केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

हमने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा के घेरे को मजबूत बनाया है, इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो 126 थी, वो घटकर 11 रह गई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGsP/IGsP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है

अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा

पिछले 40 साल से देश के लिए नासूर बनें 3 हॉटस्पॉट नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे

हमने NIA, UAPA कानूनों को सुदृढ़ बनाने, तीन नए आपराधिक कानून, नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए हैं

तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्णतः लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक होगी

हमने PFI पर बैन लगाकर देशभर में उनके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण बनी

Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy इन तीन बिंदुओं पर काम करके हम कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं

हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है कि इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच भी जमीन न मिल पाए

अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस NCB के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया।

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट – नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर – की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स और भगोड़ों के लिए मजबूत कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग विश्व में सबसे आधुनिक बन जाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद पर मोदी सरकार की कार्रवाई का जिक्र कहते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगाने के बाद देशभर में उसके ठिकानों पर छापे मार कर गिरफ्तारियां की गईं, जो केंद्र – राज्य के समन्वय का उत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा Intelligence की Accuracy, Objective की clarity और Action की synergy के तीन बिंदुओं पर काम कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।

गृह मंत्री ने दोहराया कि हमें नारकोटिक्स और organised क्राइम पर 360 डिग्री प्रहार कर ऐसा तंत्र बनाना है जिससे इस देश में नार्को व्यापारियों और अपराधियों को एक इंच जमीन भी न मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर नारकोटिक्स के राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोहों पर कड़ा प्रहार कर उनके आकाओं को जेल में डाले।

मणिकर्णिका संगोष्ठी: महिला सशक्तिकरण और रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा

सांगानेर, 28 नवम्बर।

सांगानेर में आयोजित मणिकर्णिका संगोष्ठी में महिला सशक्तिकरण, रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य, राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका और भारतीय संस्कृति पर सार्थक विमर्श।

एस.एस. जैन सुबोध महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सांगानेर एवं संस्कृता महिला विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में “मणिकर्णिका—संगोष्ठी” का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, तथा भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना था।


कार्यक्रम का शुभारंभ: दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण

संगोष्ठी की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ

  • राष्ट्र सेविका समिति, सांगानेर महानगर की शारीरिक प्रमुख सौम्या पांडेय ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
  • प्राचार्या डॉ. यदु शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
  • लक्ष्मी बघेल ने प्रेरक एकल गीत प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी की प्रस्तावना: भारतीय नारी की मूलभूत शक्ति

संयोजिका डॉ. शिप्रा पारीक ने संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए नारी की

  • स्वबोध जागरण
  • समाज में उसकी मूलभूत भूमिका
  • आत्मशक्ति
    पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता का उद्बोधन: रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वी. शांता कुमारी जी ने “मणिकर्णिका” विषय पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि—

  • नारी में इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति, और कर्तव्य शक्ति जन्म से निहित हैं।
  • रानी लक्ष्मीबाई का अनुशासन, मातृत्व और शौर्य आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • शिक्षा, चिकित्सा, सेवा और अध्ययन—इन सभी क्षेत्रों में कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण अत्यंत आवश्यक है।

छात्राओं की प्रस्तुति: रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य

महाविद्यालय की छात्राओं ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की।
यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए रानी के साहस और बलिदान का सजीव अनुभव बन गई।


महिला सशक्तिकरण पर विशेष चर्चा

मेधा नरुका जी ने महिलाओं की

  • आत्मशक्ति
  • समाज निर्माण में निर्णायक भूमिका
  • राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

अध्यक्षीय संबोधन: विकसित भारत 2047 का संकल्प

पूर्व महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि—

  • शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
  • छात्राओं को चरित्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम संचालन और समापन

कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” के साथ हुआ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना शर्मा और डॉ. दीक्षिता अजवानी ने किया।

सांगानेर विभाग की कार्यवाहिका गीतांजलि पारीक ने आभार व्यक्त किया।

ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए ऑटोनॉमस बॉडी की आवश्यकता – सर्वोच्च न्यायालय

ई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने की आवश्यकता दोहराई, और कहा कि यह तय करने के लिए एक ऑटोनॉमस बॉडी की ज़रूरत है कि क्या अलाउड किया जा सकता है और क्या नहीं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि “खुद को बताने वाली” बॉडी इस सिचुएशन को संभालने के लिए काफी नहीं होगी और रेगुलेटरी उपाय के तौर पर किसी ऐसी रेगुलेटरी बॉडी की ज़रूरत है, जो बाहरी प्रभाव से मुक्त हो।

न्यायालय ने पूछा, “कुछ समय के लिए यह तय करने के लिए सिर्फ़ एक ऑटोनॉमस बॉडी की ज़रूरत है कि कुछ अलाउड किया जा सकता है या नहीं…अगर अलाउड है तो ठीक है। अगर सब कुछ अलाउड हो गया तो क्या होगा?”

