न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में, एक शाम – योग के नाम

23 जून 2025स्वास्थ्य

मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के दौर में योग, शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शान्ति का माध्यम बनकर उभर रहा है. ऐसे वातावरण में, 21 जून को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 11वें अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन, बहुत से लोगों के लिए निश्चित रूप से राहत का अवसर था. शुक्रवार की शाम, यूएन परिसर का उत्तरी बाग़ीचा, एक खुले योग स्टूडियो में तब्दील हो गया, जहाँ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, यूएन कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने एक विशाल सभा के रूप में, योग के ज़रिए आन्तरिक सन्तुलन और वैश्विक एकता की अनुभूति की…

संघर्षों, बीमारियों, जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं व मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के इस दौर में हम, योग पद्धति को अपना कर, न केवल अपने जीवन में शान्ति का अनुभव कर सकते हैं, बल्कि इससे समुदायों व पृथ्वी के साथ भी एक समरसतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने में मदद मिल सकती है. हर वर्ष 21 जून को मनाए जाने वाले ‘अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शान्ति व समरसता के इसी सन्देश की गूँज सुनाई दी.

यूएन मुख्यालय परिसर में नॉर्थ लॉन को, एक बार फिर खुली हवा में एक योग स्टूडियो के रूप में तब्दील कर दिया गया, और कुछ दिनों से घिरे बादलों व बारिश के बाद नज़र आई खुली धूप ने योग के लिए उत्सुक लोगों का स्वागत किया.

विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, यूएन अधिकारी, कर्मचारी व न्यूयॉर्क के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग यहाँ जुटे, जिन्होंने बेहतर शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया.

पीटर रोजिना, शान्ति प्रकाश नामक एक परियोजना के संस्थापक हैं, और यूएन मुख्यालय में इस सत्र के लिए आना उनके लिए सुखद अनुभव था. उन्होंने 2019 में आयोजित कार्यक्रम को याद किया जब बारिश के कारण योग सत्र को यूएन महासभा हॉल में किया गया था.

“इतनी बड़ी संख्या में लोगों के साथ योग प्रक्रिया का अवसर मुझे बहुत पसंद है. यहाँ बहुत अधिक ऊर्जा है…और मेरे साथ मेरा बेटा भी आया है. मैं उसे यह अनुभव कराने के लिए रोमांचित हूँ.”

बौद्ध शिक्षक लामा आरिया ड्रोल्मा भी हर साल योग कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यूएन पहुँचती हैं. कभी कॉरपोरेट जगत में मॉडलिंग के बाद अब वह आन्तरिक शान्ति व आध्यात्म की राह पर हैं.

उन्होंने बताया कि, “मैं जब भारत में बड़ी हो रही थी, तो योग आसन किया करती थी. इसने न केवल मेरे शरीर को बल्कि मेरी आत्मा को छुआ. यह ध्यान में भी सहायक है. मैं योग को सबसे स्वस्थ विकल्पों में मानती हूँ, जिनके ज़रिए हम अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर सकते हैं.”

सम्पूर्ण जगत, एक परिवार

योग का सन्देश निजी कल्याण से परे तक जाता है और यह सम्पूर्ण जगत के स्वास्थ्य को साथ में लेकर चलने में अहम भूमिका निभा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने यूएन सचिवालय के सहयोग से इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया, जिसकी थीम है: एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग.

भारत के स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत पी. हरीश ने अपने सन्देश में कहा कि योग एक महत्वपूर्ण सत्य को परिलक्षित करता है. निजी कल्याण और हमारे ग्रह का स्वास्थ्य, आपस में गहराई तक जुड़े हुए हैं.

“अपनी देखभाल करने में, हम पृथ्वी की देखभाल करते हैं, और यह चिरस्थाई भारतीय मूल्य, वसुधैव कुटुम्बकम को दर्शाता है, कि सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है.”

“योग दिवस का यह 11वाँ संस्करण, हमें यह चिन्तन करने का एक अवसर प्रदान करता है कि योग किस तरह से वैश्विक कल्याण की एक शक्ति के रूप में उभरा है, जिसने आयु समूहों, भौगोलिक क्षेत्रों और जीवन के हर पहलु में लोगों को छुआ है.”

आनन्द मार्ग महिला कल्याण केन्द्र की दीदी आनन्द राधिका आचार्य ने बताया कि योग, केवल अभ्यास से कहीं बढ़कर है. यह अपने को प्रकृति व सम्पूर्ण विश्व से जोड़ने का माध्यम है.

“बाहर से देखने पर हमारा शरीर नज़र आता है, भीतर हमारा मस्तिष्क है. मगर यदि आप और भीतर जाएं, तो कुछ ऐसा है, जो सदैव हमें देख रहा है, परख रहा है. वह हमारी आत्मा है. योग के ज़रिए, हम उस भीतरी स्थल तक पहुँच सकते हैं. जब हम अपने मस्तिष्क की गहराइयों में उतरते हैं, तो हम महसूस कर पाते हैं कि हम सभी एक दूसरे से कितनी मज़बूती से जुड़े हुए हैं.”

आशा का प्रतीक

यह कार्यक्रम क़रीब डेढ़ घंटे तक चला, जिसमें आर्ट ऑफ़ लिविंग के योग विशेषज्ञों ने प्राणायाम तकनीक, विभिन्न योग मुद्राओं व आसनों के साथ लोगों को इसके लाभ बताए. सत्र का एक मुख्य आकर्षण, स्वास्थ्य के प्रति समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाले डॉक्टर दीपक चोपड़ा रहे, जिन्होंने एक ध्यान सत्र को निर्देशित किया.

न्यूयॉर्क में शिवानन्द योग वेदांत केन्द्र की मार्ता शेडलेट्स्की इस कार्यक्रम में एक समुदाय के एहसास, भरोसे और इस आस्था को पाने के लिए पहुँची कि शान्ति हासिल करना सम्भव है. और इस सत्र का यूएन मुख्यालय में आयोजित होना उनके लिए ख़ास था.

उन्होंने कहा कि फ़िलहाल दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, जितनी भी उथलपुथल, युद्ध हो रहे हैं, उनकी पृष्ठभूमि में यह स्थान एक बेहतर भविष्य के लिए आशा और शान्ति की सम्भावनाओं का प्रतीक है.

Leave a Comment