गए उपदेश भगवद्गीता में संकलित हैं, भगवद्गीता मनुष्य को अपने कर्तव्य और कर्म फल का बोध कराती है। गीता के पठन और श्रवण से प्रत्येक प्राणी जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

समस्त संसार को जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करने वाला ग्रंथ भगवद्गीता प्रत्येक प्राणी के जीवन में हर प्रकार से सहायक है। दूसरों को दुख देना ही सबसे बड़ा पाप और सुख देना ही सबसे बड़ा सुख है, भूत भविष्य की चिंता छोड़कर हमें वर्तमान में जीना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।

यह दिन केवल पूजा अर्चना के लिए ही नहीं, अपितु श्री कृष्ण द्वारा दिए संदेश, शिक्षा को यदि हम अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लें और उस पर विचार करके चलें तो हमारा जीवन भी धन्य हो जाएगा। यही अपने आराध्य के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति होगी।

BSF Punjab Frontier 2025 की प्रमुख उपलब्धियाँ: ड्रोन से लेकर नशा तस्करी पर बड़ा प्रहार

जालंधर

1 दिसंबर 2025 | चंडीगढ़
बीएसएफ के 61वें स्थापना दिवस से पहले BSF Punjab Frontier 2025 की ऑपरेशनल रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट में ड्रोन गतिविधि, नशा तस्करी, हथियार बरामदगी और आंतरिक सुरक्षा में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों को सामने रखा गया।


ड्रोन चुनौती पर BSF की बड़ी कार्रवाई

इस वर्ष पाकिस्तान की ओर से बढ़ी ड्रोन गतिविधियाँ बीएसएफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती थीं। लेकिन BSF Punjab Frontier 2025 ने समय रहते कड़ी कार्रवाई की और 272 ड्रोन को मार गिराया या जब्त किया परिणामस्वरूप सीमा पार से होने वाली ड्रग और हथियार सप्लाई को रोका गया जिससे ड्रोन मूवमेंट पर विशेष निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई


नशा तस्करी पर निर्णायक प्रहार

बीएसएफ ने नशा तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई सफल अभियान चलाए। वर्ष 2025 में पकड़ी गई नशीली वस्तुओं की मात्रा:

  • हेरोइन – 367.788 किग्रा
  • आईस ड्रग – 19.033 किग्रा
  • अफीम – 14.437 किग्रा

इन बरामदगियों से पाकिस्तान आधारित नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ है।


हथियार तस्करी का भंडाफोड़

BSF Punjab Frontier 2025 ने सीमा पर हथियार भेजने की कोशिशों को विफल करते हुए:

  • 200 अवैध हथियार
  • 3625 लाइव राउंड
  • 265 मैगजीन

बरामद कीं। यह सीमा पार सक्रिय आतंकी व तस्करी गिरोहों के लिए बड़ा झटका है।


तस्करों और संदिग्धों पर बड़ी कार्रवाई

बीएसएफ ने विभिन्न ऑपरेशनों में अलग-अलग देशों के नागरिकों को गिरफ्तार किया:

  • 251 भारतीय तस्कर/संदिग्ध
  • 18 पाकिस्तानी नागरिक
  • 4 नेपाली नागरिक
  • 3 बांग्लादेशी नागरिक

इसके अतिरिक्त, सीमा पार घुसपैठ की कोशिश कर रहे 3 पाकिस्तानी नागरिकों को मार गिराया गया


आंतरिक सुरक्षा में BSF की महत्वपूर्ण भूमिका

सीमा सुरक्षा के साथ-साथ BSF Punjab Frontier 2025 ने देश की आंतरिक सुरक्षा में भी योगदान दिया:

अमरनाथ यात्रा सुरक्षा तैनाती

  • 22 कंपनियाँ कश्मीर घाटी में तैनात की गईं

कानून-व्यवस्था में तैनाती

  • हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न जिलों में तैनाती
  • प्रयागराज महाकुंभ 2025 की सुरक्षा में भी BSF की भूमिका

शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने में योगदान

BSF पंजाब फ्रंटियर की टुकड़ियाँ निम्न राज्यों में चुनाव ड्यूटी में तैनात रहीं:

  • बिहार
  • दिल्ली
  • गुजरात
  • पंजाब
  • जम्मू-कश्मीर
  • राजस्थान
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल

BSF सीमा संरचना और तैनाती आँकड़े

  • भारत–पाकिस्तान सीमा: 2289.66 किमी
  • एलओसी तैनाती: 772 किमी (237.2 किमी पर स्वतंत्र तैनाती)
  • भारत–बांग्लादेश सीमा: 4096.70 किमी
  • कुल सीमा सुरक्षा: 6386.36 किमी
  • पंजाब फ्रंटियर की सीमा: 533 किमी
  • कुल बटालियन: 19

2025 BSF पंजाब के लिए उपलब्धियों का वर्ष

ड्रोन रोधी कार्रवाई, नशा व हथियार तस्करी पर रोक, और आंतरिक सुरक्षा में योगदान—इन सभी उपलब्धियों से स्पष्ट है कि BSF Punjab Frontier 2025 भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।

नई कंप्यूटर तकनीक 2025: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल दुनिया के बड़े बदलाव

तकनीक की दुनिया लगातार बदल रही है, लेकिन 2025 में कंप्यूटर तकनीक ने एक नई रफ़्तार पकड़ ली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और अल्ट्रा-फास्ट चिप्स—ये सभी मिलकर हमारे काम करने, सीखने और जीने के तरीके को बदल रहे हैं।
आइए जानते हैं इस साल की सबसे नई और महत्वपूर्ण कंप्यूटर तकनीकों के बारे में:


1. एआई-चालित कंप्यूटर (AI-Powered Computing)

2025 में कंप्यूटर अब सिर्फ मशीन नहीं बल्कि “सोचने वाले साथी” बन रहे हैं।

  • ये डेटा को खुद समझते हैं।
  • निर्णय लेने में मदद करते हैं।
  • आवाज़ और टेक्स्ट दोनों को आसानी से पहचानते हैं।
    AI-सक्षम कंप्यूटर अब शिक्षा, हेल्थकेयर, सुरक्षा और बिज़नेस—हर जगह उपयोग किए जा रहे हैं।

2. क्वांटम कंप्यूटिंग का उभार (Quantum Computing Rise)

क्वांटम कंप्यूटर अब प्रयोगशालाओं से निकलकर उद्योगों में प्रवेश कर रहे हैं।
ये पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना तेज़ प्रोसेसिंग कर सकते हैं।
इनका उपयोग—

  • नई दवाओं की खोज
  • मौसम पूर्वानुमान
  • साइबर सुरक्षा
  • जटिल गणना
    में तेजी से बढ़ रहा है।

3. एज कंप्यूटिंग (Edge Computing)

अब डेटा दूर सर्वर पर नहीं, बल्कि डिवाइस के पास ही प्रोसेस होता है।
इसके फायदे:

  • तेज़ स्पीड
  • कम लेटेंसी
  • उच्च सुरक्षा
    स्मार्ट शहर, ट्रैफिक सिस्टम और IoT डिवाइस में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

4. न्यूरोमॉर्फिक चिप्स (Neuromorphic Chips)

मानव मस्तिष्क जैसी क्षमता वाले कंप्यूटर चिप्स 2025 में चर्चा में हैं।
ये चिप्स—

  • ऊर्जा बचाते हैं
  • तेज़ी से सीखते हैं
  • AI को और शक्तिशाली बनाते हैं
    रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग वाहन में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

5. हाइब्रिड क्लाउड और मल्टी-क्लाउड तकनीक

कंपनियाँ अब एक ही क्लाउड पर निर्भर नहीं रहतीं।
हाइब्रिड और मल्टी-क्लाउड मॉडल—

  • डेटा सुरक्षा बढ़ाते हैं
  • लागत कम करते हैं
  • सेवाओं को स्केल करना आसान बनाते हैं।

6. साइबर सुरक्षा में एआई की भूमिका

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए 2025 में एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।
ये सिस्टम—