सर्वोच्च न्यायालय ने साफ़ किया कि फंडामेंटल राइट्स को बैलेंस करना होगा और वह “किसी ऐसी चीज़ को मंज़ूरी नहीं देगा जो किसी का मुंह बंद कर सके”। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि “अगर आप सब कोई उपाय लेकर आते हैं तो हम रेगुलेटरी उपाय का सुझाव देने वाले आखिरी व्यक्ति होंगे। आप सब कहते हैं कि यह और वह एसोसिएशन है…तो फिर ऐसे मामले क्यों हो रहे हैं?”

न्यायालय कॉमेडियन और पॉडकास्टर से जुड़ी पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जो अपने ऑनलाइन बर्ताव की वजह से मुश्किल में पड़ गए। न्यायालय ने किसी को नीचा दिखाने वाले कंटेंट, खासकर दिव्यांग लोगों को नीचा दिखाने वाले कंटेंट से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने की भी बात कही।

मुख्यन्यायधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक चेतावनी दिखाने की ज़रूरत है, जिसमें कहा गया कि ऐसा कंटेंट आम दर्शकों के लिए सही नहीं हो सकता है।

जस्टिस बागची ने कहा, “अश्लीलता किताब, पेंटिंग वगैरह में हो सकती है। अगर कोई नीलामी होती है… तो उस पर भी रोक हो सकती है। जैसे ही आप फोन ऑन करते हैं और कुछ ऐसा आता है जो आप नहीं चाहते या आप पर ज़बरदस्ती थोपा जाता है, तो क्या होगा?”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वैसे तो आमतौर पर वॉर्निंग होती है, लेकिन एक एक्स्ट्रा उपाय के तौर पर उम्र का वेरिफिकेशन किया जा सकता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “देखिए, दिक्कत यह है कि वॉर्निंग दी जाती है और शो शुरू हो जाता है। लेकिन जब तक आप न देखने का फैसला करते हैं, तब तक यह शुरू हो जाता है। वॉर्निंग कुछ सेकंड के लिए हो सकती है…फिर शायद आपका आधार कार्ड वगैरह मांगा जाए। ताकि आपकी उम्र वेरिफाई हो सके और फिर प्रोग्राम शुरू हो। बेशक, ये सिर्फ उदाहरण के लिए सुझाव हैं…अलग-अलग एक्सपर्ट्स का कॉम्बिनेशन…ज्यूडिशियरी और मीडिया से भी कोई हो सकती है…कुछ पायलट बेसिस पर आने दें और अगर यह बोलने और बोलने की आज़ादी में रुकावट डालता है, तो उस पर तब गौर किया जा सकता है। हमें एक ज़िम्मेदार समाज बनाने की ज़रूरत है और एक बार ऐसा हो जाने पर, ज़्यादातर समस्याएं हल हो जाएंगी।”

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “आप SC/ST एक्ट की तरह ही एक बहुत कड़े कानून के बारे में क्यों नहीं सोचते…जहां उन्हें नीचा दिखाने पर सज़ा हो। उसी तरह।”

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि यूज़र-जनरेटेड कंटेंट के संबंध में उपायों की ज़रूरत है, क्योंकि कोई व्यक्ति बोलने की आज़ादी की आड़ में “सब कुछ और कुछ भी” नहीं कर सकता।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा “यह अजीब है कि मैं अपना चैनल बनाता हूं और बिना किसी जवाबदेही के काम करता रहता हूं। हां, बोलने की आज़ादी की रक्षा होनी चाहिए…मान लीजिए कि एडल्ट कंटेंट वाला कोई प्रोग्राम है…पैरेंटल कंट्रोल से पहले से चेतावनी दी जा सकती है।”

जस्टिस बागची ने “एंटी-नेशनल” कंटेंट पर भी चिंता जताई और सवाल किया कि क्या इससे निपटने के लिए सेल्फ-रेगुलेशन काफी होगा।

“जब कंटेंट एंटी-नेशनल हो या समाज के ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला हो… तो क्या सेल्फ-रेगुलेशन काफी होगा? कानूनी आधार क्या है? रेगुलेशन ऐसी चीज़ से आया है, जिसे चुनौती दी जा रही है। वे रेगुलेशन इंटरमीडियरी को भी कवर करते हैं। मुश्किल रिस्पॉन्स टाइम की है और जब तक सरकार जवाब देती है, तब तक चीज़ें अरबों व्यूज़ के साथ वायरल हो चुकी होती हैं।”

जस्टिस बागची ने कहा,

“हम फ्री स्पीच को रेगुलेटेड अधिकार के हिसाब से देखते हैं। बेशक, कोई सरकारी अथॉरिटी यह तय नहीं कर सकती कि कोई पब्लिकेशन एंटी-नेशनल है या नहीं। लेकिन अगर यह अपने आप में ऐसा है जो देश की एकता, अखंडता और सॉवरेनिटी पर असर डालता है…”

लालकिला ब्लास्ट मामले में आतंकी उमर नबी का सहयोगी सोयब फरीदाबाद से गिरफ्तार

नई दिल्ली/फरीदाबाद।

लालकिला के समीप बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सुसाइड हमलावर आतंकी डॉ. उमर नबी के नजदीकी सहयोगी सोयब को फरीदाबाद के गांव धौज से गिरफ्तार किया है। इस मामले में यह 7वीं गिरफ्तारी है।

