रायपुर : विधानसभा परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0‘ अभियान के तहत हुआ वृहद पौधरोपण : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा

लोकतंत्र के मंदिर से पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का सशक्त संदेश

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। श्एक पेड़ मां के नाम 3.0 अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढि़यों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढि़यों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्एक पेड़ मां के नाम 3.0श् अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।

कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

रायपुर : लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएगी राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण स्व. डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि : गनियारी में आयोजित दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके पैतृक गृह ग्राम गनियारी में आयोजित इस शोकसभा में मुख्यमंत्री ने स्व. डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया तथा शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर स्व. डॉ. तीजन बाई के पुत्र श्री दिलहरण पारधी तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भेंट कर उनका हालचाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई का योगदान  आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। स्व. डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण स्व. डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र के विद्यार्थी उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को राज्य सरकार द्वारा चिरस्थायी रखते हुए  उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को रायपुर के संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियां उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

श्रद्धांजलि सभा को सांसद श्री विजय बघेल, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक पद्मश्री श्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्व. डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर पद्मश्री श्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य गणमान्यजन, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

रायपुर : लोकतंत्र की पाठशाला बना विधानसभा परिसर: शकुंतला विद्यालय के विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की भेंट: लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय व्यवस्था की मिली जानकारी

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर लोकतंत्र की पाठशाला बन गया, जब भिलाई स्थित शकुंतला विद्यालय के ग्यारहवीं एवं बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं का दल शैक्षणिक भ्रमण पर विधानसभा पहुंचा। विद्यार्थियों ने विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय परंपराओं को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि  उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा विधायक श्री रिकेश सेन भी उपस्थित थे।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।

विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।

सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ श्री शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के श्री कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

 सहकारिता एक नारा नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है : मंत्री श्री केदार कश्यप

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिल रही है। इसी कड़ी में सहकारिता विभाग द्वारा राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में ‘सहकार संकल्प दौड़’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने हरी झंडी दिखाकर किया।

         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा रहा है।

          मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। केद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करने जो संकल्प लिया था, उसे पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सहकारिता विभाग ने विगत ढ़ाई वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

   सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता सप्ताह को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया गया है, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को अधिक सक्षम बनाया जा रहा है, किसानों को समय पर ऋण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। साथ ही सहकारिता के दायरे का विस्तार कर युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों को स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

‘सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर’

          इस वर्ष की दौड़ “सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर” थीम पर आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों में सहयोग, एकता, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक विकास का संदेश पहुंचाना था।

सुबह 6 बजे मरीन ड्राइव से हुई शुरुआत

          सहकार संकल्प दौड़ सुबह 6 बजे तेलीबांधा मरीन ड्राइव से शुरू हुई। इसमें प्रदेशभर से युवा, विद्यार्थी, किसान, सहकारी संस्थाओं के सदस्य, महिला समूहों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार

        दौड़ में पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान बेमेतरा के श्री ओंकार वर्मा, द्वितीय अमलेश्वर के श्री करण साहू और तृतीय स्थान पर श्री खेमराज सोनकर रहे। इसी तरह महिला वर्ग में प्रथम सुश्री मीरा साहू, द्वितीय सुश्री पूर्णिमा साहू और तृतीय स्थान पर सुश्री शिबू वर्मा रही। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः पांच हज़ार,  तीन हज़ार और दो हजार रूपए का नगद पुरस्कार प्रदान कियागया। इस पहल से युवाओं और आम नागरिकों में खेल तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी।

सहकारिता से समृद्धि और स्वस्थ समाज का संकल्प

        मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि यह दौड़ केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सहकारिता, स्वास्थ्य और सामाजिक सहभागिता का जन-जागरूकता अभियान है। इसका उद्देश्य “सहकारिता से समृद्धि”, “साथ चलें, साथ बढ़ें” और “स्वस्थ समाज, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

जनभागीदारी से मजबूत होगा सहकारिता आंदोलन

        सहकारिता विभाग ने प्रदेशवासियों का उत्साहपूर्ण सहभागिता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही सहकारिता आंदोलन और अधिक मजबूत होगा। सहकारिता की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाकर आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जाएगा।

         इस अवसर पर अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्केटिंग फेडरेशन के अध्यक्ष श्री शशिकांत द्विवेदी, राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, अंबिकापुर बैंक के अध्यक्ष श्री रामकृष्ण सिंह, मार्कफेड के एमडी श्री जितेंद्र शुक्ला, अपेक्स बैंक के एमडी श्री के एन कांडे सहित अपेक्स बैंक, नाबार्ड, बुनकर महासंघ और विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

मार्कफेड मुख्यालय में ‘सहकारी संगोष्ठी‘ का भव्य आयोजन

सहकारिता से ही आएगी किसानों के जीवन में समृद्धि

रायपुर, 02 जुलाई 2026

राज्य में मनाए जा रहे सहकारिता सप्ताह (29 जून से 06 जुलाई 2026) के गरिमामयी अनुक्रम में आज छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) के नवा रायपुर स्थित मुख्य कार्यालय में एक दिवसीय ‘सहकारी संगोष्ठी‘ का सफल आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय संगोष्ठी में राज्य के कृषि, खाद्य और सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेतृत्व और तकनीकी विशेषज्ञों ने शिरकत की।  