  • तुरंत खतरे को पहचानते हैं
  • स्वतः कार्रवाई करते हैं
  • डेटा को सुरक्षित रखते हैं

7. एक्सआर तकनीक (XR – AR/VR/MR)

वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी का विस्तार हो रहा है।
शिक्षा, गेमिंग, ट्रेनिंग और पर्यटन में XR नई दुनिया बना रहा है।


निष्कर्ष

2025 कंप्यूटर तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो रहा है।
AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, एज कंप्यूटिंग और नई पीढ़ी के चिप्स—ये तकनीकें आने वाले वर्षों में मानव जीवन को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और तेज़ बनाने वाली हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

हमने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा के घेरे को मजबूत बनाया है, इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो 126 थी, वो घटकर 11 रह गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGsP/IGsP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है

अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा

पिछले 40 साल से देश के लिए नासूर बनें 3 हॉटस्पॉट नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे

हमने NIA, UAPA कानूनों को सुदृढ़ बनाने, तीन नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए हैं

तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक होगी

हमने PFI पर बैन लगाकर देशभर में उनके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण बनी

Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy इन तीन बिंदुओं पर काम करके हम कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं

हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है कि इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच भी जमीन न मिल पाए

अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस NCB के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट – नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर – की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक बन जाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद पर मोदी सरकार की कार्रवाई का जिक्र कहते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगाने के बाद देशभर में उसके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy के तीन बिंदुओं पर काम कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।

गृह मंत्री ने दोहराया कि हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है जिससे इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच जमीन भी न मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले।

मणिकर्णिका संगोष्ठी: महिला सशक्तिकरण और रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा

सांगानेर, 28 नवम्बर।

सांगानेर में आयोजित मणिकर्णिका संगोष्ठी में महिला सशक्तिकरण, रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य, राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका और भारतीय संस्कृति पर सार्थक विमर्श।

एस.एस. जैन सुबोध महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सांगानेर एवं संस्कृता महिला विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में “मणिकर्णिका—संगोष्ठी” का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, तथा भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना था।


कार्यक्रम का शुभारंभ: दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण

संगोष्ठी की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ

  • राष्ट्र सेविका समिति, सांगानेर महानगर की शारीरिक प्रमुख सौम्या पांडेय ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
  • प्राचार्या डॉ. यदु शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
  • लक्ष्मी बघेल ने प्रेरक एकल गीत प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी की प्रस्तावना: भारतीय नारी की मूलभूत शक्ति

संयोजिका डॉ. शिप्रा पारीक ने संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए नारी की

  • स्वबोध जागरण
  • समाज में उसकी मूलभूत भूमिका
  • आत्मशक्ति
    पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता का उद्बोधन: रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वी. शांता कुमारी जी ने “मणिकर्णिका” विषय पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि—

  • नारी में इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति, और कर्तव्य शक्ति जन्म से निहित हैं।
  • रानी लक्ष्मीबाई का अनुशासन, मातृत्व और शौर्य आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • शिक्षा, चिकित्सा, सेवा और अध्ययन—इन सभी क्षेत्रों में कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण अत्यंत आवश्यक है।

छात्राओं की प्रस्तुति: रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य

महाविद्यालय की छात्राओं ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की।
यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए रानी के साहस और बलिदान का सजीव अनुभव बन गई।


महिला सशक्तिकरण पर विशेष चर्चा

मेधा नरुका जी ने महिलाओं की

  • आत्मशक्ति
  • समाज निर्माण में निर्णायक भूमिका
  • राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

अध्यक्षीय संबोधन: विकसित भारत 2047 का संकल्प

पूर्व महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि—

  • शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
  • छात्राओं को चरित्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम संचालन और समापन

कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” के साथ हुआ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना शर्मा और डॉ. दीक्षिता अजवानी ने किया।

सांगानेर विभाग की कार्यवाहिका गीतांजलि पारीक ने आभार व्यक्त किया।

ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए ऑटोनॉमस बॉडी की आवश्यकता – सर्वोच्च न्यायालय