सोयब हरियाणा के अल-फलह विश्वविद्यालय में वार्ड बॉय के रूप में कार्यरत था। उस पर आरोप है कि उसने उमर नबी को विस्फोटक सामग्री लाने और ले जाने में सहायता की और नूंह में अपनी साली अफसाना के घर में उसके लिए कमरा किराए पर दिलवाया। धमाके से पहले उमर नबी 10 दिन तक वहीं ठहरा था।

आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल शकील की निशानदेही के बाद अब एनआईए डॉ. आदिल अहमद और डॉ. शाहीन सईद को अल-फलह विश्वविद्यालय में लेकर जाएगी। जांच में सामने आया है कि आदिल और उमर नबी कई वर्षों से परिचित थे। आदिल कई बार उमर से मिलने के लिए विश्वविद्यालय आया और उसके छात्रावास स्थित फ्लैट में ठहरा। इसी दौरान उसकी पहचान मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद से कराई गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फतेहपुरा तगा और धौज गांव में विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करने की योजना आदिल ने ही सुझाई थी। उमर नबी और आदिल दोनों अनंतनाग के सरकारी अस्पताल में कार्यरत थे। बाद में आदिल सहारनपुर और उमर अल-फलह विश्वविद्यालय में तैनात हुए, लेकिन दोनों का संपर्क बना रहा।

जांच में पता चला है कि डॉ. शाहीन सईद आतंकी मॉड्यूल की महत्वपूर्ण सदस्य थी। वह विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति में तीसरे स्थान पर थी और नए लोगों को नेटवर्क में जोड़ने तथा मानसिक रूप से प्रभावित करने का काम करती थी।

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज…

सत्य की सदा जय का आश्वासन है कोविदारध्वज…

आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण, महंत श्रीसिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास

सत्यनिष्ठा से युक्त प्रतिभाएं पूर्ण होती हैं। सदुद्देश्य से किए उचित प्रयत्न विफल नहीं होते। पुण्यों का फल मनुष्य को प्राप्तव्य की प्राप्ति करा ही देता है। श्री राम जन्मभूमि मन्दिर पर ध्वजारोहण सनातन की इसी विश्वास-परंपरा का मानो पुण्य पर्व है। शताब्दियों का अनुताप तथा पीढ़ियों का सन्ताप दूर हुआ है। भारतीय जन के मन में बसा मन्दिर अब अयोध्या धाम की पावन भूमि पर प्रत्यक्ष है। इसके निर्माण और उससे जुड़े प्रश्नों तथा आक्षेपों का समाधान हो गया है। पूर्णता को प्राप्त हुए भव्य मन्दिर पर कोविदार ध्वज शोभा भुवनमोहिनी होगी। भारतीय परंपरा में ध्वज अस्मिता और प्रतिज्ञा के व्यन्जक होते हैं।

इनके माध्यम से ध्वजी अर्थात ध्वज धारण करने वाले का स्वरूप व्यक्त होता है। देवताओं के संबंध में प्रायः उनके वाहनों को ही उनके ध्वज-चिह्न के रूप में देखा जाता है। जैसे भगवान शिव का वाहन वृषभ है और वे वृषध्वज कहलाते हैं, इसी प्रकार कुमार कार्तिकेय का वाहन मयूर है और वे मयूरध्वज कहलाते हैं। ध्वज-चिह्नों में, जिसका ध्वज होता ,है उसके स्वभाव-स्वरूप के संकेत निहित होते हैं।

प्रायः विश्व भर में सभी राष्ट्रों के अपने ध्वज हैं और उनकी अपनी व्याख्याएं भी हैं। ध्वज के प्रकार, उनमें विद्यमान चिह्न एवं रंग आदि के भी महत्वपूर्ण सन्दर्भ होते हैं।

यह ध्वज रघुवंश का है, यह ध्वज रामराज्य का है और यह ध्वज भगवान् श्रीराम का है। सम्पूर्ण पहचान है। प्रभु श्रीराम बाल्यकाल से इस रथ में शोभित होते रहे हैं, इसलिए सहज ही उनके रथ को कोविदार ध्वज कहा जाता है…

शैशवे रघुनाथस्तु सवपितृस्यन्दनस्थितः।

अतः सोप्यस्य रामस्य कोविदारध्वजः स्मृतः॥

जैसे कोविदार पृथ्वी का भेदन करके उत्पन्न होने के गुण से अपना नाम प्राप्त करता हैं, वैसे ही सूर्य अपनी जीवनदायिनी किरणों के बल से धरती के गर्भ से सुप्त बीजों को अंकुरित कर देता है। यह सादृश्य कोविदार को सूर्यवंश की ध्वजा में अर्थवान् बनाता है। पवित्र वृक्षों की श्रेणी में कोविदार को कल्पवृक्ष के समान कहा गया है –

“मन्दारः कोविदारश्च पारिजातश्च नामभिः।

स वृक्षो ज्ञायते दिव्यो यस्यैतत् कुसुर्मात्तमम्।”

श्री राम जन्मभूमि मन्दिर पर कोविदार ध्वज में सूर्य एवं प्रणव भी दृश्य हैं। इस दृष्टि से विचार करने पर भगवान् श्रीराम का लोकोत्तर चरित्र हमारे सामने आता है। श्रीराम की चरित्रगत व्याप्ति एवं महानता को कोई एक चिह्न व्यक्त कर सकता है, ऐसा कहना कठिन है। उनके विराट् व्यक्तित्व एवं उनकी प्रभुता को व्यक्त करने वाले उनके ध्वज भी चार प्रकार के कहे गए हैं। आनन्द रामायण में इसकी सुंदर चर्चा करते हुए भगवान् श्रीरामभद्र के चार ध्वजों का वर्णन प्राप्त होता है। श्री रघुनंदन के रथ चार प्रकार के हैं, तदनुरूप उनके ध्वज भी चार हैं…..