    मार्कफेड के प्रबंध संचालक ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी माननीय मंत्रियों, विशिष्ट अतिथियों और सहकारी संघ के प्रतिनिधियों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी श्गमछाश् पहनाकर और पुष्प गुच्छ से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने राज्य के किसानों की सेवा में मार्कफेड की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।  

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि सहकार से समृद्धि भारत सरकार का प्रमुख दृष्टिकोण और अभियान है जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों को मजबूत करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में सहकारिता केवल एक नारा नहीं है रह गया है बल्कि यह ग्रामीण भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आजीविका को बेहतर बनाने का एक माध्यम बन गई है। चाहे डेयरी हो, मत्स्य पालन हो या कृषि उत्पादों का विपणन ,सहकारिता इन सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता और आधुनिकीकरण ला रही है। 

श्री द्विवेदी ने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से जल, वायु, मिट्टी का प्रदूषण बढ़ रहा है। अतः इफको द्वारा लांच किए गए नैनो उर्वरक का ज्यादा ज्यादा किसानों को उपयोग करना चाहिए वरना आज स्वच्छ पीने के पानी के लिए जिस तरह से बिसलेरी की बोतल लेकर घूमना पड़ता है भविष्य में प्रदूषण इतना बढ़ जाएगा कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा। उन्होंने विपणन संघ के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को साझा किया और विभागीय अधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के लिए प्रेरित किया। 
 
संगोष्ठी के मुख्य विषय ‘सहकार से समृद्धि‘ पर विचार रखते हुए अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता प्राथमिक सरकारी समिति ने प्राथमिक सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना ब्याज या रियायती दरों पर ऋण वितरण की महत्ता को रेखांकित किया।  

श्री कनीराम जी ने सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूर्ण होने पर मनाये जा रहे सहकारी सप्ताह में अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि सहकारिता ही आमजन के मूल में है। सहकारिता से युवाओं, बेरोजगारों, महिलाओं को रोजगार सृजित होंगे। बिन सहकार, नहीं उद्धार के मूल मंत्र को स्वीकार करते हुए निश्चित रूप से सबको साथ लेकर सही दिशा में काम करने की जरूरत है। राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेललचंदन ने भी सम्बोधित किया। 

तकनीकी सत्र में नाबार्ड और एन.सी.डी.सी. के राज्य प्रतिनिधियों ने कृषक उत्पादक संगठन के गठन, उनके वित्तीय लाभों और भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सब्सिडी योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे और सीमांत किसान सामूहिक खेती के जरिए सीधे बड़े बाजारों से जुड़कर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।  

 कार्यक्रम में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रवीण दुबे, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष अनिमेष कश्यप, दुर्ग सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष नरेश यदु, सह संयोजक मुरलीधर सिन्हा सहित अन्य अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री

चिंतन शिविर से निकले विचार बन रहे सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – मुख्यमंत्री श्री साय

सुशासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति पर हुआ गहन मंथन

पिछले चिंतन शिविरों से मिले सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस, सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए लागू – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

दूसरे दिन आयोजित ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ श्री सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सदस्य श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘अमृत प्रयास’, ‘बनयान रिवोल्यूशन’ और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है।

‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया।

‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। 

चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।

दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

गांवों के विकास में सहभागी बनने का किया आह्वान, सिंचाई व्यवस्था के दिए निर्देश

रायपुर, 27 जून 2026

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी  

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है।

पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील  

         गृह मंत्री श्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश  

         उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की। 

सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं

        चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें।

पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार  

       उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप  

            वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।

            इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर श्री रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 किसानों के चेहरे पर मिठास : भोरमदेव शक्कर कारखाना ने रचा देश में भुगतान नया रिकॉर्ड

गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर समय पर भुगतान की होती है, लेकिन कबीरधाम जिले का भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना इस मामले में देश के लिए मिसाल बना है। लगातार दूसरे वर्ष कारखाने ने जून माह में ही किसानों को समर्थन मूल्य (एफआरपी) और अतिरिक्त रिकवरी राशि का शत-प्रतिशत भुगतान कर देश के सहकारी शक्कर उद्योग में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यही कारण है कि यह कारखाना केवल चीनी उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे और सहकारिता की सफलता का प्रतीक बन गया है।

रविवार को आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में 29.83 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित किए गए। इसमें 6.91 करोड़ रुपये एफआरपी की शेष राशि और 22.92 करोड़ रुपये अतिरिक्त रिकवरी राशि शामिल है। इसके साथ ही पेराई सत्र 2025-26 में किसानों को कुल 107.10 करोड़ रुपये का भुगतान पूरा हो गया है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि केवल आर्थिक भुगतान नहीं, बल्कि किसानों और सहकारिता व्यवस्था के बीच मजबूत विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव शक्कर कारखाना किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हजारों किसानों का अपना संस्थान है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक गन्ना उत्पादन और आपूर्ति करने का आह्वान करते हुए आगामी सत्र में चार लाख मीट्रिक टन से अधिक गन्ना पेराई का लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया।