ई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने की आवश्यकता दोहराई, और कहा कि यह तय करने के लिए एक ऑटोनॉमस बॉडी की ज़रूरत है कि क्या अलाउड किया जा सकता है और क्या नहीं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि “खुद को बताने वाली” बॉडी इस सिचुएशन को संभालने के लिए काफी नहीं होगी और रेगुलेटरी उपाय के तौर पर किसी ऐसी रेगुलेटरी बॉडी की ज़रूरत है, जो बाहरी प्रभाव से मुक्त हो।

न्यायालय ने पूछा, “कुछ समय के लिए यह तय करने के लिए सिर्फ़ एक ऑटोनॉमस बॉडी की ज़रूरत है कि कुछ अलाउड किया जा सकता है या नहीं…अगर अलाउड है तो ठीक है। अगर सब कुछ अलाउड हो गया तो क्या होगा?”

सर्वोच्च न्यायालय ने साफ़ किया कि फंडामेंटल राइट्स को बैलेंस करना होगा और वह “किसी ऐसी चीज़ को मंज़ूरी नहीं देगा जो किसी का मुंह बंद कर सके”। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि “अगर आप सब कोई उपाय लेकर आते हैं तो हम रेगुलेटरी उपाय का सुझाव देने वाले आखिरी व्यक्ति होंगे। आप सब कहते हैं कि यह और वह एसोसिएशन है…तो फिर ऐसे मामले क्यों हो रहे हैं?”

न्यायालय कॉमेडियन और पॉडकास्टर से जुड़ी पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जो अपने ऑनलाइन बर्ताव की वजह से मुश्किल में पड़ गए। न्यायालय ने किसी को नीचा दिखाने वाले कंटेंट, खासकर दिव्यांग लोगों को नीचा दिखाने वाले कंटेंट से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने की भी बात कही।

मुख्यन्यायधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक चेतावनी दिखाने की ज़रूरत है, जिसमें कहा गया कि ऐसा कंटेंट आम दर्शकों के लिए सही नहीं हो सकता है।

जस्टिस बागची ने कहा, “अश्लीलता किताब, पेंटिंग वगैरह में हो सकती है। अगर कोई नीलामी होती है… तो उस पर भी रोक हो सकती है। जैसे ही आप फोन ऑन करते हैं और कुछ ऐसा आता है जो आप नहीं चाहते या आप पर ज़बरदस्ती थोपा जाता है, तो क्या होगा?”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वैसे तो आमतौर पर वॉर्निंग होती है, लेकिन एक एक्स्ट्रा उपाय के तौर पर उम्र का वेरिफिकेशन किया जा सकता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “देखिए, दिक्कत यह है कि वॉर्निंग दी जाती है और शो शुरू हो जाता है। लेकिन जब तक आप न देखने का फैसला करते हैं, तब तक यह शुरू हो जाता है। वॉर्निंग कुछ सेकंड के लिए हो सकती है…फिर शायद आपका आधार कार्ड वगैरह मांगा जाए। ताकि आपकी उम्र वेरिफाई हो सके और फिर प्रोग्राम शुरू हो। बेशक, ये सिर्फ उदाहरण के लिए सुझाव हैं…अलग-अलग एक्सपर्ट्स का कॉम्बिनेशन…ज्यूडिशियरी और मीडिया से भी कोई हो सकती है…कुछ पायलट बेसिस पर आने दें और अगर यह बोलने और बोलने की आज़ादी में रुकावट डालता है, तो उस पर तब गौर किया जा सकता है। हमें एक ज़िम्मेदार समाज बनाने की ज़रूरत है और एक बार ऐसा हो जाने पर, ज़्यादातर समस्याएं हल हो जाएंगी।”

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “आप SC/ST एक्ट की तरह ही एक बहुत कड़े कानून के बारे में क्यों नहीं सोचते…जहां उन्हें नीचा दिखाने पर सज़ा हो। उसी तरह।”