चतुर्षु स्यन्दनेष्वेवं चत्वारः कीर्त्तिताः ध्वजाः।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पूर्ण गौरव के साथ धर्म ध्वजारोहण

l l जय श्री राम l l

अयोध्या धाम, 25 नवम्बर।

रामराज्य का प्रतीक धर्मध्वज आज पूर्ण श्रद्धा के साथ श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के उत्तुंग शिखर पर चढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वज को 191 फिट ऊंचाई पर चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की। हजारों की संख्या में उपस्थित हर जाति वर्ग के लोग भाव विभोर होकर पांच सौ वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद आए इस सार्थकता दिवस के साक्षी बने। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रामदरबार में आरती कर रामलला का दर्शन पूजन किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री, सरसंघचालक जी सहित सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भव्य मंदिर पर ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति ही नहीं, अपितु नए युग का शुभारंभ है। रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। अनगिनत पीढ़ियों की प्रतीक्षा भव्य मंदिर के रूप में है। यह ध्वज धर्म और मर्यादा के साथ ही राष्ट्रधर्म और विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। “नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना..” की रामराज्य की परिकल्पना में सभी को अन्न, स्वास्थ्य सुविधा, आवास आदि उपलब्ध कराना है। यही रामराज्य की उद्घोषणा का संकल्प है। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद इस ध्वजारोहण से अयोध्या अब उत्सवों की वैश्विक राजधानी बन गई है।

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। इसके लिए कितने लोगों ने सपना देखा, कितनों ने प्रयास किया, कितनों ने अपने प्राण अर्पण किए। अशोक जी, महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी सहित कितने ही संत पुरुषों, गृहस्थ, विद्यार्थियों ने अपने प्रणार्पण किए, आज उनकी आत्माएं तृप्त हो रही होंगी। आज उस मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। यह उसी ध्वज का आरोहण व रामराज्य का ध्वज है जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख शांति प्रदान करता था। उसी ध्वज को आज फिर से हमने नीचे से ऊपर चढ़ता हुआ, अपने शिखर पर विराजमान होते अपनी आंखों से देखा है। मंदिर बनने में भी समय लगा, 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही हैं। मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वों को उच्चतम शिखर पर पहुंचाया, जिससे सारा विश्व ठीक चले। व्यक्तिगत, पारिवारिक जीवन से लेकर तो संपूर्ण सृष्टि का जीवन ठीक चले, यही धर्म है। उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग ही इस ध्वज का रंग है। इस धर्म ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष उस रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है, जिससे यह व्यक्त होता है कि स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों के लिए छाया प्रदान करें। ध्वजारोहण यह भी संदेश देता है कि इस जीवन का झंडा शिखर तक पहुंचना है, चाहे जितनी प्रतिकूलता, कठिनाई क्यों न हो। भले ही सारी दुनिया स्वार्थ में बैठी हो, लेकिन हमारा संकल्प सूर्य भगवान के तेज जैसा है। हिन्दू समाज ने लगातार 500 साल और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस तत्व को सिद्ध किया और रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यह ध्यान रहे कि संपूर्ण दुनिया में सुख बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रतीक को देखकर हिम्मत रखकर सतत प्रयास करते हुए, सब प्रकार की प्रतिकूलताओं में भी हम सबको मिलकर करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आज यह हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जो संकल्प हमारे पूर्वजों ने दिया है। यह देश जहां हम जन्मे हैं, सबसे प्राचीन है, इसलिए बड़े भाई हैं, ऐसा जीवन जिएं कि पृथ्वी के सर्वमानव चरित्र की शिक्षा, जीवन की विद्या भारतवासियों से सीखें। सबको विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष खड़ा करना है। यह विश्व की अपेक्षा है, यही हमारा कर्तव्य है। मंदिर में श्री रामलला विराजमान हैं, उनका नाम लें और इस कार्य की गति बढ़ाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश और दुनिया इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। राम भक्तों को संतोष, असीम कृतज्ञता, अपार अलौकिक आनंद है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहुति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही। यह एक पल भी आस्था से डिगी नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटी नहीं। आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्म ध्वजा के रूप में दिव्यतम्, भव्यतम् मंदिर प्रतिस्थापित हुआ। यह पुनर्जागरण का ध्वज है, इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ‘ॐ’ शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज संकल्प है, सफलता है, संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे सपनों का साकार स्वरूप है। यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। यह धर्म ध्वज आह्वान करेगा सत्यमेव जयते का। यह धर्म ध्वज प्रेरणा बनेगा प्राण जाई पर वचन न जाई। धर्म ध्वजा कामना करेगा परेशानी से मुक्ति, समाज में शांति और सुख हो, यह ध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा। युगों-युगों तक प्रभु श्री राम के आदेशों और प्रेरणा को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। संपूर्ण विश्व के करोड़ों राम भक्तों को इस अद्वितीय अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज उन सभी भक्तों को भी प्रणाम करता हूं, हर उस दानवीर का आभार व्यक्त करता हूं, जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दिया। राम मंदिर के निर्माण से जुड़े हर श्रमवीर, हर कारीगर, हर योजनाकार, हर वास्तुकार सभी का अभिनंदन करता हूं।

