सहकार भारती के तत्वाधान में बुनकर प्रकोष्ठ का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन,
समापन सत्र में राज्यपाल रामेन डेका और कृषि मंत्री रामविचार नेताम हुए शामिल,
अधिवेशन में 14 प्रस्ताव पारित हुए,
अधिवेशन में 17 राज्यों के 650 बुनकर प्रतिनिधि शामिल हुए।
रायपुर 24 अगस्त 202. सहकार भारती के तत्वाधान में राजधानी में चल रहे बुनकर प्रकोष्ठ का राष्ट्रिय अधिवेशन भव्यता के साथ सम्प्पन हुआ। अधिवेशन में देशभर से आये बुनकर प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओ और सरकारी योजनाओ को लेकर चर्चा किया। अधिवेशन का उद्देश्य हथकरघा और हस्तशिल्प में बढ़ते मशीनो के उपयोग, घटते बुनकरो की संख्या, सरकारी अनुदान में कमी सहित अनेक विषयो पर चर्चाये हुई। अधिवेशन में केरल, महाराष्ट्र, बिहार मध्यप्रदेश, आसाम, पक्षिम बंगाल, सहित कुल 17 राज्यों के प्रतिधि शामिल हुए। अधिवेशन के दूसरे दिन बुनकरों ने 13 मांगो का प्रस्ताव पारित किया जिसे भारत सरकार को भेजा जायेगा। प्रस्ताव को बुनकर प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अनंत मिश्रा ने रखा जिसे देशभर से आये बुनकर प्रतिनिधियों ने दोनों हाथ उठाकर समर्थन दिया।


नक्सलगढ़ की छवि अब सुधरेगी-
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम ने छत्तीसगढ़ शांति का टापू है, यह बाबा गुरुघासीदास, बिरसामुंडा की धरती है। साल 2000 में छत्तीसगढ़ का उदय हुआ तो प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इसे विकसित राज्य बनाने की कोशिश की, जिसका परिणाम है समकालीन राज्यों में छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित हो रहा है। छत्तीसगढ़ को दूर से देखने वाले नक्सलगढ़ समझते है, पर यह शांति का टापू है। जल्द ही नक्सल समस्या का संधान भी हो जायेगा।
छत्तीसगढ़ में बुनकरों की स्थिति बेहद अच्छी नहीं है, आजा भी हमारे द्वारा उपयोग किये जाने वाला राजकीय गमछा मशीनों से बना होता है, जबकि उसे हथकरघा से बना होना चाहिए। हमें अच्छी क्वालिटी के उत्पाद तैयार करने जरूरत है।
राज्यपाल बोले- मै स्वयं बुनकरों के गाँव से आता हूँ।
समापन सत्र में राज्यपाल डॉ रमेन डेका ने आयोजन के लिए सहकर भारती और बुनकर प्रकोष्ट को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा आयोजन निश्चित रूप से बुनकरों के जीवन में आमूल चूल परिवर्तन लाने वाला है। मेरे गाँव में बुनकरों की संख्या अधिक है, जिसके चलते उसे बुनकरों का गाँव कहा जाता है। भारत एक बड़े बाजार में रूप में उभरा है ऐसे में यहाँ बुनकर समितियों और पावरलूम में व्यापक संभावनाएं है। छत्तीसग़ढ का कोसा देशभर में प्रसिद्ध है उसे और बढ़ाने की जरुरत है, उन्होंने अमूल और लिज्जत पापड़ का उदारः देते हुए उनके जैसे काम करने की नसीहत दी। आसाम से आये बुनकर प्रतिनिधियों का राजभवन में अतिथि सत्कार किया गया।

बुनकरों के हित में 13 प्रस्ताव पारित हुए
दो दिवसीय अधिवेशन में देशभर से आये बुनकरों से चर्चा और मंथन उपरांत उनकी समस्याओ के निराकरण हेतु 13 प्रस्ताव पारित हुए जिसे भारत सरकार को भेजा जायेगा। सहकर भारती के राष्ट्रीय महामंत्री दीपक पाचपोर ने प्रस्तावों के संबंध में बताया कि बुनकरों के कल्याण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र बुनकर कल्याण बोर्ड का गठन किया जाये जहां सरकारी योजनाओ की निगरानी और शिकायतों का समाधान हो। हथकरघा क्लस्टर और कॉमन फसलेटी सेंटर का गठन, हथकरघा वस्त्रो के निर्माण में लगने वाले जीएसटी को माफ़ करते हुए जीएसटी मुक्त किया जाये। राष्ट्रीय हथकरघा निति बनाने की मांग, बुनकरों के लिए पर्यटन सहित 13 प्रस्ताव पारित किया गया।
राष्ट्रीय बुनकर प्रकोष्ठ का पुनर्गठन-
सहकर भारती के राष्टीय अध्यक्ष उदय जोशी ने राष्ट्रीय बुनकर प्रकोष्ठ का पुनर्गठन किया, जिसमे अनंत मिश्रा को संयोजक बनाते हुए आसाम गुजरात महाराष्ट्र, उड़ीसा छत्तीसगढ़ के बुनकरों को सदस्य बनाने की घोषणा की।
कार्यक्रम में सहकर भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय जोशी, राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया, संगठन मंत्री श्री पाचपोर, राष्ट्रीय संयोजक अनंत मिश्रा, आरबीआई के निदेशक सतीश मराठे, छत्तीसगढ़ सहकर भारती महामंत्री कनीराम जी, कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्र पाटनी सहित कार्यक्रम से जुड़े सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
