
Month: December 2025
सांसद खेल महोत्सव– ‘फिट युवा, विकसित भारत’ का भव्य समापन : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह
खिलाड़ियों के सपनों को पंख देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री श्री साय
सांसद खेल महोत्सव– ‘फिट युवा, विकसित भारत’ का समापन समारोह आज पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय खेल एवं युवा कार्य मंत्री श्री मनसुख मांडविया तथा देशभर के सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और समापन समारोह को वर्चुअल रूप से संबोधित किया। ऑडिटोरियम में उपस्थित जनसमूह ने प्रधानमंत्री के प्रेरक उद्बोधन को ध्यानपूर्वक सुना।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन की शुरुआत सुशासन दिवस की शुभकामनाओं के साथ करते हुए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। उन्होंने कहा कि सांसद खेल महोत्सव– ‘फिट युवा, विकसित भारत’ जैसे आयोजन युवा पीढ़ी में खेल संस्कृति को मजबूत बनाते हैं और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह महोत्सव लगभग चार महीनों तक रायपुर संसदीय क्षेत्र के 36 विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया गया। इसमें स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उन्होंने इस व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल को विशेष बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खेलों में केवल पहला, दूसरा या तीसरा स्थान ही सबकुछ नहीं होता, बल्कि अनुशासन, टीम-स्पिरिट, समर्पण और सतत अभ्यास के गुण ही किसी को महान खिलाड़ी बनाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महोत्सव से अनेक खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और देश का नाम रोशन करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों के सपनों को पंख देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ में खेल अलंकरण समारोह पुनः प्रारंभ किया गया है। ओलंपिक में प्रदेश के खिलाड़ी के चयन पर 21 लाख रुपये तथा स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिली है, जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। रायपुर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टेडियम है और जनवरी माह में यहां पुनः बड़े मैचों का आयोजन किया जाएगा। खेलो इंडिया के कार्यालय विभिन्न स्थानों पर स्थापित कर नई खेल प्रतिभाओं को तराशने का कार्य किया जा रहा है।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सांसद खेल महोत्सव– ‘फिट युवा, विकसित भारत’ का शुभारंभ 29 अगस्त को हुआ था और यह आयोजन रायपुर लोकसभा क्षेत्र के 36 स्थानों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि केवल पढ़ाई-लिखाई ही नहीं, बल्कि खेल-कूद भी जीवन में समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसी के माध्यम से बच्चे देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। इस महोत्सव में 542 गांवों से सहभागिता रही और 85 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जो पूरे देश में रिकॉर्ड भागीदारी है।
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में पारंपरिक एवं आधुनिक खेलों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। गेड़ी प्रतियोगिता में 70 वर्ष की महिलाओं की सहभागिता, कबड्डी, फुगड़ी, वॉलीबॉल जैसे खेलों में उत्साहपूर्ण प्रदर्शन और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों द्वारा रस्साकशी में भागीदारी—सभी ने सामाजिक समरसता और समावेशन का सशक्त संदेश दिया। स्कूल छोड़ चुके युवाओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला तथा अनुभवी खिलाड़ियों का सम्मान किया गया।
सांसद श्री अग्रवाल ने कहा कि इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में लगभग 1,500 खेल अधिकारियों, विद्यालयीन शिक्षकों और सेवानिवृत्त खेल अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विश्वविद्यालय परिसरों में भी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों तथा आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले समय में सांसद खेल महोत्सव को और अधिक सुव्यवस्थित, व्यापक और प्रभावी रूप दिया जाएगा।
समापन समारोह में विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया। समूह खेलों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 11,000 रुपये, द्वितीय स्थान को 5,000 रुपये तथा एकल खेलों में प्रथम स्थान पर 3,100 रुपये और द्वितीय स्थान पर 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ पदक, प्रशस्ति-पत्र एवं टी-शर्ट प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में विधायक श्री राजेश मूणत, श्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री किरण सिंह देव, ज़िला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, नान अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिस्वरंजन सहित जनप्रतिनिधि, खेल विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं नागरिक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलकर सभी समाज के हित में कर रही है कार्य – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र
सतनाम भवन सेक्टर-6 भिलाई में आयोजित बाबा गुरु घासीदास जयंती एवं गुरु पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