अयोध्या वह भूमि है, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही वह नगरी है, जहां श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। इसी अयोध्या में संसार को बताया कि एक व्यक्ति कैसे समाज की शक्ति से, उसके संस्कारों से, पुरुषोत्तम बनता है। जब श्रीराम अयोध्या से वनवास को गए तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बन करके आए। उनके मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषाद राज की मित्रता, मां शबरी की ममता, भक्त हनुमान का समर्पण, इन सब की शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज की इसी सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक समर्थ्य का भी चेतना स्थल बन रहा है। यहां सप्त मंदिर बने हैं, माता शबरी का मंदिर बना है जो जनजातीय समाज के प्रेम भाव और आतिथ्य परंपरा की प्रतिमूर्ति है। यहां निषादराज का मंदिर बना है, यह उस मित्रता का साक्षी है जो साधन नहीं, साध्य को, उसकी भावना को पूजती है। यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या है, महर्षि वाल्मीकि है, महर्षि वशिष्ठ है, महर्षि विश्वामित्र है, महर्षि अगस्त्य है और संत तुलसीदास हैं। रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी होते हैं। यहां जटायु जी और गिलहरी भी हैं, जो बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास के महत्व को दिखाती है। हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं, उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय है। शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि सहित अन्य न्यासीगण व आमंत्रित संत समाज व अनेक प्रतिष्ठित जन उपस्थित रहे।

“भारत को जानें, भारत को मानें, भारत के बनें और फिर भारत को बनाएं” – डॉ. मनमोहन वैद्य

आठ वर्षों के अनुभव का संग्रह है ‘हम और यह विश्व’ – जगदीप धनखड़

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ का विमोचन समारोह रवींद्र भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारत की मूल अवधारणा, आत्मगौरव, सांस्कृतिक चेतना और अध्ययनशील परंपरा पर व्यापक चर्चा हुई। श्री आनंदम धाम आश्रम, वृंदावन के पीठाधीश्वर ऋतेश्वर जी महाराज, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जागरण के समूह संपादक विष्णु त्रिपाठी, सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली और लेखक डॉ. मनमोहन वैद्य ने अपने विचार प्रकट किए।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारतीयता, अध्ययन और विमर्श की आवश्यकता पर उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि भारत को बनाने से पहले आवश्यक है कि हम पहले भारत को मानें, उसके बाद भारत को जानें, फिर भारत के बनें और उसके बाद भारत को बनाएं। संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण वर्ग में जब श्री प्रणब मुखर्जी को संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया था, तब कुछ लोगों ने बिना कारण विरोध किया। इस एक घटना ने मनमोहन जी को लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में केवल 1 से 6 जून के बीच 378 लोगों ने उनसे मिलने का अनुरोध किया था, जो यह दर्शाता है कि संघ को लेकर समाज में संवाद की गहरी उत्सुकता है।

उन्होंने बताया कि संघ का बेवजह किया गया विरोध कई बार संघ की स्वीकार्यता को और बढ़ा देता है। जॉइन आरएसएस वेबसाइट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सिर्फ उस वर्ष अक्तूबर माह में ही 48,890 लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में जुड़ने का अनुरोध किया। यह भारत के सामाजिक परिवर्तन और संगठन के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।

भारत की अवधारणा पर उन्होंने कहा कि हमें उन कथनों को समझना होगा जो हमारी सोच को प्रभावित करते हैं। उन्होंने लोकप्रिय गीत “सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” की पंक्ति “हम बुलबुले हैं इसके” पर बताया कि ऐसे भाव हमें अपनी मूल चेतना से दूर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि भारत में सांस्कृतिक विविधता है। अपितु यह कहना अधिक सही है कि भारत की संस्कृति एक ही है जो विविध रूपों में प्रकट होती है। भारत में विविधता मूल संस्कृति की शाखाएं हैं, उसका विकल्प नहीं।

उन्होंने कहा कि वेलफेयर स्टेट की अवधारणा भारत की अपनी अवधारणा नहीं है, बल्कि पश्चिम से आयातित विचार है। भारत की परंपरा समाज-आधारित दायित्व पर आधारित रही है। यह पुस्तक चार महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित है और प्रत्येक खंड भारत के विमर्शों पर नई दृष्टि प्रदान करता है।