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि यूज़र-जनरेटेड कंटेंट के संबंध में उपायों की ज़रूरत है, क्योंकि कोई व्यक्ति बोलने की आज़ादी की आड़ में “सब कुछ और कुछ भी” नहीं कर सकता।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा “यह अजीब है कि मैं अपना चैनल बनाता हूं और बिना किसी जवाबदेही के काम करता रहता हूं। हां, बोलने की आज़ादी की रक्षा होनी चाहिए…मान लीजिए कि एडल्ट कंटेंट वाला कोई प्रोग्राम है…पैरेंटल कंट्रोल से पहले से चेतावनी दी जा सकती है।”

जस्टिस बागची ने “एंटी-नेशनल” कंटेंट पर भी चिंता जताई और सवाल किया कि क्या इससे निपटने के लिए सेल्फ-रेगुलेशन काफी होगा।

“जब कंटेंट एंटी-नेशनल हो या समाज के ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला हो… तो क्या सेल्फ-रेगुलेशन काफी होगा? कानूनी आधार क्या है? रेगुलेशन ऐसी चीज़ से आया है, जिसे चुनौती दी जा रही है। वे रेगुलेशन इंटरमीडियरी को भी कवर करते हैं। मुश्किल रिस्पॉन्स टाइम की है और जब तक सरकार जवाब देती है, तब तक चीज़ें अरबों व्यूज़ के साथ वायरल हो चुकी होती हैं।”

जस्टिस बागची ने कहा,

“हम फ्री स्पीच को रेगुलेटेड अधिकार के हिसाब से देखते हैं। बेशक, कोई सरकारी अथॉरिटी यह तय नहीं कर सकती कि कोई पब्लिकेशन एंटी-नेशनल है या नहीं। लेकिन अगर यह अपने आप में ऐसा है जो देश की एकता, अखंडता और सॉवरेनिटी पर असर डालता है…”

लालकिला ब्लास्ट मामले में आतंकी उमर नबी का सहयोगी सोयब फरीदाबाद से गिरफ्तार

नई दिल्ली/फरीदाबाद।

लालकिला के समीप बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सुसाइड हमलावर आतंकी डॉ. उमर नबी के नजदीकी सहयोगी सोयब को फरीदाबाद के गांव धौज से गिरफ्तार किया है। इस मामले में यह 7वीं गिरफ्तारी है।

सोयब हरियाणा के अल-फलह विश्वविद्यालय में वार्ड बॉय के रूप में कार्यरत था। उस पर आरोप है कि उसने उमर नबी को विस्फोटक सामग्री लाने और ले जाने में सहायता की और नूंह में अपनी साली अफसाना के घर में उसके लिए कमरा किराए पर दिलवाया। धमाके से पहले उमर नबी 10 दिन तक वहीं ठहरा था।

आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल शकील की निशानदेही के बाद अब एनआईए डॉ. आदिल अहमद और डॉ. शाहीन सईद को अल-फलह विश्वविद्यालय में लेकर जाएगी। जांच में सामने आया है कि आदिल और उमर नबी कई वर्षों से परिचित थे। आदिल कई बार उमर से मिलने के लिए विश्वविद्यालय आया और उसके छात्रावास स्थित फ्लैट में ठहरा। इसी दौरान उसकी पहचान मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद से कराई गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फतेहपुरा तगा और धौज गांव में विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करने की योजना आदिल ने ही सुझाई थी। उमर नबी और आदिल दोनों अनंतनाग के सरकारी अस्पताल में कार्यरत थे। बाद में आदिल सहारनपुर और उमर अल-फलह विश्वविद्यालय में तैनात हुए, लेकिन दोनों का संपर्क बना रहा।

जांच में पता चला है कि डॉ. शाहीन सईद आतंकी मॉड्यूल की महत्वपूर्ण सदस्य थी। वह विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति में तीसरे स्थान पर थी और नए लोगों को नेटवर्क में जोड़ने तथा मानसिक रूप से प्रभावित करने का काम करती थी।

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज…

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज…

आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण, महंत श्रीसिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास

सत्यनिष्ठा से युक्त प्रतिभाएं पूर्ण होती हैं। सदुद्देश्य से किए उचित प्रयत्न विफल नहीं होते। पुण्यों का फल मनुष्य को प्राप्तव्य की प्राप्ति करा ही देता है। श्री राम जन्मभूमि मन्दिर पर ध्वजारोहण सनातन की इसी विश्वास-परंपरा का मानो पुण्य पर्व है। शताब्दियों का अनुताप तथा पीढ़ियों का सन्ताप दूर हुआ है। भारतीय जन के मन में बसा मन्दिर अब अयोध्या धाम की पावन भूमि पर प्रत्यक्ष है। इसके निर्माण और उससे जुड़े प्रश्नों तथा आक्षेपों का समाधान हो गया है। पूर्णता को प्राप्त हुए भव्य मन्दिर पर कोविदार ध्वज शोभा भुवनमोहिनी होगी। भारतीय परंपरा में ध्वज अस्मिता और प्रतिज्ञा के व्यन्जक होते हैं।

इनके माध्यम से ध्वजी अर्थात ध्वज धारण करने वाले का स्वरूप व्यक्त होता है। देवताओं के संबंध में प्रायः उनके वाहनों को ही उनके ध्वज-चिह्न के रूप में देखा जाता है। जैसे भगवान शिव का वाहन वृषभ है और वे वृषध्वज कहलाते हैं, इसी प्रकार कुमार कार्तिकेय का वाहन मयूर है और वे मयूरध्वज कहलाते हैं। ध्वज-चिह्नों में, जिसका ध्वज होता ,है उसके स्वभाव-स्वरूप के संकेत निहित होते हैं।

प्रायः विश्व भर में सभी राष्ट्रों के अपने ध्वज हैं और उनकी अपनी व्याख्याएं भी हैं। ध्वज के प्रकार, उनमें विद्यमान चिह्न एवं रंग आदि के भी महत्वपूर्ण सन्दर्भ होते हैं।

यह ध्वज रघुवंश का है, यह ध्वज रामराज्य का है और यह ध्वज भगवान् श्रीराम का है। सम्पूर्ण पहचान है। प्रभु श्रीराम बाल्यकाल से इस रथ में शोभित होते रहे हैं, इसलिए सहज ही उनके रथ को कोविदार ध्वज कहा जाता है…

शैशवे रघुनाथस्तु सवपितृस्यन्दनस्थितः।

अतः सोप्यस्य रामस्य कोविदारध्वजः स्मृतः॥

जैसे कोविदार पृथ्वी का भेदन करके उत्पन्न होने के गुण से अपना नाम प्राप्त करता हैं, वैसे ही सूर्य अपनी जीवनदायिनी किरणों के बल से धरती के गर्भ से सुप्त बीजों को अंकुरित कर देता है। यह सादृश्य कोविदार को सूर्यवंश की ध्वजा में अर्थवान् बनाता है। पवित्र वृक्षों की श्रेणी में कोविदार को कल्पवृक्ष के समान कहा गया है –

“मन्दारः कोविदारश्च पारिजातश्च नामभिः।

स वृक्षो ज्ञायते दिव्यो यस्यैतत् कुसुर्मात्तमम्।”

श्री राम जन्मभूमि मन्दिर पर कोविदार ध्वज में सूर्य एवं प्रणव भी दृश्य हैं। इस दृष्टि से विचार करने पर भगवान् श्रीराम का लोकोत्तर चरित्र हमारे सामने आता है। श्रीराम की चरित्रगत व्याप्ति एवं महानता को कोई एक चिह्न व्यक्त कर सकता है, ऐसा कहना कठिन है। उनके विराट् व्यक्तित्व एवं उनकी प्रभुता को व्यक्त करने वाले उनके ध्वज भी चार प्रकार के कहे गए हैं। आनन्द रामायण में इसकी सुंदर चर्चा करते हुए भगवान् श्रीरामभद्र के चार ध्वजों का वर्णन प्राप्त होता है। श्री रघुनंदन के रथ चार प्रकार के हैं, तदनुरूप उनके ध्वज भी चार हैं…..

चतुर्षु स्यन्दनेष्वेवं चत्वारः कीर्त्तिताः ध्वजाः।