भोरमदेव शक्कर कारखाना केवल समय पर भुगतान नहीं बल्कि किसान हितैषी नवाचारों के कारण भी चर्चा में है। लगातार तीसरे वर्ष 12 प्रतिशत से अधिक शुगर रिकवरी, रियायती दर पर शक्कर वितरण में सहभागिता, ‘बलराम सदन‘ कृषक प्रतीक्षालय, मिट्टी परीक्षण सुविधा, प्रेसमड वितरण, उन्नत गन्ना बीज एवं सीडलिंग और नियमित प्रशिक्षण जैसी पहलें किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मददगार हैं। वहीं, कारखाना परिसर में संचालित शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के चेयरमैन एवं कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में अपनाई गई पारदर्शी और किसान-केंद्रित कार्यप्रणाली ने इसे देश के अग्रणी सहकारी शक्कर कारखानों में शामिल कर दिया है। समय पर भुगतान, आधुनिक तकनीक, उत्पादन वृद्धि और किसानों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि जब सहकारिता मजबूत होती है तो केवल उद्योग नहीं, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ती है। यही वजह है कि आज भोरमदेव मॉडल देश के अन्य सहकारी शक्कर कारखानों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा 33 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण सत्र शुभारंभ में हुए शामिल

नैतिकता से बड़ा कोई बल नहीं होता- श्री शर्मा

रायपुर, 15 जून 2026

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा 33 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण सत्र शुभारंभ में हुए शामिल

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मत्री श्री विजय शर्मा की उपस्थिति में आज वर्ष 2021 एवं वर्ष 2024 के छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित 33 उप पुलिस अधीक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण का नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी में शुभारम्भ हुआ। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आप सभी ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण से इस प्रतिष्ठित सेवा में स्थान प्राप्त किया है। यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक सेवा, एक दायित्व, और एक बड़ी जिम्मेदारी है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा 33 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण सत्र शुभारंभ में हुए शामिल

        इस समारोह में पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, अति. पुलिस महानिदेशक, प्रशिक्षण श्री दीपाशु काबरा उपस्थित हुए। साथ ही अकादमी के महानिदेशक श्री अजय यादव, वरिष्ट पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक पल्लव, अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमति सोनिया उके एवं अकादमी के समस्त अधिकारी, कर्मचारीगण उपस्थित थे।

पुलिस पर कानून का पालन कराने और समाज की रक्षा की जिम्मेदारी

      कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि कि आज का दिन न केवल आप सभी नव-नियुक्त उप पुलिस अधीक्षकों के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आप सभी ने कठिन परिश्रम, लगन और समर्पण के बल पर इस प्रतिष्ठित पद को प्राप्त किया है। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नैतिकता से बड़ा कोई बल नहीं होता, आज नवीन समाज की आवश्यकता को समझना और उसके आधार पर संवेदनशीलता पूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है। पुलिस केवल कानून का पालन करवाने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की रक्षा करने वाली एक शक्ति है। हमें न केवल अपराध को रोकना है, वल्कि जनता में विश्वास और सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करना है।

पुलिस की पहचान नागरिक को सुरक्षा एवं न्याय दिलाना है

         उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस की पहचान न केवल कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में है, बल्कि राज्य के हर नागरिक को सुरक्षा एवं न्याय दिलाने में भी है। हमारी चुनौती केवल अपराथों पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें समाज के विश्वास को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। पुलिसिंग आज केवल शारीरिक साहस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग, साइबर अपराधों से निपटने की दक्षता और सामुदायिक जुड़ाव भी शामिल है।

पुलिस पर राष्ट्र सेवा, समाज सेवा दायित्व

        इस अवसर पर राज्य के पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम द्वारा कहा गया कि आज का दिन छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार के लिए अत्यंत गौरव और उत्साह का अवसर है। आपने कठिन प्रतियोगी परीक्षा, अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर यह स्थान प्राप्त किया है। आज से आपका जीवन केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और कानून के शासन को सुट्टढ़ करने के महान दायित्व से जुड़ रहा है।

33 उप पुलिस अधीक्षक बुनियादी प्रशिक्षण में शामिल

        नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी के निदेशक श्री यादव में अपने उद्बोधन में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी में प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 33 अभ्यर्थी उप पुलिस अधीक्षक बुनियादी प्रशिक्षण हेतु उपस्थित हुये हैं। अधिकांश प्रशिक्षु इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त किये हैं। संस्था के निदेशक द्वारा उप. पुलिस अधीक्षकों के 02 वर्षों के पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई कि प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक किन-किन विषयों का अध्ययन करेंगे एवं जिला व्यवहारिक प्रशिक्षण में क्या-क्या प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

        कार्यक्रम के अंत में डॉ. अभिषेक पल्लव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नेताजी सुभाष चंद्र बोसश् राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इसके पश्चात अकादमी परिसर में उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने नीम के पौधे का रोपण किया। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों एवं प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों द्वारा 100 पौधों का वृक्षारोपण किया गया।