अध्ययन ही भारत की परंपरा का मूल – विष्णु त्रिपाठी

जागरण समूह के समूह संपादक विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ घर या पुस्तकालय में संग्रह के लिए नहीं लिखी गई है, बल्कि इसके अध्ययन, मनन और भाष्य की आवश्यकता है। भारत की परंपरा किसी एक पुस्तक या एक मत पर आधारित नहीं है। यहाँ ज्ञान की अनेक धाराएँ हैं। हमारी आध्यात्मिकता भी अध्ययन और चिंतन से ही जन्म लेती है। उन्होंने भारत की पहचान पर उठने वाले प्रश्नों पर स्पष्ट कहा कि भारत हिन्दू राष्ट्र है या नहीं जैसी बहसें अध्ययन के अभाव से उत्पन्न होती हैं। जब भारत और भारतीयता पर गौरव का भाव स्थापित हो जाता है, तो ऐसे प्रश्न स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने गुरुनानक देव जी का उदाहरण देते हुए बताया कि वे रामनाम के परम उपासक थे और बाबर की आलोचना सीधे अपने भजनों में करते हैं। इसी रामनाम के प्रसार के साथ वे बगदाद तक पहुँचे थे। यह उदाहरण भारतीय अध्यात्म की गहराई और व्यापकता दोनों को दिखाता है।

यह पुस्तक सोए हुए को जगा देगी” – पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भोपाल आकर इस पुस्तक पर बोलने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है। हम और यह विश्व सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत का दर्पण और भविष्य निर्माण की दिशा दिखाने वाला ग्रंथ है। कहा कि यह पुस्तक आठ वर्षों के अनुभवों का संग्रह है, जिसमें प्रणब मुखर्जी पर दो महत्त्वपूर्ण लेख भी शामिल हैं।

अंग्रेजी में वक्तव्य पर कहा कि मैं अंग्रेजी में इसलिए बोल रहा हूँ ताकि जो लोग देश की सकारात्मक छवि को समझना नहीं चाहते, वे भी स्पष्ट और सीधे शब्दों में भारत के वास्तविक स्वरूप से परिचित हों। आज का भारत तेजी से बदल रहा है, हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और विश्व मंच पर एक मजबूत, आत्मविश्वासी और निर्णायक देश के रूप में उभर रहा है।

राजीव तुली ने सुरुचि प्रकाशन की परंपरा और भविष्य की दिशा का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि सुरुचि प्रकाशन समाज जीवन के विविध महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार पुस्तकों, शोध कृतियों और विचारपरक सामग्री का प्रकाशन कर रहा है। आने वाले महीनों में वॉकिज़्म, पंच परिवर्तन और अन्य बौद्धिक मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण प्रकाशन सामने आने वाले हैं। “हम और यह विश्व” पुस्तक के पाठन के दौरान ऐसा महसूस होता है जैसे पाठक और पुस्तक के बीच सीधा संवाद स्थापित हो रहा हो। भले ही इस पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण पहले प्रकाशित हुआ था, लेकिन वर्तमान संस्करण में कई महत्त्वपूर्ण और विस्तृत जानकारियाँ जोड़ी गई हैं। यह पुस्तक आज के समाज के बड़े विमर्शों को पढ़ने, समझने और उनके भाष्य लिखने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

हिड़मा के शव पर अर्बन नक्सलियों का श्रृगाल विलाप

कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित कई राज्यों के निरपराध लोगों के ख़ून से रत्नगर्भा धरती को रक्तरंजित करने वाले माओवादी आतंकी ‘हिड़मा’ को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। 18 नवम्बर 2025 को लाल आतंक का पर्याय हिड़मा मारा गया। इसके चलते जहां देशभर में ख़ुशी का वातावरण है। बस्तर सहित समूचा वनांचल में उसके आतंक का खौफ़ व्याप्त था। वहां के लोग सुकून की सांस लेने लगे। क्योंकि हिड़मा का मारा जाना माओवादी आतंक के सबसे मज़बूत किले का ढह जाना है। बस्तर में स्थायी शांति की बहाली का संकेत है। इसी बीच छग सरकार ने सदाशयता और मानवीयता दिखलाई। 20 नवम्बर को हिड़मा और उसकी माओवादी पत्नी के शव को अंतिम संस्कार के लिए उसके गांव पूवर्ती भेजा। शव आने की ख़बर के साथ ही माओवादियों का अर्बन मॉड्यूल तुरंत एक्टिवेट हुआ। पूरे लाव-लश्कर के साथ कई टीमें पूवर्ती पहुंचने लगीं। कुछ संस्थानों में बैठे लोग की-बोर्ड में माओवादी बारुद के साथ अलर्ट मोड में बैठ गए। देरी थी बस कुछ एक्सक्लूसिव तस्वीरों, भावुकता भरे वीडियोज, कुछ लोगों के स्क्रिप्टेड वर्जन (वर्सन)। ये इनपुट जैसे ही मिले सियारों का रुदन तुरंत चालू हो गया। अर्बन नक्सल गिरोह के सिपाही हिड़मा के अंतिम संस्कार के नाम पर सहानुभूति बटोरने, उसे ग्लोरीफाई करना शुरू कर दिया।