सतनाम भवन में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा बाबा गुरु घासीदास जयंती आयोजन हेतु प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये की घोषणा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई सेक्टर-6 स्थित सतनाम भवन में आयोजित परमपूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती एवं गुरु पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सतनाम भवन में बाबा गुरु घासीदास जी की गुरु-गद्दी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
इस गरिमामय आयोजन में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, कौशल विकास तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा तथा विधायक श्री रिकेश सेन विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि 18वीं सदी में जब समाज में छुआछूत, भेदभाव और असमानता चरम पर थी, उस समय बाबा गुरु घासीदास जी ने “मनखे-मनखे एक समान” का महान संदेश देकर मानवता को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास जी के इन्हीं आदर्शों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए सभी समाज वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी जैसी योजनाओं का सीधा लाभ किसानों और आम नागरिकों को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के समग्र विकास के उद्देश्य से अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसमें अहिवारा विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। समाज के विकास के लिए प्राधिकरण के माध्यम से 75 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही समाज के बेटा-बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा 15 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए जिला मुख्यालयों में नालंदा परिसर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों तक पहुँच सकें। उन्होंने समाज में फैल रही नशाखोरी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विरुद्ध कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस उद्योग नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने समाज से शिक्षा को बढ़ावा देने, समानता, सद्भाव और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरु घासीदास सेवा समिति की मांगों का उल्लेख करते हुए सतनाम भवन सेक्टर-06 भिलाई में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा प्रति वर्ष बाबा गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम के आयोजन हेतु 10 लाख रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की।
प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को पूर्ण भाव से जीवन में उतार लिया जाए, तो समाज की सभी बुराइयों का स्वतः अंत हो जाएगा। उन्होंने सतनाम मार्ग पर चलने वालों से खान-पान और आचरण को शुद्ध रखने का आह्वान किया।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग और संदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री सांवला राम डाहरे, गुरु घासीदास सेवा समिति के अध्यक्ष श्री भरत लाल कुर्रे, उपाध्यक्ष श्रीमती उर्मिला भास्कर एवं समिति के अन्य पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया।
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “वर्ष 1971 में आज ही के दिन सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और सटीक रणनीति के बल पर पाकिस्तानी सेना को परास्त कर उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया था। इस विजय ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ ढाल बन, विश्वभर में मानवता की रक्षा का आदर्श उदाहरण पेश किया और भारतीय सेनाओं की अद्वितीय सैन्य क्षमता और पराक्रम का लोहा मनवाया। विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन करता हूँ।”
लाल किले में गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’
छत्तीसगढ़ के गेड़ी नृत्य का अद्भुत प्रदर्शन को यूनेस्को ने सराहा
180 देशों के प्रतिनिधियों ने किया छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अभिवादन

छत्तीसगढ राज्य के बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल द्वारा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 7 से 13 दिसम्बर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहीं। समारोह में बिलासपुर के गेड़ी नर्तक दल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को काफी सराहा गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गेडी नर्तक दल को बधाई और शुभकामनाएं दीं है l
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया
समारोह का ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
गेड़ी नृत्य दल ने अपने रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया
मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने सशक्त, ऊर्जावान एवं रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित 180 देशों के डेलिगेट्स उपस्थित रहे।
यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित 180 देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिए
मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों के मन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा उत्पन्न की। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे द्वारा एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले एवं बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तकों प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे एवं मनोज माण्डले ने साहसिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। विशेष रूप से तब, जब एक गेड़ी पर संतुलन बनाते हुए कलाकारों ने मानवीय संरचनाएं बनाईं, पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
गेड़ी नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाई
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों व चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध एवं मयूर पंख धारण कर प्रस्तुत भाव नृत्य ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया व छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए शुभकामनाएं दी।

असम में चौथे सहकारिता मेला 2025 का उद्घाटन
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और महापुरुष माधवदेव की सांस्कृतिक विरासत को सहकारिता पुनर्जागरण की आधारशिला बताया

असम सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित चौथे सहकारिता मेला 2025 का आज चांदमारी स्थित एईआई ग्राउंड में उद्घाटन किया गया। यह तीन दिवसीय मेला 13 से 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य असम में सहकारिता आंदोलन की शक्ति, विविधता और संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।
इस मेले का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने असम सरकार के सहकारिता मंत्री श्री जोगेन मोहन की गरिमामयी उपस्थिति में किया।
गुवाहाटी में आयोजित सहकारिता मेले को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि असम में सहकारिता आंदोलन राज्य की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का स्वाभाविक विस्तार है। उन्होंने क्षेत्र के महान संत विभूतियों महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और महापुरुष माधवदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एकता, समानता और समाज सेवा पर आधारित उनकी शिक्षाएं ही सहकारिता की भावना की मूल आधारशिला हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में “सहकार से समृद्धि” की राष्ट्रीय परिकल्पना, सशक्त वास्तविकता में परिवर्तित हो रही है। उन्होंने वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसने भारत में वर्ष 2047 तक एक सर्वांगीण, विश्वस्तरीय सहकारिता प्रणाली के निर्माण के लिए आवश्यक संस्थागत प्रोत्साहन और स्पष्ट रोडमैप प्रदान किया है।
श्री गुर्जर ने विशेष रूप से असम में सहकारिता क्षेत्र में हो रहे तेज़ सुधारों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के गतिशील नेतृत्व और राज्य के सहकारिता मंत्री श्री जोगेन मोहन के समर्पित प्रयासों को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर सक्रिय और प्रभावी क्रियान्वयन के चलते असम प्रमुख राष्ट्रीय पहलों में अग्रणी बनकर उभरा है।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के 100 प्रतिशत कंप्यूटरीकरण की दिशा में असम ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां 800 से अधिक पैक्स ने नए मॉडल उपविधियों को अपनाया है। इस प्रगति से युवाओं और महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है, विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है और 32 लाख से अधिक सदस्यों को वित्तीय समावेशन का लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि असम अब राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के अनुरूप पूरी तरह अग्रसर है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2026 तक प्रत्येक गांव में एक सहकारी संस्था की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने राज्य के लिए एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सहकारिता-आधारित भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
चौथे सहकारिता मेले में अपने संबोधन में असम सरकार के सहकारिता मंत्री श्री जोगेन मोहन ने इस मेले को जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का एक जीवंत मंच बताया। उन्होंने प्रतिभागियों की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर अपशिष्ट को उपयोगी संसाधनों में बदलते हुए आत्मनिर्भरता और अद्भुत नवाचार क्षमता का परिचय दिया है।
उन्होंने बताया कि ये सहकारी संस्थाएं आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और युवाओं की सफलता तक, विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को व्यापक लाभ पहुंचा रही हैं।
इस सहकारिता मेले में 160 सहकारी संस्थाओं की भागीदारी है, जो हथकरघा, मत्स्य पालन, डेयरी, कृषि तथा युवा एवं महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह मेला स्थानीय उत्पादों, नवाचारों और सहकारिता की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान कर रहा है।
मेला आगामी दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें प्रदर्शनियां, संवाद और ज्ञान-साझा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य राज्य में सहकारिता आधारित विकास को और अधिक प्रोत्साहित करना है।
भारत की जनगणना 2027 – केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से भारत की जनगणना 2027 कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है ।