कामरेड के नाम पर उसके ऊपर काले कपड़ों वाली वर्दी रखी गई। अर्बन नक्सली ‘नक्सलवाद कभी ख़त्म न होने की’ बात कहते नज़र आए। भावनाओं को भुनाने के लिए नैरेटिव सेट किया गया कि – फलां-फलां फूट-फूटकर रोया। ये मिथ्यारोप लगाए गए कि “हिड़मा तो सरेंडर करने आया था। जवानों ने उसका नाहक में एनकाउंटर कर दिया।” – ये सब कितना सोचा समझा नैरेटिव है न? हिड़मा को ऐसा पेश किया जा रहा है कि जैसे वो कोई मासूम दुधमुंहा बच्चा रहा हो।

हिड़मा, वही माओवादी आतंकी है जिस पर 6 राज्यों ने तक़रीबन 1.80 करोड़ का ईनाम रखा था। जिसने ख़ुद 127 हत्याएं की थी। 600 माओवादी-नक्सलियों का जो हेड था। वो हिड़मा जिसने बस्तर के सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा। जनजातीय समाज के जीवन की खुशियां छीन लीं।

ये वही हिड़मा है, जिसने छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में सैकड़ों जवानों की हत्या की। सैकड़ों जवानों की हत्या की साज़िशें रचीं। मई 2013 का झीरम घाटी कांड, जिसमें कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्र कर्मा सहित कई नेताओं की हत्या कर दी गई। उस दौरान सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 33 लोगों की हत्या हुई थी। इसका मास्टरमाइंड हिड़मा ही था। हालांकि महेन्द्र कर्मा की हत्या और झीरम घाटी कांड के पीछे कुछ कांग्रेस के नेताओं द्वारा साज़िश रची जाने की बातें भी सुर्खियां बनीं थीं।

हिड़मा, अहम किरदार था। इन बातों में कितनी सच्चाई थी, इसका कोई अंतिम सत्य अभी तक आया नहीं  है। इससे पहले हिड़मा के नेतृत्व में – 2010 में दंतेवाड़ा में एक यात्री बस को बम के धमाकों से उड़ा दिया था। दंतेवाड़ा बस कांड में 20 जवानों सहित कुल 50 लोग मारे गए थे।

बस्तर क्षेत्र में हिड़मा जैसे माओवादी आतंकियों का कितना भय व्याप्त है। ये मैंने क़रीब से अनुभव किया है। 2024 में गर्मी के महीने में दंतेवाड़ा जाना हुआ। वहां के कुछ सुदूर ग्रामीण इलाकों में गया। एक राजनेता के घर ठहरना तय था। इसलिए उनके यहां गया। जब रास्ते से गुजर रहा था तो उन्होंने कई ऐसी जगहें दिखाई, जहां नक्सलियों ने ख़ूनी खेल रचा था। बीच रास्ते में जवानों की एंबुश लगाकर हत्या की थी। मेले से वापस लौट रहे कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों की माओवादी आतंकियों ने क्रूरता के साथ हत्याएं की थी। IED लगाकर वाहन सहित उड़ा दिया था।

आख़िर में जब मैं उनके घर पहुंचा तो थोड़ा अचंभित हो गया। क्योंकि उनके घर में सुरक्षा के लिए कई ज़वान तैनात थे। उनके भाई अगर घर से बाहर निकलेंगे तो उनकी सुरक्षा में ज़वान साथ-साथ चलेंगे। शाम को एक निश्चित समय के बाद वो घर से बाहर कतई नहीं निकल पाएंगे। – जब मैंने उनसे इस संदर्भ में पूछा तो उन्होंने बताया कि – हम हर समय माओवादियों के निशाने पर हैं। उन्होंने कई घटनाओं का जिक्र भी किया। जब वो और उनके परिवार के लोग माओवादियों को चकमा देकर सुरक्षित बचे थे।….यह बताने की वजह ये है कि – नक्सलवाद-माओवादी आतंकवाद कितना खौफनाक है। इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जिसने आम जनजीवन को तबाह कर दिया हो। निरपराधों के ख़ून से पूरे बस्तर को लथपथ कर दिया हो। उस नक्सलवाद-माओवाद के प्रति क्या कोई सहानुभूति हो सकती है?

ऐसे में हिड़मा के शव और उसकी मौत को लेकर जो लोग आंसू बहा रहे हैं। उनके मंसूबे क्या किसी से छिपे हैं? उस दुर्दांत माओवादी आतंकी की मौत पर मातमपुर्सी, संवेदनाओं का खेल रचना सब कुछ अर्बन नक्सलियों की स्क्रिप्ट का हिस्सा ही मालूम पड़ रहा है। ये सब इसलिए किया गया ताकि हिड़मा के नाम पर लोगों को बरगलाया जा सके। देश और विदेश में छिपे भारत-विरोधी-जनजातीय समाज के विरोधी – आकाओं को ख़ुश किया जा सके। क्योंकि अर्बन नक्सलियों के लिए यही तो फायदे का धंधा है।

वैसे इन अर्बन नक्सलियों को उन जवानों के लिए कभी आंसू बहाते नहीं देखा होगा, जिन्हें हिड़मा और उसके साथियों ने मार दिया। जो ‘की-बोर्ड’ के क्रांतिकारी और तथाकथित ‘मुखौटाधारी’ – हिड़मा को हीरो बनाने में जुटे रहे। मानवीय संवेदनाओं भरी स्टोरीज लिखते रहे। भावुकता भरे स्क्रिप्टेड वीडियो क्लिप जनरेट करते रहे। जबरदस्ती माइक ठूंसकर – संवेदनाओं की बयार बहाने में पूरी ताक़त झोंक दी। हिड़मा के अंतिम संस्कार के समय ऐसा चित्रित करते रहे जैसे हिड़मा कोई महान नायक रहा हो। जबकि उसका पूरा जीवन क्रूर आतंक का पर्याय है। छग के राजनांदगांव में इन्हीं माओवादियों से लोहा लेने वाले हॉक फोर्स के बलिदानी – आशीष शर्मा पर इनकी नज़र ही नहीं गई। नरसिंहपुर के बोहानी गांव में उनका भी 20 नवम्बर को ही अंतिम संस्कार हुआ।

वस्तुत:, ये वही ‘अर्बन नक्सली’ हैं, जिन्होंने हिड़मा जैसे न जाने कितने लोगों को ‘माओवादी आतंकी’ बनाया। विदेशी आकाओं के इशारों पर भारत की धरती को रक्तरंजित करने के लिए बस्तर के जनजातीय समाज के युवाओं, महिलाओं का ब्रेनवॉश किया। उनके हाथों में किताब की बजाय हथियार थमा दिया। ताकि छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित लाल गलियारा कहे जाने वाले हिस्सों में विकास न पहुंच पाए। बस्तर अंचल के लोग सुख-शांति और समृद्धि के साथ न रह सकें।

अब हिड़मा की लाश पर माओवादी गिद्ध अपनी खोई हुई ज़मीन तलाश रहे हैं। हिड़मा जैसे क्रूर दुर्दांत अपराधी के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि अब न तो जंगल में छिपे नक्सली-माओवादी बचने वाले हैं। न ही मुखौटा लगाकर राष्ट्र घात करने वाले अर्बन नक्सली बचेंगे। बस इसीलिए वो हिड़मा के बहाने अपनी माओवादी आतंक की ज़मीन को बचाने की अंतिम कोशिश में जुटे हैं।

पूजन के द्वितीय दिवस पर श्रीराम सहस्रनामार्चन

अयोध्या, 22 नवम्बर। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में होने वाले ध्वाजारोहण कार्यक्रम के लिए द्वितीय दिवस भी विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। एक हजार तुलसी पत्र से भगवान श्री राम का सहस्र नामार्चन हुआ।

आचार्यों द्वारा पहले दिन की भांति ही गणपति पूजन, पंचांग पूजन, षोडष मातृका पूजन के बाद मंडप प्रवेश पूजन कराया गया। इसके बाद योगिनी पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, वास्तु पूजन, नवग्रह पूजन, और प्रधान मंडल के रूप में रामभद्र मंडल व अन्य मंडलों का आवाहन पूजन हुआ।

यजमान डॉ. अनिल मिश्र व अन्य यजमानों ने अर्द्धांगिनी सहित पूजन किया। इस अवसर पर मुख्य आचार्य चंद्रभान शर्मा, उपाचार्य रविंद्र पैठणे, यज्ञ के ब्रह्मा व आचार्य पंकज शर्मा ने पूजन संपन्न कराया। पूजन व्यवस्था प्रमुख आचार्य इंद्रदेव मिश्र व आचार्य पंकज कौशिक की देखरेख में समस्त अनुष्ठान संपन्न हुआ।

खैरागढ़ महोत्सव के समापन समारोह

ज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक धरोहर न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान है, बल्कि यह भारत की विविध कला-पद्धतियों का जीवंत केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि यहां की संस्कृति रामायण काल से भी प्राचीन है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में कला के प्रति प्रेम और संरक्षण की प्रेरणा जगाते हैं तथा कलाकारों को अपने हुनर के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। 
         
समारोह में विशिष्ट अतिथि रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि खैरागढ़ भारत की कला-राजधानी के रूप में उभर रहा है और यह महोत्सव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा। 

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि खैरागढ़ महोत्सव विद्यार्थियों की साधना, सृजनशीलता और कला-अनुसंधान का सशक्त मंच है तथा विश्वविद्यालय भविष्य में राष्ट्रीय कला केंद्र के रूप में स्थापित होगा। 

समारोह में नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने कथक, भरतनाट्यम व ओडिसी नृत्य की सधी हुई प्रस्तुतिया दी। कोलकाता से आए मशहूर सरोदवादक उस्ताद सिराज अली खान और लंदन के तबला वादक पंडित संजू सहाय की जुगलबंदी ने संगीतमय वातावरण रचा। पंडित संजू सहाय के द्वारा तबला वादन की प्रस्तुति दी गई। पुणे की प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी शमा भाटे एवं उनके समूह ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर कथक नृत्य की प्रस्तुतियां दी । 

राजनांदगांव की लोकगायिका श्रीमती कविता वासनिक एवं उनके दल ने लोकसंगीत अनुराग धारा की प्रस्तुति दी।