योजना का विवरण:
- भारतीय जनगणना विश्व की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कार्ययोजना है। भारत की जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी: ( i ) घरों की सूची बनाना (हाउसलिस्टिंग) और आवास (हाउसिंग) जनगणना – अप्रैल से सितंबर, 2026 और (ii) जनसंख्या की गणना (पीई) – फरवरी 2027 (केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बर्फ से प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड राज्यों के लिए, पीई सितंबर, 2026 में की जाएगी)।
- लगभग 30 लाख प्रक्षेत्र कर्मचारी राष्ट्रीय महत्व के इस विशाल कार्य को पूरा करेंगे।
- डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और मॉनिटरिंग के लिए सेंट्रल पोर्टल का उपयोग करने से बेहतर गुणवत्ता का डेटा सुनिश्चित होगी।
- डाटा प्रसार बेहतर और अधिक यूज़र फ्रेंडली तरीके से होगा ताकि नीति निर्माण के लिए आवश्यक मानकों पर सभी प्रश्न एक बटन क्लिक करते ही प्राप्त हो जाए।
- जनगणना एक सेवा के रूप में (सीएएएस) मंत्रालयों को डेटा स्पष्ट, मशीन से पढ़े जा सकने वाले और कार्रवाई करने योग्य प्रारूप में प्रदान करेंगे।
लाभ:
भारत की जनगणना 2027 में देश की समस्त जनसंख्या को शामिल किया जाएगा।
कार्यान्वयन कार्यनीति और लक्ष्य:
- जनगणना प्रक्रिया में हर घर में जाना और हाउसलिस्टिंग तथा हाउसिंग जनगणना और जनसंख्या गणना के लिए अलग-अलग प्रश्नावली तैयार करना शामिल है।
- गणनाकार (एन्यूमेरेटर) जो आम तौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं और जिन्हें राज्य सरकार नियुक्त करती है, अपनी नियमित ड्यूटी के अतिरिक्त जनगणना का फील्ड वर्क भी करेंगे।
- उप-जिला, जिला और राज्य स्तरों पर दूसरे जनगणना अधिकारियों को भी राज्य /जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
- जनगणना 2027 के लिए उठाए गए नए कदम इस प्रकार हैं:
( i ) देश में डिजिटल माध्यम से पहली जनगणना। डेटा का संग्रह मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके किया जाएगा जो एन्डरॉएड और आईओएस दोनों वर्जनों के लिए उपलब्ध होंगे।
(ii) पूरी जनगणना प्रक्रिया को वास्तविक समय आधार पर प्रबंधित और निगरानी करने के लिए एक समर्पित पोर्टल, जिसका नाम सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस) है, डेवलप किया गया है।
(iv) हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) क्रिएटर वेब मैप एप्लीकेशन: जनगणना 2027 के लिए एक और इनोवेशन एचएलबी क्रिएटर वेब मैप एप्लीकेशन है, जिसका उपयोग प्रभारी अधिकारी करेंगे।
(v) जनता को स्वयं गिनती करने का विकल्प दिया जाएगा।
(vi) इस विशाल डिजिटल अभियान के लिए सटीक सुरक्षा फ़ीचर प्रदान किया गया है।
(vii) जनगणना 2027 के लिए पूरे देश में जागरूकता, सबको साथ लेकर चलने वाली भागीदारी, सभी का सहयोग और प्रक्षेत्र अभियानों में सहायता के लिए एक केंद्रित और व्यापक प्रचारित अभियान संचालित किया जाएगा। इसमें सटीक, प्रमाणिक और समय पर जानकारी साझा करने पर बल दिया जाएगा और समावेशी तथा प्रभावी लोकसंपर्क प्रयास सुनिश्चित किया जाएगा।
(viii) राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को अपनी बैठक में आगामी जनगणना यानी जनगणना 2027 में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय किया। हमारे देश में भारी सामाजिक और जनसांख्यिकीय विविधता तथा संबंधित चुनौतियों के साथ, जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पीई) में जाति डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भी शामिल किया जाएगा।
(ix) लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को, जिनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइज़र, मास्टर ट्रेनर, प्रभारी अधिकारी और प्रधान/जिला जनगणना अधिकारी शामिल हैं, डेटा कलेक्शन, मॉनिटरिंग और जनगणना अभियान के पर्यवेक्षण के लिए तैनात किया जाएगा। सभी जनगणना कर्मचारियों को जनगणना के काम के लिए उपयुक्त मानदेय प्रदान किया जाएगा क्योंकि वे अपने नियमित कार्य के अतिरिक्त यह काम भी करेंगे।
रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव:
- वर्तमान में प्रयास यह है कि आगामी जनगणना डेटा पूरे देश में कम से कम समय में उपलब्ध कराया जाए। जनगणना परिणामों को अधिक कस्टमाइज़्ड विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स के साथ प्रसारित करने की भी कोशिश की जाएगी। डेटा सबसे निचली प्रशासनिक इकाई यानी गांव/वार्ड स्तर तक सभी के साथ साझा किया जाएगा।
- जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए अलग-अलग दायित्वों को पूरा करने हेतु, स्थानीय स्तर पर लगभग 550 दिनों के लिए लगभग 18,600 तकनीकी श्रमबल का उपयोग किया जाएगा। दूसरे शब्दों में, लगभग 1.02 करोड़ मानव दिवसों का रोजगार सृजित होगा। इसके अतिरिक्त प्रभारी/जिला/राज्य स्तर पर तकनीकी श्रमबल देने के प्रावधान का परिणाम क्षमता निर्माण के रूप में भी आएगा क्योंकि कार्य की प्रकृति डिजिटल डेटा हैंडलिंग, मॉनिटरिंग और कोऑर्डिनेशन से जुड़ी होगी। इससे इन लोगों के भविष्य में रोज़गार की संभावनाओं में भी मदद मिलेगी।
पृष्ठभूमि:
जनगणना 2027 देश में 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। जनगणना गांव, शहर और वार्ड स्तर पर प्राथमिक डेटा उपलब्ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है, जो घर की स्थिति; सुविधाएं और परिसंपत्तियां, जनसांख्यिकीय, धर्म, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक कार्यकलाप, प्रवासन और उर्वरता जैसे अलग-अलग मानकों पर सूक्ष्म स्तर डेटा प्रदान करता है। जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 जनगणना के संचालन के लिए कानूनी संरचना प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के नये उद्देश्य

सहकारिता मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के सहकारी समिति अधिनियमों में मौजूद किसी कानूनी या नियामक कमी की पहचान नहीं की है जिसके कारण राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
जब कभी राज्य/संघ राज्यक्षेत्र राज्य-स्तरीय सहकारी डेटाबेस के राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के साथ एकीकरण के लिए तैयार होते हैं, तब उन्हें आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
सहकारिता मंत्रालय ने राज्यों के लिए सहकारी समितियों का डाटा एनसीडी पोर्टल से प्राप्त करने हेतु एक मानक API विकसित किया और दिनांक 27.05.2025 को मानक API विनिर्देशन दस्तावेज एवं डेटाबेस schema को साझा किया है । तदुपरांत, आरसीएस अनुप्रयोगों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट-ड्रिवन डाटा पुशिंग के लिए पुश APIs को विकसित किया गया और सभी संबंधित दस्तावेजों और मानक प्रचालन प्रक्रियाओं को राज्यों के साथ दिनांक 22.09.2025 को साझा किया गया । RCS कंप्यूटरीकरण पूर्ण होने और API एकीकरण की परामर्शिका के साथ एक व्यापक चेकलिस्ट भी दिनांक 14.11.2025 को जारी की गई । राजस्थान, एनसीडी पोर्टल के साथ API एकीकरण का कार्य पूरा कर चुका है । एकीकरण योजना के अनुसार, सफल दो-तरफा एकीकरण और सहकारी डाटा के सिंक्रोनाइजेंशन के लिए राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को रिवर्स/पुल API का विकास और संपूर्ण RCS कंप्यूटरीकरण सुनिश्चित करना आवश्यक है ।
सहकारी क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और कमजोर वर्ग की अधिक प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं –
- मौजूदा कानून के अनुसमर्थन और सतानवेवां संविधान संशोधन के उपबंधों की अंतर्विष्टी द्वारा बहुराज्य सहकारी समितियों में शासन सशक्त करने, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने तथा निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार, आदि के लिए बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम और नियम, 2023 को क्रमश: दिनांक 03.08.2023 और 04.08.2023 को अधिसूचित किया गया ।
बहुराज्य सहकारी समितियों में महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों की प्रतिभागिता बढ़ाने के लिए बहुराज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीट और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए एक सीट पर आरक्षण का उपबंध किया गया है ।
- महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) की सदस्यता को भी अधिक समावेशी और व्यापक बनाया गया है । अब तक, 32 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों ने आदर्श उपविधियां अपना ली हैं या उनकी मौजूदा उपविधियां, आदर्श उपविधियों के अनुरूप हैं ।
- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारी क्षेत्र में महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों की प्रतिभागिता बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठा रहा है जिनका ब्योरा निम्नानुसार है:
NCDC द्वारा नंदिनी सहकार, स्वयं शक्ति सहकार, आयुष्मान सहकार और युवा सहकार जैसी समर्पित योजनाएं चलाई जा रही हैं जो महिला-नेतृत्व वाली, युवा नेतृत्व वाली, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और नवोन्मेषी सहकारी समितियों को रियायती वित्तीयन, ब्याज अनुदान और स्टार्ट-अप सहयोग प्रदान करती हैं । इनका ब्योरा निम्नानुसार है-
वर्ष 2024-25 के दौरान, महिला सहकारी समितियों को ₹1,355.61 करोड़ की सहायता प्रदान की गई जिससे 41 लाख से अधिक महिला सदस्य लाभान्वित हुईं । दिनांक 31.03.2025 के अनुसार, एनसीडीसी ने महिलाओं द्वारा विशिष्ट रूप से प्रवर्तित सहकारी समितियों के विकास के लिए संचयी रूप से ₹7,781.97 करोड़ की वित्तीय सहायता का संवितरण किया है ।
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों की योजनाएं उन्हें विपणन, कार्यशील पूंजी और अवसंरचना निर्माण में सहायता प्रदान करती हैं । वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अनुसूचित जाति सहकारी समितियों को ₹0.18 करोड़ की धनराशि और अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों को ₹29.63 करोड़ की धनराशि का संवितरण किया गया । दिनांक 31.03.2025 के अनुसार, अनुसूचित जाति सहकारी समितियों को ₹323.52 करोड़ और अनुसूचित जनजाति सहकारी समितियों को ₹5308.02 करोड़ का संचयी संवितरण किया गया।
इसके अलावा, एनसीडीसी मात्स्यिकी, पशुधन, हथकरघा, रेशम उत्पादन और श्रमिक क्षेत्रों में दुर्बल वर्ग की सहकारी समितियों को सहायता प्रदान करता है जिससे लाखों सदस्य लाभान्वित होते हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला सदस्य भी शामिल हैं । एनसीडीसी ने महिला सशक्तीकरण, सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल पर विशेष बल देते हुए सहकारी क्षेत्र की उभरती जरूरतों के साथ संरेखित क्षेत्र विशिष्ट योजनाओं और केंद्रीकृत उत्पादों की शुरूआत की है ।